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Lalitpur News: कस्बा के अंदर से नहीं जाती हैं रोडबेज बसें, यात्रियों को हो रही परेशानी
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- दो किलोमीटर दूर बाईपास पर यात्रियों को उतार कर चलीं जाती हैं बसें
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी (ललितपुर)। कस्बा में रोडवेज बसों का स्टाॅपेज होने के बावजूद कस्बा के अंदर से बस नहीं आती हैं, कस्बा के दो किमी पहले बाईपास पर सवारियों को उतार दिया जाता है, इससे यात्रियों को बड़ी असुविधा होती है।
सभी रोडवेज बसों का स्टॉपेज बांसी में है, बसों पर भी बांसी स्टाॅपेज लिखा रहता है, बांसी तक का किराया भी बस परिचालक सवारियों से लेते हैं, लेकिन रोडवेज की कोई भी बस कस्बा के अंदर से नहीं निकलती है। बल्कि सवारियों को दो किमी पहले बाईपास पर उतार दिया जाता है, जिससे झांसी और ललितपुर की तरफ से आने वाली सवारियों को दो किमी पैदल चलना पड़ता है, इससे शाम और रात के समय अकेली महिला सवारी को बहुत परेशान होती हैं फिर भी बस ड्राइवर अकेली महिला सवारी को दो किमी कस्बा से दूर बाईपास पर उतारकर चला जाता है, उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना घटने की संभावना रहती है। ग्रामीणों द्वारा बस चालक और परिचालक से बस अंदर से ले जाने की कहने पर वह मना कर देते हैं कि कोई बस नहीं जाती तो हम भी नहीं जाएंगे। नियमानुसार बस को कस्बा के अंदर से जाना चाहिए लेकिन बस स्टाफ अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए नियम कानूनों को ताक पर रख देते हैं।
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फोटो- 55
रोडवेज बसों के कस्बा के अंदर से न आने से बहुत परेशानी होती है, उस समय और अधिक परेशानी बढ़ जाती है, जब महिला सवारी साथ होती है।
कपिल कुमार शर्मा,ग्रामीण
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फोटो- 56
रोडवेज बस का स्टाॅफ अपने निजी स्वार्थ के चलते बस बाईपास से ले जाते हैं, इससे सवारियों को बहुत परेशानी होती है। अनेक लोग इसी वजह से बस में नहीं बैठते हैं, इससे राज्य परिवहन को आर्थिक क्षति भी होती है, विभागीय अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
-नरेश सरावगी, ग्रामीण
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी (ललितपुर)। कस्बा में रोडवेज बसों का स्टाॅपेज होने के बावजूद कस्बा के अंदर से बस नहीं आती हैं, कस्बा के दो किमी पहले बाईपास पर सवारियों को उतार दिया जाता है, इससे यात्रियों को बड़ी असुविधा होती है।
सभी रोडवेज बसों का स्टॉपेज बांसी में है, बसों पर भी बांसी स्टाॅपेज लिखा रहता है, बांसी तक का किराया भी बस परिचालक सवारियों से लेते हैं, लेकिन रोडवेज की कोई भी बस कस्बा के अंदर से नहीं निकलती है। बल्कि सवारियों को दो किमी पहले बाईपास पर उतार दिया जाता है, जिससे झांसी और ललितपुर की तरफ से आने वाली सवारियों को दो किमी पैदल चलना पड़ता है, इससे शाम और रात के समय अकेली महिला सवारी को बहुत परेशान होती हैं फिर भी बस ड्राइवर अकेली महिला सवारी को दो किमी कस्बा से दूर बाईपास पर उतारकर चला जाता है, उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना घटने की संभावना रहती है। ग्रामीणों द्वारा बस चालक और परिचालक से बस अंदर से ले जाने की कहने पर वह मना कर देते हैं कि कोई बस नहीं जाती तो हम भी नहीं जाएंगे। नियमानुसार बस को कस्बा के अंदर से जाना चाहिए लेकिन बस स्टाफ अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए नियम कानूनों को ताक पर रख देते हैं।
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रोडवेज बसों के कस्बा के अंदर से न आने से बहुत परेशानी होती है, उस समय और अधिक परेशानी बढ़ जाती है, जब महिला सवारी साथ होती है।
कपिल कुमार शर्मा,ग्रामीण
फोटो- 56
रोडवेज बस का स्टाॅफ अपने निजी स्वार्थ के चलते बस बाईपास से ले जाते हैं, इससे सवारियों को बहुत परेशानी होती है। अनेक लोग इसी वजह से बस में नहीं बैठते हैं, इससे राज्य परिवहन को आर्थिक क्षति भी होती है, विभागीय अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
-नरेश सरावगी, ग्रामीण