{"_id":"cca98bbcf9da1a8d4ea50e4f9cc4b04a","slug":"satsang-hindi-news-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रभु को जानने से परम प्रेम उत्पन्न होता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रभु को जानने से परम प्रेम उत्पन्न होता है
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 29 Dec 2015 01:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर (ब्यूरो)। निरंकारी सत्संग में मौदहा से आए संत रामबहादुर ने निरंकारी ने कहा कि एक प्रभु को जानने से परम प्रेम उत्पन्न होता है। प्रभु परमात्मा है। सर्व व्यापी और सर्वशक्तिमान जो कण-कण में व्याप्त है, जिसका एहसास होने से जीवन में भक्ति की शुरूआत होती है। घृणा, ईर्ष्या, जाति, ऊंच, नीच, धर्म इत्यादि की दीवारें ज्ञान की रोशनी से समाप्त हो जाती हैं।
सरस्वती ज्ञान मंदिर बालिका इंटर कालेज ललितपुर में आयोजित निरंकारी सत्संग में संत रामबहादुर ने कहा कि इंसान ने गफलत के कारण अपने कदम पीछे कर लिए हैं। इसी कारण इंसान पशुवृत्ति में जी रहा है, जबकि ज्ञान की तरफ कदम आगे बढाए, तो देवता बन जाता है। इंसान का मानवता की ओर कदम बढ़ाना ही शुभ कारण है। मानव में ऐसी महान शक्ति है, अगर वह उसे जान ले तो हर काम आसान हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मानव की शक्ति को जानने की अवस्था को आत्म दर्शन का ज्ञान, आत्मबोध आदि शब्दों से संबोधित करते हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह माना जाता है, जब मानव अपने निज स्वरूप का आत्मदर्शन कर लेता है। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज हर मानव को ब्रह्मज्ञान देकर मानव को जागृत कर रहे हैं।
विज्ञापन
सत्संग में महात्मा अमान साहू, बहन राजा बाई, महेश कुमार चंदेरिया, सुरेंद्र निरंकारी, विनीता, हर नारायण पटेल, गुलाब, राधेश्याम, मीरा, नीलम, मान सिंह, महेश निरंकारी, विशाल भटनागर, कीर्ति भटनागर, शालिनी भटनागर, सुप्रिया, नीलम, सरला, सपना, संतोष आदि का योगदान रहा।
विज्ञापन
सरस्वती ज्ञान मंदिर बालिका इंटर कालेज ललितपुर में आयोजित निरंकारी सत्संग में संत रामबहादुर ने कहा कि इंसान ने गफलत के कारण अपने कदम पीछे कर लिए हैं। इसी कारण इंसान पशुवृत्ति में जी रहा है, जबकि ज्ञान की तरफ कदम आगे बढाए, तो देवता बन जाता है। इंसान का मानवता की ओर कदम बढ़ाना ही शुभ कारण है। मानव में ऐसी महान शक्ति है, अगर वह उसे जान ले तो हर काम आसान हो जाता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मानव की शक्ति को जानने की अवस्था को आत्म दर्शन का ज्ञान, आत्मबोध आदि शब्दों से संबोधित करते हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह माना जाता है, जब मानव अपने निज स्वरूप का आत्मदर्शन कर लेता है। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज हर मानव को ब्रह्मज्ञान देकर मानव को जागृत कर रहे हैं।
विज्ञापन
सत्संग में महात्मा अमान साहू, बहन राजा बाई, महेश कुमार चंदेरिया, सुरेंद्र निरंकारी, विनीता, हर नारायण पटेल, गुलाब, राधेश्याम, मीरा, नीलम, मान सिंह, महेश निरंकारी, विशाल भटनागर, कीर्ति भटनागर, शालिनी भटनागर, सुप्रिया, नीलम, सरला, सपना, संतोष आदि का योगदान रहा।