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अतिप्राचीन प्राकृत भाषा को आठवीं अनुसूची में किया जाए शामिल
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ललितपुर। ज्ञान आराधना और शास्त्र संरक्षण का महापर्व श्रुत पंचमी पर कोविड 19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए जैन मंदिरों में मां जिनवाणी की विशेष पूजा-अर्चना, जिनवाणी विधान, अभिषेक शांतिधारा की गई। वहीं ऑनलाइन के माध्यम से अनेक आयोजन हुए। इस दौरान अति प्राचीन प्राकृत भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई।
अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के तत्वावधान में लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार का आयोजन डॉ. श्रेयांस कुमार जैन की अध्यक्षता में वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से किया गया। इसके तहत मुख्य क्रियाएं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ से परिषद के महामंत्री जयकुमार निशांत भैया (निर्देशक प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़) के संचालन में की गईं। संयोजक पंडित विनोद जैन रहे। सर्वप्रथम नवागढ़ में प्रात: बेला में अभिषेक, शांतिधारा की गई, जिनवाणी की विशेष पूजन की गई। श्रुत स्कंध यंत्र के समक्ष जिनवाणी के विशेष अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर नवागढ़ में खुलने जा रहे श्री गुरुकुलम में प्रवेश लेने वाले छात्रों का लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार के संस्कारोपण किए गए। ऑनलाइन के माध्यम से देशभर से जुड़े अन्य बच्चों को भी यह संस्कारोपण किए गए। इस दौरान श्रमण मुनि श्री विरंजन सागर महाराज ने ऑनलाइन आशीर्वाद प्रदान किया।
जय निशांत भैया ने बताया कि श्रुत पंचमी पर दिए गए लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार संस्कारोपण अनुष्ठान का विशेष महत्व है। प्रोफेसर वृषभ प्रसाद लखनऊ का विशेष व्याख्यान हुआ। प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के प्रचारमंत्री एवं डॉ. सुनील संचय ने बताया कि श्रुत पंचमी जैन धर्म का प्रमुख पर्व है। प्रभावना जनकल्याण परिषद की वेबिनार में अनेक वक्ताओं ने श्रुत पंचमी के महत्व को बताया। प्राचीन भाषा प्राकृत भाषा के उन्नयन के बारे में प्रकाश डाला व भारत सरकार से प्राकृत भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। इस दौरान सनत जैन, वीरचन्द्र नेकौरा, अशोक मैनवार, मनीष, संजय, राजकुमार मौजूद रहे।
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अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के तत्वावधान में लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार का आयोजन डॉ. श्रेयांस कुमार जैन की अध्यक्षता में वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से किया गया। इसके तहत मुख्य क्रियाएं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ से परिषद के महामंत्री जयकुमार निशांत भैया (निर्देशक प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़) के संचालन में की गईं। संयोजक पंडित विनोद जैन रहे। सर्वप्रथम नवागढ़ में प्रात: बेला में अभिषेक, शांतिधारा की गई, जिनवाणी की विशेष पूजन की गई। श्रुत स्कंध यंत्र के समक्ष जिनवाणी के विशेष अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर नवागढ़ में खुलने जा रहे श्री गुरुकुलम में प्रवेश लेने वाले छात्रों का लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार के संस्कारोपण किए गए। ऑनलाइन के माध्यम से देशभर से जुड़े अन्य बच्चों को भी यह संस्कारोपण किए गए। इस दौरान श्रमण मुनि श्री विरंजन सागर महाराज ने ऑनलाइन आशीर्वाद प्रदान किया।
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जय निशांत भैया ने बताया कि श्रुत पंचमी पर दिए गए लिपिसंख्यान विद्यावर्धन संस्कार संस्कारोपण अनुष्ठान का विशेष महत्व है। प्रोफेसर वृषभ प्रसाद लखनऊ का विशेष व्याख्यान हुआ। प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के प्रचारमंत्री एवं डॉ. सुनील संचय ने बताया कि श्रुत पंचमी जैन धर्म का प्रमुख पर्व है। प्रभावना जनकल्याण परिषद की वेबिनार में अनेक वक्ताओं ने श्रुत पंचमी के महत्व को बताया। प्राचीन भाषा प्राकृत भाषा के उन्नयन के बारे में प्रकाश डाला व भारत सरकार से प्राकृत भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। इस दौरान सनत जैन, वीरचन्द्र नेकौरा, अशोक मैनवार, मनीष, संजय, राजकुमार मौजूद रहे।
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