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खीर बनाकर छत पर रखी, चांद की रोशनी में सूई में लगाया धागा

Sat, 31 Oct 2020 02:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2020 02:09 AM IST
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sharad poordima celebrated
शरद पूर्णिमा पर देवगढ़ रोड स्थित एक घर में पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। आश्विन पूर्णिमा पर शुक्रवार की देर शाम महिलाओं ने पति की दीर्घायु और घर में सुख समृद्धि के लिए भगवान विष्णु की पूजा कर अभीष्ट की कामना की। अमृत की बूंदों की वर्षा वाली रात आश्विन पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने घरों में पूजा अर्चना की। शरद पूर्णिमा रात में घर की छतों पर खीर भी बनाकर रखी गई। शरद पूर्णिमा रात श्रद्धालु छतों पर चांद की रोशनी में टहलते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने चंद्रमा की रोशनी में सूई में धागा भी डाला।
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शरद पूर्णिमा पर छतों पर रखी गई खीर शनिवार की सुबह खीर प्रसाद में बांटी जाएगी। आश्विन मास की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि इस दिन चंद्रमा पूरे ओज में रहता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इस तिथि को रात में चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। पं. कुंजबिहारी मिश्र ने बताया कि वैसे तो दिन में चतुर्दशी तिथि रही। रात में पूर्णिमा तिथि हुई है। रात में पूजा होने की वजह से आज ही शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। रात में खीर बनाकर खुले में रखने से वह औषधि के समान हो जाती है। रात में चंद्रमा की रोशनी में सूई में धागा लगाने से आंख की ज्योति बढ़ती है।
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भारतीय संस्कृति में नक्षत्रों, ग्रहों, पर्वो एवं महोत्सवों का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी के हिमालय और हिंद महासागर के भूभाग को अपनी औषधियुक्त किरणों से प्रकाशित करते हैं। महर्षि चरक ने आयुर्वेद के विख्यात ग्रंथ चरक संहिता में इसका उल्लेख किया है। इसी वजह से भारतवासी पूर्ण चंद्रमा का दर्शन व्रत एवं पूजन करते हैं। चंद्रमा के प्रकाश में खीर रखने की परंपरा है जो चंद्रमा की किरणों से औषधि एवं अमृतमय होती है। आज के दिन द्वापर में भगवान श्री कृष्ण ने महारास किया था जो लोक विख्यात है।
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डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री, एसोसिएट प्रोफेसर एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष नेहरु स्नातकोत्तर महाविद्यालय ललितपुर।
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