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Lalitpur News: बनने के बाद कुछ महीने में ही उखड़ने लगीं सड़कें
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सड़कों की गुणवत्ता से इस हद तक समझौता किया गया है कि इनके बनने के कुछ महीने बाद ही ये उखड़ने लगी हैं। गोविंद सागर बांध और नाराहट-जामनी बांध मार्ग पर गड्ढे होने के साथ गिट्टियां निकलकर बाहर आ रही हैं। इन सड़कों का निर्माण हाल में किया गया है, फिर भी चलने लायक नहीं बची हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेश है सड़कों का हाल...।
दृश्य एक
एक साल में ही जर्जर हुई सड़क
शहर स्थित गोविंद सागर बांध की सड़क का निर्माण सिंचाई विभाग ने करीब एक साल पहले कराया था। अब यह सड़क उखड़ने लगी है। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। चार पहिया तो दूर दो पहिया वाहन तक की गति सीमित हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण ठीक से नहीं किया गया है। इसकी जांच कराई जाए।
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आठ माह में ही हो गए गड्ढे
डोंगराखुर्द। नाराहट-जामनीबांध मार्ग का निर्माण आठ माह पहले किया गया था। करीब 14 किमी की सड़क से आधा सैकड़ा गांव के लोग आते-जाते हैं। लेकिन, पहली बारिश में ही सड़क धराशाई हो गई। कहीं गड्ढे हो गए तो कहीं गिट्टी उखड़ने लगी। इस मार्ग से लगभग एक दर्जन बसों का संचालन होता है। कई लोग राह बदलकर जाने को मजबूर हैं।
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ललितपुर। सड़कों की गुणवत्ता से इस हद तक समझौता किया गया है कि इनके बनने के कुछ महीने बाद ही ये उखड़ने लगी हैं। गोविंद सागर बांध और नाराहट-जामनी बांध मार्ग पर गड्ढे होने के साथ गिट्टियां निकलकर बाहर आ रही हैं। इन सड़कों का निर्माण हाल में किया गया है, फिर भी चलने लायक नहीं बची हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेश है सड़कों का हाल...।
दृश्य एक
एक साल में ही जर्जर हुई सड़क
शहर स्थित गोविंद सागर बांध की सड़क का निर्माण सिंचाई विभाग ने करीब एक साल पहले कराया था। अब यह सड़क उखड़ने लगी है। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। चार पहिया तो दूर दो पहिया वाहन तक की गति सीमित हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण ठीक से नहीं किया गया है। इसकी जांच कराई जाए।
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आठ माह में ही हो गए गड्ढे
डोंगराखुर्द। नाराहट-जामनीबांध मार्ग का निर्माण आठ माह पहले किया गया था। करीब 14 किमी की सड़क से आधा सैकड़ा गांव के लोग आते-जाते हैं। लेकिन, पहली बारिश में ही सड़क धराशाई हो गई। कहीं गड्ढे हो गए तो कहीं गिट्टी उखड़ने लगी। इस मार्ग से लगभग एक दर्जन बसों का संचालन होता है। कई लोग राह बदलकर जाने को मजबूर हैं।
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