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प्रवासी मजदूरों को मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता
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ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर और राष्ट्रीय सेवा योजना के पूर्व वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सूबेदार यादव ने प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव समाज पर पड़ता है। वर्तमान समय में कोविड-19 से प्रभावित लोगों के अनुभवों को समझने और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति बनाने के इन कारणों पर ध्यान देना आवश्यक है।
कोरोना का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। काफी दिनों के लॉकडाउन के चलते लोगों में हताशा बनी हुई है। इतने दिनों बाद भी संक्रमण घटने का नाम नहीं ले रहा है। प्रवासी मजदूरों के रोजगार बंद होने से वह अपने गांवों की ओर पलायन करने लगे हैं। अनेक प्रवासी मजदूर पैदल चल पड़े हैं। तो अनेक साइकिलों व मोटरसाइकिलों से ही अपने घरों की पलायन कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना हो रही है। इसके चलते अनेक लोग मानसिक तनाव से ग्रसित होने लगे हैं। कोरोना बीमारी का सभी लोगों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। लोगों की प्रतिक्रिया मेडीकल ज्ञान पर आधारित न होकर हमारी सामाजिक समझ से संचालित हो रही है। इसलिए वह की सुनी बातों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। इससे अधिकतर लोग अवसाद से पीड़ित हो रहे हैं। कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर प्रभावित हुए हैं। रोजगार बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। गांव की ओर पलायन से उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति भी खराब हो रही है।
मजदूरों को सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाना आवश्यक है। मनोवैज्ञानिक रूप से इन प्रवासी मजदूरों में भय व बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
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कोरोना का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। काफी दिनों के लॉकडाउन के चलते लोगों में हताशा बनी हुई है। इतने दिनों बाद भी संक्रमण घटने का नाम नहीं ले रहा है। प्रवासी मजदूरों के रोजगार बंद होने से वह अपने गांवों की ओर पलायन करने लगे हैं। अनेक प्रवासी मजदूर पैदल चल पड़े हैं। तो अनेक साइकिलों व मोटरसाइकिलों से ही अपने घरों की पलायन कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना हो रही है। इसके चलते अनेक लोग मानसिक तनाव से ग्रसित होने लगे हैं। कोरोना बीमारी का सभी लोगों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। लोगों की प्रतिक्रिया मेडीकल ज्ञान पर आधारित न होकर हमारी सामाजिक समझ से संचालित हो रही है। इसलिए वह की सुनी बातों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। इससे अधिकतर लोग अवसाद से पीड़ित हो रहे हैं। कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर प्रभावित हुए हैं। रोजगार बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। गांव की ओर पलायन से उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति भी खराब हो रही है।
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मजदूरों को सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाना आवश्यक है। मनोवैज्ञानिक रूप से इन प्रवासी मजदूरों में भय व बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
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