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पर्यूषण पर्व तीन से, जैन दर्शन में दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार होते हैं

Sun, 01 Sep 2019 07:57 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2019 07:57 PM IST
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paryushan parv since third september
पर्यूषण पर्व तीन से, जैन दर्शन में दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार होते हैं
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ललितपुर। तीर्थ क्षेत्र नवागढ़ में मुनिश्री सरल सागर महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार होते हैं। क्षमावाणी भी तीन बार होती है। चार महीने में हमें क्षमा-याचना का सौभाग्य प्राप्त होता है। पर्व के दिनों में उपवास की परंपरा है, परंतु केवल भूखा रहना ही उपवास नहीं है, कषाय (विकारी भावों) का भी त्याग हो, तभी पर्व सार्थक होते हैं। केवल भूखा रहना लंघन मात्र है। उपवास के दिनों में सांसारिक कार्य नहीं करके शास्त्र स्वाध्याय में उपयोग करें।
तीन सितंबर से शुरू हो रहे पर्यूषण पर्व के संबंध में बताया कि पर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक क्रियाओं से आत्मशुद्धि की जाती है। मोक्षमार्ग को प्रशस्त करने का प्रयास किया जाता है, ताकि जनम-मरण के चक्र से मुक्ति पाई जा सके। जब तक अशुभ कर्मों का बंधन नहीं छूटेगा, तब तक आत्मा के सच्चे स्वरूप को हम नहीं पा सकते हैं। यह पर्व जीवन में नया परिवर्तन लाता है।
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मुनिश्री ने रविवारीय प्रवचन श्रृंखला में कहा कि मुनिचर्या में शिथिलता हो रही थी, तब मुनि देवेंद्र कीर्ति महाराज से दक्षिण के श्रद्धालु सातगोड़ा पाटिल ने मुनि दीक्षा ली। उन्होंने शास्त्र अनुसार चर्या करने का संकल्प किया। इस कारण आहार चर्या में व्यवधान हुआ। कई दिनों का उपवास हो गया, परंतु अपनी चर्या के साथ समझौता नहीं किया। शास्त्र के अनुसार चर्या का पालन करके मुनि परंपरा में होने वाली शिथिलता को दूर किया। ब्रह्मचारी जय निशांत भैया ने बताया कि देश भर का जैन समाज चारित्र चक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागर महाराज का मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष विविध आयोजनों के साथ मना रहा है। धर्मसभा का मंगलाचरण सुरेंद्र भगवा ने किया। इस दौरान डा. सुनील संचय, वीरेंद्र नैकोरा, कैलाश ककरवाहा आदि मौजूद रहे।
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