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प्रवासियों को घर पहुंचने की जल्दी, बस की छत पर बैठकर कर रहे यात्रा

Sat, 23 May 2020 01:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 01:57 AM IST
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prvasiyo ko ghr pohchne ki haldi, bs ki chat pr betkar kr rhe yatra
घर जाने की जल्दी में अमझरा गोशाला के पास बस की छतों पर बैठ गए प्रवासी मजदूर। - फोटो : LALITPUR
प्रवासियों को घर पहुंचने की जल्दी, बस की छत पर बैठकर कर रहे यात्रा
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डोंगराखुर्द/ललितपुर। जिले की सीमा अमझरा घाटी पर मध्यप्रदेश से प्रवासी मजदूरों का आने का सिलसिला जारी है। प्रशासन द्वारा इन मजदूरों को बसों के माध्यम से गृह जनपद भिजवाया जा रहा है। इसके बाद भी गोशाला में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। घर पहुंचने की जल्दी में प्रवासी बस के ऊपर छत पर बैठ रहे हैं। हालांकि, इन्हें नीचे उतारने में प्रशासन को भारी कवायद करनी पड़ रही है।
तपती धरती और आसमान से बरसती आग इन प्रवासी मजदूरों के लिए किसी चुनौती से कम साबित नहीं हो रही है। मजदूरों को बस के इंतजार में दिन भर धूप में खड़ा रहना पड़ रहा है। क्योंकि, अधिकांश बसों में मजदूरों की नंबरिंग होने के कारण दिन भर का समय गुजर जाता है और शाम होते - होते बसें रवाना हो पाती हैं। अब तक साठ बसों से प्रवासियों को भेजा जा चुका है।
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बसों के गोशाला में प्रवेश होते ही लोग खुश होकर बसों की ओर दौड लगा देते हैं, लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद उनका नंबर आ पा रहा है। पिछले एक सप्ताह से मजदूरों का रैला यूं ही बना हुआ है। यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में मजदूर पहुंच रहे हैं। रात हो या दिन, मजदूरों ने मन बना लिया कि अपने गांव जाना है। इसी चक्कर में दिन भर लोगों के आने की लाइन लगी रहती है। शुक्रवार की सुबह से शाम तक गोशाला में उतनी ही संख्या में मजदूर आ गए हैं, जितने गोशाला से भेजे जा रहे हैं। ऐसे में यह मजदूर प्रशासन के लिए चुनौती बन गए हैं। मजदूरों को गोशाला में केवह टिनशेड का सहारा है। लेकिन, टिनशेड में लोगों की भीड़ नहीं समा रही है, इस कारण उन्हें खुली धूप में ही दिन भर इंतजार करना पड़ रहा है। पेड़ों से भी पर्याप्त छाया नहीं मिल पा रही है। धूप और भीषण गर्मी में छोटे बच्चे परेशान रहते हैं। लोगों को थकान मिटाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इससे मजदूरों का बहुत बुरा हाल है। विभिन्न समाजसेवी संगठन आगे आकर श्रमिकों को भोजन करा रहे हैं।
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वर्जन
प्रवासियों की भीड़ रोज बढ़ रही है। 11 बसें यूपी के गृह जनपदों में गईं है और करीब 70 बसें बिहार व झारखंड के लोगों को लेकर जाएंगी। सभी प्रवासी मजदूरों पर ध्यान दिया जा रहा है। भोजन और पानी की व्यवस्था लगातार की जा रही है। - फूलसिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।
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