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...कुर्बानी दे दी पर न सिर झुकाया
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वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई जयंती की पूर्व संध्या डिजिटल कवि सम्मेलन में गूगल मीट पर आयोजित कवि
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में अमर उजाला ने डिजिटल कवि सम्मेलन आयोजित किया। इस दौरान कवियों ने महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य एवं पराक्रम पर पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। इसमें कवियों ने रानी की वीरगाथा का वर्णन किया। कुर्बानी दे दी पर न सिर झुकाया...कविता खूब पसंद की गई।
अमर उजाला महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती को उत्सव के रूप मना रहा है। इसमें विभिन्न संगठन भागीदारी जता रहे हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत डिजिटल कवि सम्मेलन से हुई, इसमें कई कवियों ने प्रतिभाग किया। कवियों की कविताएं सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता भी गूगल मीट से जुड़े। इसमें जय बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय पनारी, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा और मिशन फॉर क्वालिटी ने सहभागिता की।
राज्य के ख्याति प्राप्त शायर मो. शकील ने अपनी रचना सुनाई कि इस धरती का तुमने क्या मान बढ़ाया है, कुर्बानी दे दी पर न सिर झुकाया। इस रचना को खूब सराहा गया। शीलचंद जैन शील ने सुनाया कि समर की दीपशिखा थी झांसी वाली रानी।
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दीप्ति जैन ने सुनाया कि रानी थी वह झांसी की, पर भारत जननी कहलाई। हेमंत तिवारी ने बुंदेलों की सुनो कहानी, बुंदेलों की वाणी में...कविता सुनाई। कवियत्री अर्चना तिवारी ने सुनाया कि उन्नीस को जन्मी थी, सब पर थी इक्कीस। मोहिनी जैन महक ने सुनाया कि ये बेटी राजदुलारी हैं, ये बेटी जान से प्यारी हैं, ये बाबुल के घर आंगन की महकती एक फुलवारी है, इन्हें न गर्भ में यूं मारो, युग-युग तरसोगे बेटी को सुन लो हत्यारों। शिक्षक राजेश लिटौरिया ने बेसिक स्कूलों के होने वाले निरीक्षणों पर कटाक्ष करते हुए सुनाया कि का भय है जिन्हें, वो अब न घबराएं, बीमा पॉलिसी आकर के करवाए। शिखर चन्द्र ने घर-घर दीप जले, हमको लगे भले, जाति धर्म भाषा से हटकर, हम सब मिले गले।
इसके अलावा इस मौके पर प्रमुख रूप से राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री केदारनाथ तिवारी, जय बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय के प्राचार्य दिनेश बाबू गौतम, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया, जिला कोषाध्यक्ष आलोक श्रीवास्तव, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी, मिशन फॉर क्वालिटी एजुकेशन के आनंद तिवारी के अतिरिक्त संतोष गुप्ता, शैलेश जैन, नीलम कुशवाहा, दीप्ति जैन, राधा, अमृता लोहिया, कुमकुम रानी जयपुर, सोनम जैन आदि ने प्रमुख रूप से प्रतिभाग किया।
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अमर उजाला महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती को उत्सव के रूप मना रहा है। इसमें विभिन्न संगठन भागीदारी जता रहे हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत डिजिटल कवि सम्मेलन से हुई, इसमें कई कवियों ने प्रतिभाग किया। कवियों की कविताएं सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता भी गूगल मीट से जुड़े। इसमें जय बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय पनारी, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा और मिशन फॉर क्वालिटी ने सहभागिता की।
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राज्य के ख्याति प्राप्त शायर मो. शकील ने अपनी रचना सुनाई कि इस धरती का तुमने क्या मान बढ़ाया है, कुर्बानी दे दी पर न सिर झुकाया। इस रचना को खूब सराहा गया। शीलचंद जैन शील ने सुनाया कि समर की दीपशिखा थी झांसी वाली रानी।
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दीप्ति जैन ने सुनाया कि रानी थी वह झांसी की, पर भारत जननी कहलाई। हेमंत तिवारी ने बुंदेलों की सुनो कहानी, बुंदेलों की वाणी में...कविता सुनाई। कवियत्री अर्चना तिवारी ने सुनाया कि उन्नीस को जन्मी थी, सब पर थी इक्कीस। मोहिनी जैन महक ने सुनाया कि ये बेटी राजदुलारी हैं, ये बेटी जान से प्यारी हैं, ये बाबुल के घर आंगन की महकती एक फुलवारी है, इन्हें न गर्भ में यूं मारो, युग-युग तरसोगे बेटी को सुन लो हत्यारों। शिक्षक राजेश लिटौरिया ने बेसिक स्कूलों के होने वाले निरीक्षणों पर कटाक्ष करते हुए सुनाया कि का भय है जिन्हें, वो अब न घबराएं, बीमा पॉलिसी आकर के करवाए। शिखर चन्द्र ने घर-घर दीप जले, हमको लगे भले, जाति धर्म भाषा से हटकर, हम सब मिले गले।
इसके अलावा इस मौके पर प्रमुख रूप से राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री केदारनाथ तिवारी, जय बुंदेलखंड विधि महाविद्यालय के प्राचार्य दिनेश बाबू गौतम, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया, जिला कोषाध्यक्ष आलोक श्रीवास्तव, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी, मिशन फॉर क्वालिटी एजुकेशन के आनंद तिवारी के अतिरिक्त संतोष गुप्ता, शैलेश जैन, नीलम कुशवाहा, दीप्ति जैन, राधा, अमृता लोहिया, कुमकुम रानी जयपुर, सोनम जैन आदि ने प्रमुख रूप से प्रतिभाग किया।