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कर्मचारी कम, एक होंगे दो सब स्टेशन
lalitpur
Updated Thu, 06 Apr 2017 01:10 AM IST
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कर्मचारियों की कमी के चलते दो सब स्टेशनों पर अब एक ही कर्मचारी से ऑपरेटिंग का काम लिया जाएगा। बिजली विभाग द्वारा इस बार गल्ला मंडी स्थित 33 केवी विद्युत सब स्टेशन पर तैनाती के लिए चार एसएसओ की मांग नहीं की है। विभाग ने दोनों सब स्टेशनों को एक करने का भी निर्णय लिया है।
गल्ला मंडी के पास 66 व 33 केवी क्षमता के दो विद्युत सब स्टेशन संचालित हो रहे हैं। 66 केवी विद्युत सब स्टेशन में फीडर संख्या एक, तीन, राजघाट, देवगढ़, चंदेरा, पिसनारी, गोविंदनगर फीडर स्थापित हैं, तो 33 केवी सब स्टेशन में फीडर नंबर चार, पांच और नेहरूनगर फीडर की मशीनों को लगाया गया है। 66 केवी सब स्टेशन व 33 केवी सब स्टेशन के मध्य एक कमरे का अंतर है। पूर्व में दोनों सब स्टेशन के बीच में एक गैलरी होने के चलते एक ही कर्मचारी तैनात किए जाते थे। लेकिन बाद में मशीनों व फीडरों की संख्या बढ़ने के कारण दोनों सब स्टेशन के बीच की गैलरी बंद हो गई, जिससे यहां तैनात एसएसओ को ऑपरेट करने में परेशानी होने लगी। अधिकारियों ने दोनों सब स्टेशनों पर अलग-अलग 4-4 ऑपरेटरों की तैनाती कर दी । अब दो वर्ष बाद विभाग द्वारा 33 केवी सब स्टेशन से चार ऑपरेटरों का टेंडर खत्म होने पर कार्य मुक्त कर दिया गया है। विभाग ने चार कर्मचारियों की तैनाती के लिए इस बार टेंडर नहीं किया है।
ऐसे में एक अप्रैल से दोनों सब स्टेशनों का प्रभार यानी दस फीडरों का संचालन एक ही एसएसओ के माध्यम से कराया जा रहा है। दोनों सब स्टेशनों के मध्य एक कमरा होने और गैलरी बंद होने की वजह से एसएसओ को मशीनों के संचालन के लिए एक हॉल से बाहर निकलकर दूसरे कमरे में करीब 30 फुट से दूसरे सब स्टेशन में जाना होता है। यदि हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट पर कोई मशीन में ट्रिपिंग होती है या अन्य कोई समस्या आती है, तो एसएसओ को विद्युत संचालन में बाधा उत्पन्न होगी। उक्त मामले को संज्ञान में लेते हुए विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार ने दोनों सब स्टेशनों के मध्य बने कमरे की दीवार को तुड़वाने का निर्णय लिया है।
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66 को 33 केवी में बदलने की है योजना
ललितपुर। गल्ला मंडी 66 केवी सब स्टेशन के यार्ड में पांच एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर स्थापित हैं। रौंड़ा हाइडिल से 66 केवी विद्युत लाइन से आने वाली बिजली को उक्त ट्रांसफार्मरों के माध्यम से 11 हजार केवी क्षमता में बदलकर वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीन के माध्यम से शहरी क्षेत्र को उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन अब उक्त तकनीक के ट्रांसफार्मर कंपनियों द्वारा बंद कर दिए गए हैं, जिसके चलते विभाग द्वारा उक्त 66 केवी विद्युत क्षमता के ट्रांसफार्मरों को हटाकर 33 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर को लगाने की योजना है, जिससे 66 केवी अब पूरा 33 केवी में कंवर्ट हो जाएगा। विद्युत विभाग द्वारा 66 केवी सब स्टेशन को 33 केवी क्षमता में परिवर्तित करने की योजना भी है।
