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Lalitpur News: सुम्मेरा तालाब के घाटों पर दीपदान कर मनाई पितृ दीपावली
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- संतों ने की गंगा आरती, लोगों का उमड़ा हुजूम
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सोलह दिनों की पितरों की सेवा के बाद रविवार को अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन पर सुम्मेरा तालाब के घाटों पर दीपदान कर पितृ दीपावली मनाई गई।
सोलह दिन पहले पितृ आह्वान किया गया था और लोगों ने पूर्णिमा से अमावस्या तक इन सोलह तिथियों में पितृों की सेवा की। सुम्मेरा तालाब, अन्य जलाशयों आदि में पितृों को तर्पण किया। लोगों ने अपने पूर्वजों को यादकर उनकी तिथियां मनाईं और भोज का आयोजन भी किया। सोलह दिनों तक पितृों की सेवा के बाद अमावस्या के दिन रविवार को पितृ दीपावली भी मनाई गई। श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि दीपावली तीन प्रकार की होती है। इनमें पहली पितृ दीपावली होती है। दूसरी परिवार दीपावली होती है, जो कार्तिक मास पर होती है, जबकि तीसरी दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा पर होती है। पितृ दीपावली सोलह दिन में पितृों के लिए होती है, जो सोलह दिनों में पितृों के लिए किया और 16वें दिन अमावस्या तिथि पर मनाई गई। इस दिन लोगों ने दीपावली मनाई है, जिसमें पितृों के नाम सुम्मेरा तालाब के घाटों पर दीपदान किया गया। इसमें किसी भी जलाशयों के पास घाटों पर पितरों के नाम घी के पांच दीपक जलाकर आरती की जाती है। ऐसा ही नजारा सुम्मेरा तालाब के घाटों पर देखने को मिला। रविवार को सुम्मेरा तालाब पर जगदीश पाठक व बद्री प्रसाद पाठक के नेतृत्व और श्रीनृसिंह मंदिर के महंत गंगादास महाराज एवं तुवन मंदिर के महंत रामलखनदास महाराज के सानिध्य में पितृों को दीपदान किया गया और गंगा आरती का आयोजन किया गया। यहां मुख्य आरती संतों के द्वारा और वैदिक विद्वत परिषद के ब्राह्मणों द्वारा घाटों पर की गई। वहीं, इस आयोजन से पहले सुम्मेरा तालाब पर गजेंद्र मोक्ष का पाठ और विष्णु सहस्त्रनाम पाठ शत्रुघन शास्त्री बांसी वालों के द्वारा किया गया। आयोजन के चलते सुम्मेरा तालाब पर प्रसाद वितरण भी किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सोलह दिनों की पितरों की सेवा के बाद रविवार को अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन पर सुम्मेरा तालाब के घाटों पर दीपदान कर पितृ दीपावली मनाई गई।
सोलह दिन पहले पितृ आह्वान किया गया था और लोगों ने पूर्णिमा से अमावस्या तक इन सोलह तिथियों में पितृों की सेवा की। सुम्मेरा तालाब, अन्य जलाशयों आदि में पितृों को तर्पण किया। लोगों ने अपने पूर्वजों को यादकर उनकी तिथियां मनाईं और भोज का आयोजन भी किया। सोलह दिनों तक पितृों की सेवा के बाद अमावस्या के दिन रविवार को पितृ दीपावली भी मनाई गई। श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि दीपावली तीन प्रकार की होती है। इनमें पहली पितृ दीपावली होती है। दूसरी परिवार दीपावली होती है, जो कार्तिक मास पर होती है, जबकि तीसरी दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा पर होती है। पितृ दीपावली सोलह दिन में पितृों के लिए होती है, जो सोलह दिनों में पितृों के लिए किया और 16वें दिन अमावस्या तिथि पर मनाई गई। इस दिन लोगों ने दीपावली मनाई है, जिसमें पितृों के नाम सुम्मेरा तालाब के घाटों पर दीपदान किया गया। इसमें किसी भी जलाशयों के पास घाटों पर पितरों के नाम घी के पांच दीपक जलाकर आरती की जाती है। ऐसा ही नजारा सुम्मेरा तालाब के घाटों पर देखने को मिला। रविवार को सुम्मेरा तालाब पर जगदीश पाठक व बद्री प्रसाद पाठक के नेतृत्व और श्रीनृसिंह मंदिर के महंत गंगादास महाराज एवं तुवन मंदिर के महंत रामलखनदास महाराज के सानिध्य में पितृों को दीपदान किया गया और गंगा आरती का आयोजन किया गया। यहां मुख्य आरती संतों के द्वारा और वैदिक विद्वत परिषद के ब्राह्मणों द्वारा घाटों पर की गई। वहीं, इस आयोजन से पहले सुम्मेरा तालाब पर गजेंद्र मोक्ष का पाठ और विष्णु सहस्त्रनाम पाठ शत्रुघन शास्त्री बांसी वालों के द्वारा किया गया। आयोजन के चलते सुम्मेरा तालाब पर प्रसाद वितरण भी किया गया।