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निजी स्कूलों में प्रवेश पाना रह गया सपना
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 15 Jun 2015 01:27 AM IST
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ललितपुर। नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 गरीबों के लिए छलावा साबित हो रहा है। हर साल निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए विज्ञापन जारी किए जाते हैं, इसके बाद भी निजी संस्थानों की आरक्षित सीटों पर गरीब परिवार के बच्चों को दाखिला नहीं मिल पाता है। इसका खुलासा खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट से हुआ है। वर्तमान सत्र में खंड शिक्षा अधिकारियों ने बीएसए को भेजी सूचना में प्रवेश शून्य दर्शाए हैं।
छह से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के सभी बच्चों को कक्षा एक से आठ तक नि: शुल्क शिक्षा मुहैया कराने के लिए अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 लागू किया गया है। विशेष तौर पर इस अधिनियम की धारा 12 (1) (ग) में गरीब बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया गया है।
इसके अंतर्गत गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में नि:शक्त बच्चा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, विकलांगता ग्रस्त बच्चा, एचआईवी अथवा कैंसर पीड़ित माता- पिता का बच्चा, निराश्रित बेघर बच्चा और गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित है। ऐसे अभिभावक जिनके बच्चों की आयु छह से वर्ष से अधिक है और उन्हें निकटवर्ती शासकीय, परिषदीय अथवा सहायता प्राप्त विद्यालयों में स्थान उपलब्धता के अभाव में प्रवेश नहीं मिल पाया है तो वह अपने बच्चों को निवास से एक किलोमीटर की परिधि में गैर सहायतित विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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लेकिन, विडंबना यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हर साल प्रवेश के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं। इस साल फरवरी माह में गरीब बच्चों के प्रवेश के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसके बाद भी गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल सका है। इस तथ्य का खुलासा खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से बीएसए को दी गई सूचना से हुआ है। इसमें कहा गया है कि अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों का प्रवेश असेवित वार्ड व बस्ती के अभाव में नहीं हुआ है। नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक की कक्षाओं में प्रवेश शून्य दर्शाया गया है। इससे शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 (1) (ग) के अनुपालन में प्रवेश आवेदन पत्र का प्रारूप समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया था। इसके अलावा समस्त विकासखंडों के कार्यालय के सूचना पट पर चस्पा किया गया था। लेकिन, किसी ने भी प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया।
- विनोद कुमार मिश्रा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ललितपुर।
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छह से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के सभी बच्चों को कक्षा एक से आठ तक नि: शुल्क शिक्षा मुहैया कराने के लिए अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 लागू किया गया है। विशेष तौर पर इस अधिनियम की धारा 12 (1) (ग) में गरीब बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया गया है।
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इसके अंतर्गत गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में नि:शक्त बच्चा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, विकलांगता ग्रस्त बच्चा, एचआईवी अथवा कैंसर पीड़ित माता- पिता का बच्चा, निराश्रित बेघर बच्चा और गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित है। ऐसे अभिभावक जिनके बच्चों की आयु छह से वर्ष से अधिक है और उन्हें निकटवर्ती शासकीय, परिषदीय अथवा सहायता प्राप्त विद्यालयों में स्थान उपलब्धता के अभाव में प्रवेश नहीं मिल पाया है तो वह अपने बच्चों को निवास से एक किलोमीटर की परिधि में गैर सहायतित विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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लेकिन, विडंबना यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हर साल प्रवेश के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं। इस साल फरवरी माह में गरीब बच्चों के प्रवेश के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसके बाद भी गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल सका है। इस तथ्य का खुलासा खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से बीएसए को दी गई सूचना से हुआ है। इसमें कहा गया है कि अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों का प्रवेश असेवित वार्ड व बस्ती के अभाव में नहीं हुआ है। नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक की कक्षाओं में प्रवेश शून्य दर्शाया गया है। इससे शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 (1) (ग) के अनुपालन में प्रवेश आवेदन पत्र का प्रारूप समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया था। इसके अलावा समस्त विकासखंडों के कार्यालय के सूचना पट पर चस्पा किया गया था। लेकिन, किसी ने भी प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया।
- विनोद कुमार मिश्रा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ललितपुर।