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सत्कर्म से बड़ी बाधाएं रहती हैं दूर
ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2015 12:34 AM IST
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ललितपुर। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से भारत में अपनी सेवायें देते हुए राम प्रकाश जी सागर प्रवास के दौरान ललितपुर पहुंचे। उन्होंने कहा कि सत्कर्म से बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।
सिविल लाइन स्थित वरदानी भवन में उन्होंने बताया कि इंजीनियर का दायित्व संभालते हुए राजयोगी जीवन शैली के दायित्वों का निर्वाह्न किया है। अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले की घटना को साझा करते हुए उन्होंने उस समय के अनुभवों को बताया।
उन्होंने कहा कि घटना के समय वह स्वयं 64 वीं मंजिल पर थे। 64वीं मंजिल से सीढ़ी के माध्यम से बाहर आए और इस दौरान उन्हें 3.30 घंटे लगे, लेकिन राजयोग की साधना से निर्भय होकर चलते रहे और बिल्डिंग से बाहर आने के चार मिनट बाद ही इमारत धराशायी हो गई। उन्होंने कहा कि यह ईश्वरीय मदद, राजयोग और सत्कर्मों का प्रभाव था।
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गिलास में पानी डालते जाओ तो स्वयं ही हवा निकल जाती है। कहने का तात्पर्य यह है कि दूसरों पर गुस्सा होने के बजाए गलतियां को माफ कर दो तो दूसरों की मदद पर अपनी दुख तकलीफ भूल जाते हैं। इसी को सत्कर्म कहते हैं। इस दौरान सागर से आईं दीदी बीके छाया एवं राम प्रकाश जी का कार्यक्रम के शुभारंभ में बीके माया दीदी ने तिलक लगाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर डा. श्रीराम साहू, रवि नारायण चौबे, रोहित, सत्य नारायण, चंद्रशेखर राठौर, गोविंद भाई, राम स्वरूप, राहुल जैन आदि मौजूद रहे। अंत में दीदी बीके चित्ररेखा ने आभार जताया।
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सिविल लाइन स्थित वरदानी भवन में उन्होंने बताया कि इंजीनियर का दायित्व संभालते हुए राजयोगी जीवन शैली के दायित्वों का निर्वाह्न किया है। अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले की घटना को साझा करते हुए उन्होंने उस समय के अनुभवों को बताया।
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उन्होंने कहा कि घटना के समय वह स्वयं 64 वीं मंजिल पर थे। 64वीं मंजिल से सीढ़ी के माध्यम से बाहर आए और इस दौरान उन्हें 3.30 घंटे लगे, लेकिन राजयोग की साधना से निर्भय होकर चलते रहे और बिल्डिंग से बाहर आने के चार मिनट बाद ही इमारत धराशायी हो गई। उन्होंने कहा कि यह ईश्वरीय मदद, राजयोग और सत्कर्मों का प्रभाव था।
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गिलास में पानी डालते जाओ तो स्वयं ही हवा निकल जाती है। कहने का तात्पर्य यह है कि दूसरों पर गुस्सा होने के बजाए गलतियां को माफ कर दो तो दूसरों की मदद पर अपनी दुख तकलीफ भूल जाते हैं। इसी को सत्कर्म कहते हैं। इस दौरान सागर से आईं दीदी बीके छाया एवं राम प्रकाश जी का कार्यक्रम के शुभारंभ में बीके माया दीदी ने तिलक लगाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर डा. श्रीराम साहू, रवि नारायण चौबे, रोहित, सत्य नारायण, चंद्रशेखर राठौर, गोविंद भाई, राम स्वरूप, राहुल जैन आदि मौजूद रहे। अंत में दीदी बीके चित्ररेखा ने आभार जताया।