{"_id":"6621a9067970fba03d097c3a","slug":"seed-scam-commissioner-took-cognizance-sought-reply-within-seven-days-lalitpur-news-c-131-1-ltp1004-113458-2024-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीज घोटाला : कमिश्नर ने लिया संज्ञान, सात दिन में मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीज घोटाला : कमिश्नर ने लिया संज्ञान, सात दिन में मांगा जवाब
विज्ञापन
ललितपुर। 98 लाख रुपये के बीज घोटाले में कृषि विभाग घिरता नजर आ रहा है। मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने संयुक्त कृषि निदेशक मामले में एक सप्ताह में जवाब मांगा है। इसको लेकर विभाग के अफसरों से लेकर कर्मचारियों में हड़कंप है। वहीं, विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
कृषि विभाग ने बीज घोटाले में वितरण में ही खेल नहीं किया है। अनुदान राशि तक में घपला कर दिया है। मामले में जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक लाभार्थी किसानों को बीज तो कम दिया ही है, शत-प्रतिशत अनुदान राशि भी बड़ा हेरफेर किया है। जांच में एक गांव निवासी किसान ने बताया था कि अनुदान राशि के रूप में खाते में 12 हजार रुपये आए थे। इसमें से दो हजार रुपये मिले, शेष दस हजार रुपये गांव के प्रधान ने निकलवा कर वापस ले लिए। इस मामले को लेकर अमर उजाला ने 12 अप्रैल को पेज नंबर तीन पर बीज घोटाला: किसानों को मिले दो हजार... ठेकेदार ले गया दस हजार शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद विभाग हरकत में आया।
कृषि विभाग की गोष्ठियों में हुआ खेल
बीज घोटाला ही नहीं कृषि यंत्रों में भी गड़बड़झाला किए जाने की चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार गोष्ठियों में भी बड़ा खेल किया गया है। इसमें मानक अनुरूप सुविधाएं नहीं की गईं। दस्तावेजों में एक ही पेन से कई हस्ताक्षर तक किए गए। यदि इसकी भी जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
विज्ञापन
वर्जन
जांच रिपोर्ट की आख्या अभी प्राप्त नहीं हुई है। मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - एलबी यादव, संयुक्त कृषि निदेशक
विज्ञापन
कृषि विभाग ने बीज घोटाले में वितरण में ही खेल नहीं किया है। अनुदान राशि तक में घपला कर दिया है। मामले में जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक लाभार्थी किसानों को बीज तो कम दिया ही है, शत-प्रतिशत अनुदान राशि भी बड़ा हेरफेर किया है। जांच में एक गांव निवासी किसान ने बताया था कि अनुदान राशि के रूप में खाते में 12 हजार रुपये आए थे। इसमें से दो हजार रुपये मिले, शेष दस हजार रुपये गांव के प्रधान ने निकलवा कर वापस ले लिए। इस मामले को लेकर अमर उजाला ने 12 अप्रैल को पेज नंबर तीन पर बीज घोटाला: किसानों को मिले दो हजार... ठेकेदार ले गया दस हजार शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद विभाग हरकत में आया।
विज्ञापन
कृषि विभाग की गोष्ठियों में हुआ खेल
बीज घोटाला ही नहीं कृषि यंत्रों में भी गड़बड़झाला किए जाने की चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार गोष्ठियों में भी बड़ा खेल किया गया है। इसमें मानक अनुरूप सुविधाएं नहीं की गईं। दस्तावेजों में एक ही पेन से कई हस्ताक्षर तक किए गए। यदि इसकी भी जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
विज्ञापन
वर्जन
जांच रिपोर्ट की आख्या अभी प्राप्त नहीं हुई है। मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - एलबी यादव, संयुक्त कृषि निदेशक