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Lalitpur News: गैंगस्टर के आरोपी की रिमांड निरस्त बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश

Fri, 25 Jul 2025 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jul 2025 01:18 AM IST
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Remand of gangster accused cancelled, order to release him on bond
ललितपुर। न्यायालय अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) यादवेंद्र सिंह प्रथम की कोर्ट ने गैंगस्टर के मामले में कोतवाली क्षेत्र के एक आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध एवं मौलिक अधिकारों का उल्लंघन पाते हुए रिमांड निरस्त कर दी। न्यायालय ने आरोपी को एक लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर अविलंब रिहा करने के आदेश दिए।
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कोतवाली ललितपुर अंतर्गत मोहल्ला चौकाबाग स्थित तिवारी पेट्रोल पंप के सामने निवासी कालू उर्फ मनीष कुशवाहा पर कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली पुलिस ने आरोपी को बुधवार को न्यायालय अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत में पेश किया और विवेचक ने आरोपी का साठ दिन का रिमांड मांगा। जिस पर आरोपी के अधिवक्ता ने रिमांड का विरोध करते हुए तर्क रखा कि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी के पर्याप्त आधार नहीं बताए गए हैं, जो 41 दं.प्र.सं./ धारा 35 बीएनएसएस के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए गिरफ्तारी की गई है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 22 (1) का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है एवं आरोपी की गिरफ्तारी अवैधानिक है।
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इसके साथ ही गिरफ्तारी प्रपत्र में आरोपी को 23 जून को सुबह 6.50 करना बताया, जिसकी सूचना उसकी पत्नी को दिया जाना अंकित किया गया है। विवेचक ने गिरफ्तारी के कारण भी बताए। लेकिन अधिवक्ता ने तर्क किया कि गिरफ्तारी मेमो के अंत में यह भी अंकित किया गया है कि गिरफ्तारी के कारण एवं आधार से आरोपी को भली-भांति लिखित में अवगत कराया गया है,लेकिन विवेचक की और से ऐसा कोई लिखित प्रपत्र केस डायरी के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। जबकि गिरफ्तारी की सूचना उसकी पत्नी किस प्रारूप पर किस प्रकार उपलब्ध कराई, ऐसा भी कोई प्रपत्र विवेचक द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस पर न्यायालय ने मामले में परीक्षण के उपरांत आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध एवं उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करना पाया। ऐसे में न्यायाधीश ने आरोपी कालू उर्फ मनीष कुशवाहा का रिमांड पर्याप्त आधार नहीं पाए जाने पर निरस्त कर दिया और उसे एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने रिहा करने के आदेश दिए।
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