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बिना मिट्टी जांचे करा दिया पौधरोपण

Sun, 30 Aug 2015 12:07 AM IST
ललितपुर ब्यूरो
ललितपुर ब्यूरो Updated Sun, 30 Aug 2015 12:07 AM IST
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ललितपुर। वन विभाग के अफसरों ने हरित पट्टी में मिट्टी की जांच कराए बिना ही पौधरोपण करा दिया है, जिससे रोपित पौधों के विकास को लेकर अटकलें लगने लगी हैं। हालांकि, विभागीय अफसर पौधों के विकास में किसी प्रकार की बाधा होने से इनकार कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश को हरा भरा बनाने के उद्देश्य से ललितपुर जिले में एक हजार एकड़ भूमि को ग्रीनलैंड में तब्दील करने का लक्ष्य रखा था। इसमें विभागीय अफसर खरे उतरते दिखाई नहीं दे रहे हैं। हरित पट्टी की कार्ययोजना को आननफानन में तैयार करने से अनेक समस्याएं आ रही हैं। इसमें अतिक्रमित भूमि चिह्नित कर लेने से तय लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। गौना वन रेंज की ग्राम रिछा महोली बीट पहले से ही हटा दी गई। अब ललितपुर रेंज की ग्राम फौजपुरा बीट पर भी पौधरोपण का संकट उत्पन्न हो गया है।
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 विभागीय अफसर इस समस्या का समाधान नहीं खोज पा रहे हैं। वहीं, ग्राम दूधई बीट में मिट्टी की अनदेखी करते हुए चक्रेशिया, कदम, कंजी, कचनार, अर्जुन आदि प्रजाति के पौधे रोपित कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि क्षारीय भूमि में पौधा ज्यादा पानी अवशोषित करता है। वहीं, पथरीली भूमि पर कम पानी अवशोषित होता है। विभाग द्वारा जो पौध रोपित किए जा रहे हैं, उन्हें ज्यादा पानी की आवश्यकता है। इसका ध्यान नहीं रखने से पौधे के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है। विभागीय अफसर इस समस्या से जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
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अग्रिम मृदा कार्य में हुई रस्म अदायगी
पौधे के तेजी से विकास के लिए मई व जून माह में सबसे पहले गड्ढे तैयार किए जाते हैं, जिससे कि गड्ढे जुलाई व अगस्त माह में पौधरोपण के लिए तैयार हो जाए। लेकिन, विभागीय लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जुलाई व अगस्त माह में गड्ढे कराए गए। ऐसे में अग्रिम मृदा कार्य रस्म अदायगी साबित हुआ।




अफसरों की कार्यशैली पर उठी अंगुलियां
हरित पट्टी का लक्ष्य पूरा नहीं होने से अफसरों की कार्यशैली पर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं, जिसमें अतिक्रमित भूमि को कार्ययोजना में शामिल करना और मिट्टी की जांच नहीं कराना आदि शामिल है।



अतिक्रमित क्षेत्र फौजपुरा में पौधरोपण कराया जाएगा, जहां तक मिट्टी की जांच की बात है तो वहां की जलवायु को ध्यान में रखकर पौधरोपण कराया जा रहा है।
- वी के जैन, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग
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