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अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी हरित पट्टी
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 27 Jul 2015 01:01 AM IST
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ललितपुर। वन विभाग के अफसरों के लिए एक हजार एकड़ की भूमि में हरित पट्टी
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विकसित करना आसान काम नहीं रहा है। जिन क्षेत्रों को हरित पट्टी के लिए
चुना गया है, उनमें से अधिकांश क्षेत्र पर अतिक्रमण पसरा है। गत माह सहरिया
आदिवासियों से हुए विवाद के बाद वन अफसरों को महोली क्षेत्र से अपने कदम
पीछे खींचने पड़े थे। अब महोली के स्थान पर दांवर वन बीट में पौधरोपण कराया
जा रहा है।
जिले में 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जंगली क्षेत्र है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वन्य क्षेत्र को और भी हरा-भरा चाहते हैं। इसके मद्देनजर वन विभाग को 18.80 लाख पौधरोपण का लक्ष्य प्रदान किया गया है। इसके अलावा अन्य सरकारी विभागों को दो लाख 58 हजार पौधे रोपने हैं। वन विभाग ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार हरित पट्टी के लिए विभिन्न रेंजों की एक हजार एकड़ की भूमि का चयन किया, जिसमें ललितपुर, बार और गौना वन रेंज की भूमि ली गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा क्षेत्र विवादित है। इनमें ग्राम फौजपुरा, दूधई, महोली सहित चौतराघाट, बालाबेहट में अतिक्रमण है। गत माह वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था, जिसमें सहरिया आदिवासियों द्वारा वन कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। इसके बाद विभागीय अफसर अपने पैर वापस खींचने के लिए मजबूर हो गए हैं। अब स्थिति यह है कि वन बीट महोली की जगह दांवर बीट को पौधरोपण के चुना गया है। वहीं, कई अन्य विवादित क्षेत्रों में विभागीय कर्मी अतिक्रमण हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जिससे पौधरोपण को प्रगति नहीं मिल पा रही है। हालांकि, विभागीय अफसर कमियों को छिपाने के लिए कागजी कार्रवाई करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
बाक्स
अन्य विभागों को मिला पौधरोपण का लक्ष्य
ग्राम्य विकास को एक लाख 96 हजार, विद्युत विभाग को एक हजार, सिंचाई विभाग को 16 हजार, पीडब्ल्यूडी को 10 हजार, भूमि संरक्षण विभाग को 21 हजार, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग को 7 हजार और अन्य विभागों को 6 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य आवंटित किया गया है। लेकिन, पर्याप्त बारिश होने के बाद भी पौधरोपण की रफ्तार सुस्त बनी हुई है।
बेदखली की कार्रवाई भी सुस्त
वन विभाग न तो पौधरोपण और न ही अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने की कार्रवाई में गति ला सका है। वन संरक्षक झांसी मंडल झांसी देवेंद्र कुमार ने जनपद भ्रमण पर अतिक्रमणकारियों को 61 बी के नोटिस देने की बात कही थी। इसमें अवैध कब्जाधारकों को वन भूमि को खाली करने का अल्टीमेटम दिया जाता है, लेकिन इसमें भी तेजी नहीं आ सकी है।
जिले में 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जंगली क्षेत्र है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वन्य क्षेत्र को और भी हरा-भरा चाहते हैं। इसके मद्देनजर वन विभाग को 18.80 लाख पौधरोपण का लक्ष्य प्रदान किया गया है। इसके अलावा अन्य सरकारी विभागों को दो लाख 58 हजार पौधे रोपने हैं। वन विभाग ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार हरित पट्टी के लिए विभिन्न रेंजों की एक हजार एकड़ की भूमि का चयन किया, जिसमें ललितपुर, बार और गौना वन रेंज की भूमि ली गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा क्षेत्र विवादित है। इनमें ग्राम फौजपुरा, दूधई, महोली सहित चौतराघाट, बालाबेहट में अतिक्रमण है। गत माह वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था, जिसमें सहरिया आदिवासियों द्वारा वन कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। इसके बाद विभागीय अफसर अपने पैर वापस खींचने के लिए मजबूर हो गए हैं। अब स्थिति यह है कि वन बीट महोली की जगह दांवर बीट को पौधरोपण के चुना गया है। वहीं, कई अन्य विवादित क्षेत्रों में विभागीय कर्मी अतिक्रमण हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जिससे पौधरोपण को प्रगति नहीं मिल पा रही है। हालांकि, विभागीय अफसर कमियों को छिपाने के लिए कागजी कार्रवाई करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
बाक्स
अन्य विभागों को मिला पौधरोपण का लक्ष्य
ग्राम्य विकास को एक लाख 96 हजार, विद्युत विभाग को एक हजार, सिंचाई विभाग को 16 हजार, पीडब्ल्यूडी को 10 हजार, भूमि संरक्षण विभाग को 21 हजार, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग को 7 हजार और अन्य विभागों को 6 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य आवंटित किया गया है। लेकिन, पर्याप्त बारिश होने के बाद भी पौधरोपण की रफ्तार सुस्त बनी हुई है।
बेदखली की कार्रवाई भी सुस्त
वन विभाग न तो पौधरोपण और न ही अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने की कार्रवाई में गति ला सका है। वन संरक्षक झांसी मंडल झांसी देवेंद्र कुमार ने जनपद भ्रमण पर अतिक्रमणकारियों को 61 बी के नोटिस देने की बात कही थी। इसमें अवैध कब्जाधारकों को वन भूमि को खाली करने का अल्टीमेटम दिया जाता है, लेकिन इसमें भी तेजी नहीं आ सकी है।