फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   phutakar vyapari chala rahe samanantar galla mandi

फुटकर व्यापारी चला रहे समानांतर गल्ला मंडी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2020 05:11 PM IST
विज्ञापन
phutakar vyapari chala rahe samanantar galla mandi
खुद भूखे पेट रहकर दूसरों का पेट भरने वाला अन्नदाता तरह- तरह से ठगी का शिकार हो रहा है। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में अनाज व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। क्षेत्र में तो किसान तौल और मोल दोनों में ही ठगी का शिकार हो रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि यहां व्यापारी जगह-जगह फड़ लगाकर फुटकर खरीद की आड़ में थोक खरीद कर रहे हैं। इस कारण किसान गल्ला मंडी तक पहुंच पा रहा है। किसान को एक तो अपनी उपज का प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य नहीं मिल पा रहा है, दूसरा व्यापारी जहां मनमाने भाव पर उसकी खरीद कर रहे हैं, वही तौल में भी किसान से अधिक अनाज ले रहे हैं। अनाज व्यापारी लॉकडाउन में किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। आलम यह है कि किसानों को गेहूं की कीमत 1925 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए थी, उसे मजबूरी में 1650 रुपये प्रति क्विंटल के दामों पर बेचना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ किसान ठगी का शिकार हो रहा है, बल्कि प्रतिदिन लाखों रुपये केे मंडी शुल्क की चपत भी लग रही है। खास बात यह है कि मंडी समिति से जुड़े अधिकारी यह सब जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं। किसान दबी जुबान यह कह रहे हैं कि बिना अधिकारी और व्यापारी की सांठगांठ के यह संभव नहीं है। सरकार लॉकडाउन के चलते किसानों को तरह- तरह की राहत देने और आमदनी को दुगनी करने के लिए माथापच्ची कर रही हो, लेकिन सरकार की इस सोच की अवैध रूप से अनाज खरीदने वाले हवा निकाल रहे हैं। किसान को अपनी उपज की जो कीमत मिलनी चाहिए, वह भी नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के व्यापारी फुटकर अनाज खरीद की आड़ में जगह- जगह फड़ लगाकर थोक में खरीद कर रहे हैं। व्यापारी किसान को मंडी तक पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं। किसान को बीच में ही रोक लेते हैं और उपज को औने- पौने भावों में खरीद लेते हैं। इतना ही नहीं मोल के साथ-साथ किसान को तौल में भी मारा जा रहा हैं। एक गांव के किसान ने बताया कि उसने एक फुटकर व्यापारी को अपनी उपज बेची। व्यापारी ने उसकी उपज का तौल 61 किलो किया। उसी 61 किलो के कट्टे को अन्य कांटे पर तौला गया तो वजन से दो किलो अधिक निकला। जबकि किसान को सिर्फ 60 किलोग्राम का ही भुगतान किया गया। यह किसान तो बानगी मात्र है। क्षेत्र के हजारों किसान इस तरह से ठगी का शिकार हो रहे हैं। एक किसान की मानें तो यह फुटकर व्यापारी इलेक्ट्रानिक कांटों में कलाकारी करके मंडी भाव से भी ऊंचे दामों पर अनाज की खरीद कर लेते हैं। ----------- एक साल को मिलता है फुटकर लाइसेंस फुटकर अनाज खरीद के लिए मंडी समिति व्यापारियों को एक वर्ष का लाइसेंस देती है, इसके तहत व्यापारी एक दिन में 30 क्विंटल अनाज की खरीद कर सकता है। इसके पीछे मंडी समिति का उद्देश्य यह रहता है कि लाइसेंसी व्यापारी अनाज की फुटकर खरीद करके उसे कृषि उत्पादन मंडी समिति में बेचे, लेकिन ऐसा नहीं होता हैं। फुटकर लाइसेंस की आड़ में अनाज कारोबारी थोक में अनाज खरीद रहे हैं। यह कारोबारी महरौनी मंडी में अनाज नहीं बेचते, बल्कि मध्य प्रदेश या अन्य जनपदों की मंडी में ले जाकर बेच देते हैं। ऐसा करके वह बिना गेट पास बनवाए मंडी शुल्क बचा लेते हैं। ऐसा करके मंडी के राजस्व को लाखों की चपत लगाई जा रही है। --------------- किसानों के साथ ठगी करने वाले व्यापारियों के ख्रिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही अभियान चलाकर तौल कांटों की जांच कराई जाएगी। जगह-जगह फड़ लगाना गलत है। व्यापारी को निर्धारित स्थान के लिए लाइसेंस दिया जाता है। जो व्यापारी ऐसा करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जल्द अभियान चलाया जाएगा। - जीके तिवारी मंडी सचिव, महरौनी
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed