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फ्यूजवायर सिस्टम, सीटी के बिना बिजली सप्लाई
lalitpur
Updated Wed, 28 Dec 2016 02:03 AM IST
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बिजली
- फोटो : amar ujala
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बिजली उपघरों में उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर बिना सुरक्षा के कार्य कर रहे हैं। ट्रांसफार्मरों को बिना फ्यूज वायर सिस्टम और करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) उपकरणों के बिना ही बिजली सप्लाई हो रही है। फ्यूज वायर सिस्टम नहीं होने के चलते ट्रांसफार्मरों पर हाइटेंशन विद्युत तारों से सीधे जोड़कर आपूर्ति ओसीबी मशीनों तक पहुंचाई जा रही है। करीब 50 लाख रुपये तक की कीमत के ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को विभाग द्वारा पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने से ट्रांसफार्मर खराब होने का खतरा बना रहता है।
गल्ला मंडी स्थित 66 केवी व बाईपास स्थित 33 केवी विद्युत सब स्टेशन से शहर समेत सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों घरों को बिजली आपूर्ति प्रदान कर रोशन किया जाता है। विद्युत आपूर्ति के लिए गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन पर पांच एमवीए के तीन व आठ एमवीए का एक उच्च क्षमता का विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। जबकि बाईपास विद्युत सब स्टेशन पर दस एमवीए के दो ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। यहां ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय की गाइड लाइन के अनुसार करंट ट्रांसफार्मर यानी सीटी या एमसीवी या फिर फ्यूज वायर सिस्टम लगाया जाता है। ताकि हाइटेंशन लाइनों या फिर ओसीबी या बीसीबी मशीनों में फाल्ट आने पर सीधा ट्रांसफार्मर पर जर्क न आए और उक्त सीटी या फ्यूज वायर सिस्टम से विद्युत सप्लाई आगे जाने से रुक जाए। गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन पर पांच एमवीए के दो ट्रांसफार्मरों पर न तो उक्त सीटी उपकरण ही लगाया गया है और न ही फ्यूज वायर सिस्टम लगाया गया है। ऐसे में यदि हाइटेंशन लाइनों में कोई बड़ा फाल्ट होता है, तो इसका सीधा असर ट्रांसफार्मर पर पड़ेगा और ट्रांसफार्मर खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि कई बार यहां उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब भी हो चुके हैं। वहीं बाइपास विद्युत सब स्टेशन पर दस एमवीए के दो-दो ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को भी इन जरुरी उपकरणों सीटी या फ्यूज वायर सिस्टम से नहीं जोड़ा गया है। रोंड़ा 132 केवी सब स्टेशन से आने वाले 33 केवी लाइन को सीधे जोड़ा गया है।
वहीं ट्रांसफार्मर पर मेंटीनेंस का कार्य या फिर ओसीबी व वीसीबी मशीनों पर खराबी आने या फिर मेंटीनेंस का काम करने के लिए इन उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर से पूर्व टीपीएम सिस्टम लगाया गया है। ताकि टीपीएम के माध्यम से 33 केवी की बिजली सप्लाई ट्रांसफार्मर तक आने से रोक दी जाती है। यहां मेंटीनेंस कार्य होने के चलते टीपीएम उपकरण से विद्युत सप्लाई तो आसानी से काट दी जाती है, लेकिन सप्लाई जोड़ने के लिए विद्युत कर्मियों को लाठी का सहारा लेना पड़ता और कड़ी मशक्कत के बाद उक्त ट्रांसफार्मरों से सप्लाई सुचारु हो पाती है। यहां विद्युत कर्मियों को भी खुद की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जिसके चलते विद्युत कार्यों के दौरान हर समय करंट का खतरा बना रहता है। हालांकि विभाग द्वारा हर छह माह में विद्युत कर्मियों की सुरक्षा के लिए उपकरण मंगाने का प्रावधान तो है, लेकिन यह उपकरण कर्मियों को उपलब्ध कम ही कराए जाते हैं, जिससे उन्हें बिना सुरक्षा उपायों के ही कार्य करना होता है।
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सुरक्षा संसाधन की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिन सामानों की कमी है, उनके लिए मांग की गई है। गौरव कुमार अधिशासी अभियंता
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गल्ला मंडी स्थित 66 केवी व बाईपास स्थित 33 केवी विद्युत सब स्टेशन से शहर समेत सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों घरों को बिजली आपूर्ति प्रदान कर रोशन किया जाता है। विद्युत आपूर्ति के लिए गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन पर पांच एमवीए के तीन व आठ एमवीए का एक उच्च क्षमता का विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। जबकि बाईपास विद्युत सब स्टेशन पर दस एमवीए के दो ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। यहां ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय की गाइड लाइन के अनुसार करंट ट्रांसफार्मर यानी सीटी या एमसीवी या फिर फ्यूज वायर सिस्टम लगाया जाता है। ताकि हाइटेंशन लाइनों या फिर ओसीबी या बीसीबी मशीनों में फाल्ट आने पर सीधा ट्रांसफार्मर पर जर्क न आए और उक्त सीटी या फ्यूज वायर सिस्टम से विद्युत सप्लाई आगे जाने से रुक जाए। गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन पर पांच एमवीए के दो ट्रांसफार्मरों पर न तो उक्त सीटी उपकरण ही लगाया गया है और न ही फ्यूज वायर सिस्टम लगाया गया है। ऐसे में यदि हाइटेंशन लाइनों में कोई बड़ा फाल्ट होता है, तो इसका सीधा असर ट्रांसफार्मर पर पड़ेगा और ट्रांसफार्मर खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि कई बार यहां उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब भी हो चुके हैं। वहीं बाइपास विद्युत सब स्टेशन पर दस एमवीए के दो-दो ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को भी इन जरुरी उपकरणों सीटी या फ्यूज वायर सिस्टम से नहीं जोड़ा गया है। रोंड़ा 132 केवी सब स्टेशन से आने वाले 33 केवी लाइन को सीधे जोड़ा गया है।
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वहीं ट्रांसफार्मर पर मेंटीनेंस का कार्य या फिर ओसीबी व वीसीबी मशीनों पर खराबी आने या फिर मेंटीनेंस का काम करने के लिए इन उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर से पूर्व टीपीएम सिस्टम लगाया गया है। ताकि टीपीएम के माध्यम से 33 केवी की बिजली सप्लाई ट्रांसफार्मर तक आने से रोक दी जाती है। यहां मेंटीनेंस कार्य होने के चलते टीपीएम उपकरण से विद्युत सप्लाई तो आसानी से काट दी जाती है, लेकिन सप्लाई जोड़ने के लिए विद्युत कर्मियों को लाठी का सहारा लेना पड़ता और कड़ी मशक्कत के बाद उक्त ट्रांसफार्मरों से सप्लाई सुचारु हो पाती है। यहां विद्युत कर्मियों को भी खुद की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जिसके चलते विद्युत कार्यों के दौरान हर समय करंट का खतरा बना रहता है। हालांकि विभाग द्वारा हर छह माह में विद्युत कर्मियों की सुरक्षा के लिए उपकरण मंगाने का प्रावधान तो है, लेकिन यह उपकरण कर्मियों को उपलब्ध कम ही कराए जाते हैं, जिससे उन्हें बिना सुरक्षा उपायों के ही कार्य करना होता है।
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सुरक्षा संसाधन की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिन सामानों की कमी है, उनके लिए मांग की गई है। गौरव कुमार अधिशासी अभियंता