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हैजा की चपेट में आया ग्राम पारौल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:54 AM IST
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hospital, jhansi news
- फोटो : demo
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। विकासखंड मड़ावरा का ग्राम पारौल संक्रामक रोग हैजा की चपेट में आ गया है। दो दर्जन से अधिक ग्रामीण इस बीमारी से ग्रसित हैं, इनमें महिलाएं, बच्चे व पुरुष शामिल हैं। बीमारों को उपचार के लिए मड़ावरा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
गांव में रहने वाले गणेश पुत्र पूरन, राजाबेटी पुत्री गणेश, कुलुआ पत्नी मिलन, इमरत पुत्र खलकू, सिलगनवारी पत्नी बलराम, रोहित पुत्र नंदू समेत अनेकों लोग हैजा के चपेट में हैं। एक साथ इतने बड़ी मात्रा में बीमार हुए लोगों को देखकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, इससे आनन-फानन में डाक्टरों की टीम गांव में पहुंच गई।वरिष्ठ डाक्टर हरिओम शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर लोगों का उपचार किया और उनके आस-पास की सफाई व्यवस्था को परखा।
इस दौरान गांव के समस्त हैंडपंपों के पास व कुओं में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डा.गंगाराम, फार्मासिस्ट राजकुमार गुप्ता ,आरपी त्रिपाठी, मुन्नालाल झा, मुकेश आदि स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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वहीं ग्रामीणों ने बताया कि गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। नालियां चोक होने के कारण बरसात का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। हैंडपंप भी गंदगी की चपेट में हैं। सफाई कर्मचारी द्वारा कई हफ्ते सफाई नहीं की जाती है।
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गांव में रहने वाले गणेश पुत्र पूरन, राजाबेटी पुत्री गणेश, कुलुआ पत्नी मिलन, इमरत पुत्र खलकू, सिलगनवारी पत्नी बलराम, रोहित पुत्र नंदू समेत अनेकों लोग हैजा के चपेट में हैं। एक साथ इतने बड़ी मात्रा में बीमार हुए लोगों को देखकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, इससे आनन-फानन में डाक्टरों की टीम गांव में पहुंच गई।वरिष्ठ डाक्टर हरिओम शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर लोगों का उपचार किया और उनके आस-पास की सफाई व्यवस्था को परखा।
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इस दौरान गांव के समस्त हैंडपंपों के पास व कुओं में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डा.गंगाराम, फार्मासिस्ट राजकुमार गुप्ता ,आरपी त्रिपाठी, मुन्नालाल झा, मुकेश आदि स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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वहीं ग्रामीणों ने बताया कि गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। नालियां चोक होने के कारण बरसात का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। हैंडपंप भी गंदगी की चपेट में हैं। सफाई कर्मचारी द्वारा कई हफ्ते सफाई नहीं की जाती है।