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पारा गिरा, किसानों के चेहरे खिले
ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2015 12:15 AM IST
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ललितपुर। अचानक बदले मौसम के मिजाज ने जहां ठंडक का एहसास कराया है, वहीं मानसून की बेरुखी से उदास किसानों के चेहरे भी खिला दिए हैं। पिछले बारह घंटे में तापमान में 9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।
मंगलवार की दोपहर तक अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि बुधवार को तापमान गिरकर 26 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अभी तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। वहीं, जिले के विभिन्न इलाकों में हुई बरसात ने किसानों को थोड़ी सी राहत दी।
खेतों में नमी के लिए नहरों में पानी आने का इंतजार करने वाले किसानों को बारिश से मदद मिल गई है। जिले का किसान रबी की फसल की बुआई के लिए परेशान था, क्योंकि खेतों में बिल्कुल नमी नहीं थी। पानी बरसा नहीं है, इसलिए कुओं में पानी नहीं है। इस कारण किसानों को नहर चलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक नहर संचालित नहीं हो सकी है। इस कारण किसान खेतों का पलेवा करने के लिए परेशान था, लेकिन बरसात ने किसानों की उम्मीद जगा दी है।
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खाली पड़े हैं बांध
दो साल से जिले के किसानों को अतिवृष्टि और ओलावृष्टि का कहर सहना पड़ा है। इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने के कारण किसानों को सूखा की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जिले के बांधों में सूखे की स्थिति है। केवल राजघाट बांध को छोड़कर किसी भी बांध में सिंचाई योग्य पर्याप्त पानी नहीं है। नहरों के नहीं चलने की स्थिति में सीमित किसानों के पास नलकूप के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों हल्की बारिश के आसार से किसानों का कुछ हद का फायदा हो सकता है। वैसे भी कम बारिश व सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण जिले के किसानों को पहले ही कम पानी वाली फसलें अलसी, सरसों, चना आदि बुआई की सलाह कृषि विभाग द्वारा दी जा रही है।
ठंड का एहसास शुरू
मौसम के बदलाव ने बुधवार की सुबह ही लोगों को ठंडक की दस्तक का एहसास करा दिया। बुधवार को दिन में चार बजे ही शाम सात बजे जैसा नजारा हो गया। दोपहर बाद से शुरु हुई रिमझिम बारिश से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
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मंगलवार की दोपहर तक अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि बुधवार को तापमान गिरकर 26 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अभी तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। वहीं, जिले के विभिन्न इलाकों में हुई बरसात ने किसानों को थोड़ी सी राहत दी।
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खेतों में नमी के लिए नहरों में पानी आने का इंतजार करने वाले किसानों को बारिश से मदद मिल गई है। जिले का किसान रबी की फसल की बुआई के लिए परेशान था, क्योंकि खेतों में बिल्कुल नमी नहीं थी। पानी बरसा नहीं है, इसलिए कुओं में पानी नहीं है। इस कारण किसानों को नहर चलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक नहर संचालित नहीं हो सकी है। इस कारण किसान खेतों का पलेवा करने के लिए परेशान था, लेकिन बरसात ने किसानों की उम्मीद जगा दी है।
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खाली पड़े हैं बांध
दो साल से जिले के किसानों को अतिवृष्टि और ओलावृष्टि का कहर सहना पड़ा है। इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने के कारण किसानों को सूखा की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जिले के बांधों में सूखे की स्थिति है। केवल राजघाट बांध को छोड़कर किसी भी बांध में सिंचाई योग्य पर्याप्त पानी नहीं है। नहरों के नहीं चलने की स्थिति में सीमित किसानों के पास नलकूप के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों हल्की बारिश के आसार से किसानों का कुछ हद का फायदा हो सकता है। वैसे भी कम बारिश व सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण जिले के किसानों को पहले ही कम पानी वाली फसलें अलसी, सरसों, चना आदि बुआई की सलाह कृषि विभाग द्वारा दी जा रही है।
ठंड का एहसास शुरू
मौसम के बदलाव ने बुधवार की सुबह ही लोगों को ठंडक की दस्तक का एहसास करा दिया। बुधवार को दिन में चार बजे ही शाम सात बजे जैसा नजारा हो गया। दोपहर बाद से शुरु हुई रिमझिम बारिश से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।