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Lalitpur News: गोशाला के टिनशेड में रहने को विवश सहरिया परिवार
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। सरकार भले ही गरीबों को आशियाना देने के दावे करती रहे पर हकीकत में जरूरतमंद अभी भी आवासहीन हैं। जिन्हें आवास स्वीकृत भी हुए, वह धनराशि मिलने के बाद भी उसे पूरा नहीं कर पाए। वहीं, ग्राम पंचायत बारयो के पूरन सहरिया को अब तक आवास नहीं मिल सका है। वह गोशाला के टिनशेड में रहने को विवश हैं।
विकास खंड महरौनी की ग्राम पंचायत बारयो में वर्ष 2019 से 23 तक 58 पात्रों को पीएम व सीएम योजना के अंतर्गत आवास दिए गए थे, जिनमें 10 आवास आज भी अधूरे पड़े हैं। ये परिवार पॉलिथीन डालकर रह रहे हैं। वहीं, पूरन सहरिया एक आवास के लिए दर-दर भटक रहा है। पूरन सहरिया और उसके परिवार को सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। वह पॉलिथीन के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है। तेज हवा व बारिश से पॉलिथीन फट गई तो मजबूरन गोशाला में बने टिनशेड के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
गांव में इसके जैसे कई सहरिया परिवार खुले आसमान के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं। गांव में कई लाभार्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने आवास के लिए मिलने वाली धनराशि तो निकाल ली, किंतु चार वर्ष बाद भी आवास पूर्ण नहीं करा पाए। किसी की दीवार अधूरी है तो किसी की छत नहीं है।
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वर्जन
बारयो में ज्यादातर सहरिया समुदाय के लाभार्थियों के आवास अधूरे पड़े हैं। उन्हें नोटिस जारी कर पूरा करवाया जाएगा। आवासहीनों की सूची तैयार की जा रही है। स्वीकृति मिलते ही आवास उपलब्ध कराया जाएगा।- धीरेंद्र कुमार, ग्राम विकास अधिकारी, बारयो
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सिलावन (ललितपुर)। सरकार भले ही गरीबों को आशियाना देने के दावे करती रहे पर हकीकत में जरूरतमंद अभी भी आवासहीन हैं। जिन्हें आवास स्वीकृत भी हुए, वह धनराशि मिलने के बाद भी उसे पूरा नहीं कर पाए। वहीं, ग्राम पंचायत बारयो के पूरन सहरिया को अब तक आवास नहीं मिल सका है। वह गोशाला के टिनशेड में रहने को विवश हैं।
विकास खंड महरौनी की ग्राम पंचायत बारयो में वर्ष 2019 से 23 तक 58 पात्रों को पीएम व सीएम योजना के अंतर्गत आवास दिए गए थे, जिनमें 10 आवास आज भी अधूरे पड़े हैं। ये परिवार पॉलिथीन डालकर रह रहे हैं। वहीं, पूरन सहरिया एक आवास के लिए दर-दर भटक रहा है। पूरन सहरिया और उसके परिवार को सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। वह पॉलिथीन के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है। तेज हवा व बारिश से पॉलिथीन फट गई तो मजबूरन गोशाला में बने टिनशेड के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
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गांव में इसके जैसे कई सहरिया परिवार खुले आसमान के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं। गांव में कई लाभार्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने आवास के लिए मिलने वाली धनराशि तो निकाल ली, किंतु चार वर्ष बाद भी आवास पूर्ण नहीं करा पाए। किसी की दीवार अधूरी है तो किसी की छत नहीं है।
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बारयो में ज्यादातर सहरिया समुदाय के लाभार्थियों के आवास अधूरे पड़े हैं। उन्हें नोटिस जारी कर पूरा करवाया जाएगा। आवासहीनों की सूची तैयार की जा रही है। स्वीकृति मिलते ही आवास उपलब्ध कराया जाएगा।- धीरेंद्र कुमार, ग्राम विकास अधिकारी, बारयो