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एक दर्जन गांवों के तालाबों का होगा पुनरोद्धार
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:07 AM IST
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ललितपुर। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों के प्राचीन तालाबों का पुनरोद्धार किया जाएगा, इससे किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।
बुंदेलखंड में पानी की कमी काफी विकराल समस्या बनती जा रही है। संभवत: पूर्व में भी इसी तरह के हालात रहे होंगे, तभी तो पूर्वजों ने गांव- गांव में तालाब बनवाए थे। इन तालाबों से पानी की रीचार्जिंग होती थी तथा गांव के लोगों को पानी की कभी कमी नहीं पड़ती थी। लेकिन, पिछले कुछ समय से इन तालाबों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। किसी पर अतिक्रमण हो रहा है तो कोई कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
ऐसे में तालाब बदहाल होते जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इन तालाबों की देखरेख और रखरखाव सही तरीके से किया जाए, तो न केवल गांवों में पानी की समस्या हल हो जाएगी, बल्कि खेतों की सिंचाई के लिए भी तालाबों से पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों के प्राचीन तालाबों के पुनरोद्धार की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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ग्राम सीरौन कलां, लागौन, किसलवांस, दैलवारा, बुदावनी, पूरा विरधा, चुरावनी, मऊ, म्यांव, ककड़ारी, पवा, बिजरौठा, सीरौन खुर्द, सुनौरा, बम्हौरी सहना, कुआगांव और धौरीसागर स्थित गांवों के प्राचीन तालाबों के पुनरोद्धार की कार्ययोजना तैयार की गई है। सिंचाई निर्माण खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता इंजी. नरेंद्र जड़िया ने बताया कि तालाबों के पुनरोद्धार पर लगभग पचास करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की गई है। तालाबों के पुनरोद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि की जाएगी। इससे लगभग 1,841 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की सुविधा होगी। इस सुविधा से उक्त गांवों के लगभग 4,572 किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने कार्ययोजना का अनुमोदन कर दिया है। जल्द ही इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा। योजना की स्वीकृति के बाद तालाबों का पुनरोद्धार कराया जाएगा।
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बुंदेलखंड में पानी की कमी काफी विकराल समस्या बनती जा रही है। संभवत: पूर्व में भी इसी तरह के हालात रहे होंगे, तभी तो पूर्वजों ने गांव- गांव में तालाब बनवाए थे। इन तालाबों से पानी की रीचार्जिंग होती थी तथा गांव के लोगों को पानी की कभी कमी नहीं पड़ती थी। लेकिन, पिछले कुछ समय से इन तालाबों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। किसी पर अतिक्रमण हो रहा है तो कोई कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
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ऐसे में तालाब बदहाल होते जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इन तालाबों की देखरेख और रखरखाव सही तरीके से किया जाए, तो न केवल गांवों में पानी की समस्या हल हो जाएगी, बल्कि खेतों की सिंचाई के लिए भी तालाबों से पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों के प्राचीन तालाबों के पुनरोद्धार की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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ग्राम सीरौन कलां, लागौन, किसलवांस, दैलवारा, बुदावनी, पूरा विरधा, चुरावनी, मऊ, म्यांव, ककड़ारी, पवा, बिजरौठा, सीरौन खुर्द, सुनौरा, बम्हौरी सहना, कुआगांव और धौरीसागर स्थित गांवों के प्राचीन तालाबों के पुनरोद्धार की कार्ययोजना तैयार की गई है। सिंचाई निर्माण खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता इंजी. नरेंद्र जड़िया ने बताया कि तालाबों के पुनरोद्धार पर लगभग पचास करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की गई है। तालाबों के पुनरोद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि की जाएगी। इससे लगभग 1,841 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की सुविधा होगी। इस सुविधा से उक्त गांवों के लगभग 4,572 किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने कार्ययोजना का अनुमोदन कर दिया है। जल्द ही इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा। योजना की स्वीकृति के बाद तालाबों का पुनरोद्धार कराया जाएगा।