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राजपुर में अधूरे और शौचालय मिले आवास
ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2016 12:21 AM IST
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तालबेहट (ललितपुर)। उपजिलाधिकारी रत्नाकर मिश्र ने विकास खंड अंतर्गत ग्राम राजपुर में चौपाल लगा कर विकास और राजस्व कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में उन्हें आवास और अधिकांश शौचालय अधूरे मिलें।
सबसे पहले उन्होंने पूर्व मेें हुए पट्टेदारों के कब्जे के संबंध में ग्रामीणों से जानकारी ली। जिस पर ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में हुए पट्टों पर सभी का कब्जा है। गांव में 81 शौचालय का पैसा आया था, जिसमें से अधिकांश शौचालय अधूरे हैं। गांव में 44 हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से मात्र दो हैंडपंप पानी दे रहें हैं।
गांव में पेंशन धारकों को मिलने वाली पेंशन की जानकारी अन्य मजरों के लोगों के मौजूद न रहने के कारण न हो सकी। जिस पर लेखपाल को पूरी जानकारी करने के लिए आदेशित किया गया।
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विद्यालय में मिड-डे मील बनने की बात बताई गई। गांव में 500 जॉब कार्ड धारकों में से 250 लोगों को काम मिलना बताया गया। मनरेगा के तहत चल रहे काम के बारे में जानकारी करने पर रोजगार सेवक ने बताया कि 10 दिन से नेट न आने के कारण मस्टरोल नहीं बन पा रहा है, जिसके कारण किसी को काम नहीं मिला पा रहा है।
उपजिलाधिकारी ने इसके बाद वर्ष 2011-12 में बने ललतिया पत्नी मंगला, वर्ष 2012-13 में बने सुमन पत्नी हरीसिंह एवं 2014-15 में बने बूंदी पत्नी अमान के इंदिरा आवासों को देखा। जिनमें ताला लगा मिला। इसके अलावा तीनों आवास बाहर से ही अपूर्ण मिलें।
ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के गैर मौजूद रहने पर जब इस संबंध में रोजगार सेवक से जानकारी ली परन्तु वह कुछ भी नहीं बता सका। इस मौके पर उनके सहायक प्रवीण प्रधान, लेखपाल रमेश वर्मा और ग्रामीण मौजूद रहें।
कही साजिश के तहत आवासों में ताला तो नहीं लगवाया
राजपुर में वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान में काफी तनातनी चली आ रही है। निरीक्षण के दौरान आवासों में ताला लगा होना और लाभार्थी का मौके पर मौजूद न मिलना गांव के जनप्रतिनिधियों की राजनीति का हिस्सा तो नहीं है। गांव के लोगों भी मौके पर इस मामले को लेकर तरह तरह की चर्चाएं करते रहे।
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सबसे पहले उन्होंने पूर्व मेें हुए पट्टेदारों के कब्जे के संबंध में ग्रामीणों से जानकारी ली। जिस पर ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में हुए पट्टों पर सभी का कब्जा है। गांव में 81 शौचालय का पैसा आया था, जिसमें से अधिकांश शौचालय अधूरे हैं। गांव में 44 हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से मात्र दो हैंडपंप पानी दे रहें हैं।
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गांव में पेंशन धारकों को मिलने वाली पेंशन की जानकारी अन्य मजरों के लोगों के मौजूद न रहने के कारण न हो सकी। जिस पर लेखपाल को पूरी जानकारी करने के लिए आदेशित किया गया।
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विद्यालय में मिड-डे मील बनने की बात बताई गई। गांव में 500 जॉब कार्ड धारकों में से 250 लोगों को काम मिलना बताया गया। मनरेगा के तहत चल रहे काम के बारे में जानकारी करने पर रोजगार सेवक ने बताया कि 10 दिन से नेट न आने के कारण मस्टरोल नहीं बन पा रहा है, जिसके कारण किसी को काम नहीं मिला पा रहा है।
उपजिलाधिकारी ने इसके बाद वर्ष 2011-12 में बने ललतिया पत्नी मंगला, वर्ष 2012-13 में बने सुमन पत्नी हरीसिंह एवं 2014-15 में बने बूंदी पत्नी अमान के इंदिरा आवासों को देखा। जिनमें ताला लगा मिला। इसके अलावा तीनों आवास बाहर से ही अपूर्ण मिलें।
ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के गैर मौजूद रहने पर जब इस संबंध में रोजगार सेवक से जानकारी ली परन्तु वह कुछ भी नहीं बता सका। इस मौके पर उनके सहायक प्रवीण प्रधान, लेखपाल रमेश वर्मा और ग्रामीण मौजूद रहें।
कही साजिश के तहत आवासों में ताला तो नहीं लगवाया
राजपुर में वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान में काफी तनातनी चली आ रही है। निरीक्षण के दौरान आवासों में ताला लगा होना और लाभार्थी का मौके पर मौजूद न मिलना गांव के जनप्रतिनिधियों की राजनीति का हिस्सा तो नहीं है। गांव के लोगों भी मौके पर इस मामले को लेकर तरह तरह की चर्चाएं करते रहे।