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Lalitpur News: किडनी, लिवर के इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को मजबूर मरीज

Tue, 06 Aug 2024 03:49 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 03:49 AM IST
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Patients forced to go to another city for kidney and liver treatment
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में छह साल बाद भी असाध्य रोगियों का इलाज शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में किडनी, लिवर समेत गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहर जाना पड़ रहा है।
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शासन ने वर्ष 2018 में स्वास्थ्य विभाग के एनसीडी सेल कार्यक्रम के तहत असाध्य रोगियों को दर्द से निजात दिलाने के लिए पैलिएटिव वार्ड संचालित करने की सुविधा दी थी। इसमें बुजुर्गों, कैंसर, किडनी के गंभीर मरीजों को रखा जाना था। यहां पर मरीजों को संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं की सुविधा दी जानी थी। शुरुआत में तो वार्ड बनने की तैयारियां हुईं। वार्ड में बेड, दवा समेत उपकरण आ गए थे। इससे उम्मीद जगी थी कि अब वार्ड संचालित होगा।
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लेकिन छह वर्ष बाद भी वार्ड स्थापित नहीं हो सका है। हालत ये है कि वार्ड का नाम तक कहीं नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में असाध्य रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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वार्ड में ही मिलना थी मरीजों को सुविधाएं
पैलिएटिव वार्ड में मरीजों को 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं दी जानी थीं। साथ ही मरीज और तीमारदार को खाने की भी सुविधा की गई थी। 24 घंटे उपचार और देखभाल के लिए नर्सिंग स्टॉफ को नियुक्त किया जाना था। मनोचिकित्सक, योग विशेषज्ञ, डायटीशियन, आदि मरीजों की पीड़ा कम करने का कार्य करेंगी।

पैलिएटिव वार्ड स्थापित न होने की जानकारी हुई है। इस पर जानकारी कर व्यवस्थाएं कराई जाएंगी। - डॉ. इम्तियाज अहमद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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