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पोर्टल पर फीडिंग बनी गुरूजी का सिरदर्द

Tue, 20 Jul 2021 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 01:15 AM IST
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portal imformation feeding
education.jpeg - फोटो : education.jpeg
ललितपुर। बेसिक शिक्षा परिषद की सूचनाओं के आदान-प्रदान में तकनीक का प्रयोग शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। शिक्षकों ने अब इसका विरोध शुरू कर दिया है। इस संबंध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के सचिव ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन डाक के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। इसमें कहा गया कि सूचनाओं के आदान-प्रदान में तकनीकी जबरन उन पर थोपी जा रही है।
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सचिव हेमंत तिवारी ने ज्ञापन में बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इससे शिक्षक परेशान हैं। वर्तमान में सूचनाएं प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा जा रहा है। वास्तविकता यह है कि परिषदीय विद्यालय जिन परिवेश में स्थित हैं, वहां न तो कोई उचित नेटवर्क है और न ही सरकार की ओर से कोई डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। केवल 10 से 20 फीसदी अध्यापकों के पास एंड्रॉयड फोन हैं लेकिन कई लोगों की फोन की मेमोरी इतनी कम है कि जिन पर इस तरह के कार्य किए जाना संभव नहीं है।
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विद्यालयों में नेटवर्क नहीं आना एक बड़ी समस्या है। यदि कुछ अध्यापक अपना अतिरिक्त समय देकर भी इन सूचनाओं को अपलोड करते हैं तो भी कई प्रकार की व्यवहारिक समस्याएं आती हैं। जैसे बच्चों की डिजिटल क्लास लेने में समस्या, व्यक्तिगत फोन से अन्य पारिवारिक कार्य समय से कार्य पूर्ण करने में समस्या। कुछ अधिकारी अपनी तकनीकी विशेषज्ञता सिद्ध करने के लिए पूरे शिक्षक समाज को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। सूचनाओं के आदान-प्रदान में तकनीकी का उपयोग संसाधनों से लैस कार्यालयों में ही संभव है।
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बिजली की है समस्या, टावर के सिग्नल नहीं आते
परिषद का कहना है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली व नेटवर्क की उपलब्धता आज भी एक समस्या है, वहां यह प्रक्रिया व्यवहारिक रूप में संभव नहीं है। जनपद के 20 प्रतिशत से अधिक परिषदीय विद्यालयों में किसी भी टावर के सिग्नल नहीं आते हैं। कई लोगों को छत पर चढ़ना पड़ता है, तब जाकर मध्य प्रदेश के सिग्नल प्राप्त हो पाते हैं। ऐसी परिस्थिति में समय अंतर्गत सूचना डिजिटल रूप में प्रेषित करना एक अत्यंत दुष्कर कार्य प्रतीत हो रहा है। उन्होंने सूचनाओं के आदान-प्रदान में पूर्व की व्यवस्था ही लागू करने की मांग की।
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