कर्मचारियों की कमी के कारण दोनों सब स्टेशनों पर एक ही कर्मचारी तैनात रहेगा। शटडाउन लेने या मशीन आपरेटिंग में एक कर्मचारी को कोई समस्या न हो इसके लिए दोनों सबस्टेशनों के बीच की दीवार को तोड़कर एक कर दिया जाएगा।
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत
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गल्ला मंडी के पास 66 व 33 केवी क्षमता के दो विद्युत सब स्टेशन संचालित हो रहे हैं। 66 केवी विद्युत सब स्टेशन में फीडर संख्या एक, तीन, राजघाट, देवगढ़, चंदेरा, पिसनारी, गोविंदनगर फीडर स्थापित हैं, तो 33 केवी सब स्टेशन में फीडर नंबर चार, पांच और नेहरूनगर फीडर की मशीनों को लगाया गया है। 66 केवी सब स्टेशन व 33 केवी सब स्टेशन के मध्य एक कमरे का अंतर है। पूर्व में दोनों सब स्टेशन के बीच में एक गैलरी होने के चलते एक ही कर्मचारी तैनात किए जाते थे। लेकिन बाद में मशीनों व फीडरों की संख्या बढ़ने के कारण दोनों सब स्टेशन के बीच की गैलरी बंद हो गई, जिससे यहां तैनात एसएसओ को ऑपरेट करने में परेशानी होने लगी। अधिकारियों ने दोनों सब स्टेशनों पर अलग-अलग 4-4 ऑपरेटरों की तैनाती कर दी । अब दो वर्ष बाद विभाग द्वारा 33 केवी सब स्टेशन से चार ऑपरेटरों का टेंडर खत्म होने पर कार्य मुक्त कर दिया गया है। विभाग ने चार कर्मचारियों की तैनाती के लिए इस बार टेंडर नहीं किया है।
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ऐसे में एक अप्रैल से दोनों सब स्टेशनों का प्रभार यानी दस फीडरों का संचालन एक ही एसएसओ के माध्यम से कराया जा रहा है। दोनों सब स्टेशनों के मध्य एक कमरा होने और गैलरी बंद होने की वजह से एसएसओ को मशीनों के संचालन के लिए एक हॉल से बाहर निकलकर दूसरे कमरे में करीब 30 फुट से दूसरे सब स्टेशन में जाना होता है। यदि हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट पर कोई मशीन में ट्रिपिंग होती है या अन्य कोई समस्या आती है, तो एसएसओ को विद्युत संचालन में बाधा उत्पन्न होगी। उक्त मामले को संज्ञान में लेते हुए विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार ने दोनों सब स्टेशनों के मध्य बने कमरे की दीवार को तुड़वाने का निर्णय लिया है।
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66 को 33 केवी में बदलने की है योजना
ललितपुर। गल्ला मंडी 66 केवी सब स्टेशन के यार्ड में पांच एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर स्थापित हैं। रौंड़ा हाइडिल से 66 केवी विद्युत लाइन से आने वाली बिजली को उक्त ट्रांसफार्मरों के माध्यम से 11 हजार केवी क्षमता में बदलकर वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीन के माध्यम से शहरी क्षेत्र को उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन अब उक्त तकनीक के ट्रांसफार्मर कंपनियों द्वारा बंद कर दिए गए हैं, जिसके चलते विभाग द्वारा उक्त 66 केवी विद्युत क्षमता के ट्रांसफार्मरों को हटाकर 33 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर को लगाने की योजना है, जिससे 66 केवी अब पूरा 33 केवी में कंवर्ट हो जाएगा। विद्युत विभाग द्वारा 66 केवी सब स्टेशन को 33 केवी क्षमता में परिवर्तित करने की योजना भी है।
कर्मचारियों की कमी के कारण दोनों सब स्टेशनों पर एक ही कर्मचारी तैनात रहेगा। शटडाउन लेने या मशीन आपरेटिंग में एक कर्मचारी को कोई समस्या न हो इसके लिए दोनों सबस्टेशनों के बीच की दीवार को तोड़कर एक कर दिया जाएगा।
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत