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Lalitpur News: संबंधों के जाल को तोड़कर होती है मोक्ष की प्राप्ति
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- जैन मुनि ने बानपुर अतिशय क्षेत्र में दिए मंगल प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बानपुर(ललितपुर)। कस्बा में स्थित अतिशय क्षेत्र में वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर के शास्त्र स्वाध्याय एवं मंगल प्रवचन का आयोजन हुआ। जिसमें जैन संत ने कहा कि लोग संबंधों में जाल में फंसे हुए हैं और जो संबंधों के जाल को तोड़ लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज संघ सहित 10 मुनिराजों के साथ अतिशय क्षेत्र बानपुर में विराजमान हैं। बृहस्पतिवार को आचार्य मुनि शिवदत्त सागर, मुनि भूदत्त सागर महाराज ने अन्न, जल का त्याग करके 48 घंटे का उपवास किया और शेष महाराज की आहारचर्या अतिशय क्षेत्र में ही संपन्न हुई। प्रातः काल शास्त्र स्वाध्याय एवं मंगल प्रवचन हुए प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा संबंधों के जाल का नाम संसार है। आत्मा के साथ कर्मों का संबंध अनादि काल से है। संबंध सबको अच्छे लगते हैं, लेकिन वह संसार के कारण होते हैं। संबंध बनाते समय सुख और टूटते समय दुख होता है।
वैरागी भयभीत नहीं होता वह हमेशा निर्भय रहता है। जो दूसरों को जाल बनाता है, वह जाल में स्वयं फंस जाता है और अपने जीवन को तबाह कर देता है। इसलिए संसार संबंधों का जाल है, इस जाल को हमें स्वयं तोड़ना होगा और उससे बाहर निकलना होगा। सारे संबंध तोड़ने पर ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि जैन मुनि अपने परिवार, धन, संपत्ति और रिश्तेदारी से संबंध तोड़ देते हैं और आत्मा व परमात्मा से संबंध जोड़ लेते हैं। इस मौके पर आचार्यश्री के संग मुनि शिवदत्त सागर, सुदत्त सागर, गुरुदत्त सागर, भूदत्त सागर, मेघदत्त सागर, पद्मदत्त सागर, वृषभदत्त, क्षुल्लक चंद्रदत्तसागर, श्रीदत्तसागर भी विराजमान हैं। बताया कि आचार्यश्री ससंघ का शुक्रवार को आहार के बाद महरौनी के लिए प्रस्थान होगा।
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बानपुर(ललितपुर)। कस्बा में स्थित अतिशय क्षेत्र में वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर के शास्त्र स्वाध्याय एवं मंगल प्रवचन का आयोजन हुआ। जिसमें जैन संत ने कहा कि लोग संबंधों में जाल में फंसे हुए हैं और जो संबंधों के जाल को तोड़ लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज संघ सहित 10 मुनिराजों के साथ अतिशय क्षेत्र बानपुर में विराजमान हैं। बृहस्पतिवार को आचार्य मुनि शिवदत्त सागर, मुनि भूदत्त सागर महाराज ने अन्न, जल का त्याग करके 48 घंटे का उपवास किया और शेष महाराज की आहारचर्या अतिशय क्षेत्र में ही संपन्न हुई। प्रातः काल शास्त्र स्वाध्याय एवं मंगल प्रवचन हुए प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा संबंधों के जाल का नाम संसार है। आत्मा के साथ कर्मों का संबंध अनादि काल से है। संबंध सबको अच्छे लगते हैं, लेकिन वह संसार के कारण होते हैं। संबंध बनाते समय सुख और टूटते समय दुख होता है।
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वैरागी भयभीत नहीं होता वह हमेशा निर्भय रहता है। जो दूसरों को जाल बनाता है, वह जाल में स्वयं फंस जाता है और अपने जीवन को तबाह कर देता है। इसलिए संसार संबंधों का जाल है, इस जाल को हमें स्वयं तोड़ना होगा और उससे बाहर निकलना होगा। सारे संबंध तोड़ने पर ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि जैन मुनि अपने परिवार, धन, संपत्ति और रिश्तेदारी से संबंध तोड़ देते हैं और आत्मा व परमात्मा से संबंध जोड़ लेते हैं। इस मौके पर आचार्यश्री के संग मुनि शिवदत्त सागर, सुदत्त सागर, गुरुदत्त सागर, भूदत्त सागर, मेघदत्त सागर, पद्मदत्त सागर, वृषभदत्त, क्षुल्लक चंद्रदत्तसागर, श्रीदत्तसागर भी विराजमान हैं। बताया कि आचार्यश्री ससंघ का शुक्रवार को आहार के बाद महरौनी के लिए प्रस्थान होगा।
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