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निजी अस्पतालें बंद होने से मरीजों को इलाज में हुई परेशानी
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ललितपुर। जिले में आम लोगों को इलाज की सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही हैं। जिला अस्पताल में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर शासन ने ओपीडी सेवा बंद कर दी। शुक्रवार को भीड़ के कारण निजी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब बंद होने से बीमारों की परेशानी बढ़ना तय है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए न तो बड़े अस्पताल हैं और न ही नर्सिंग होम है। ऐसे में जनपदवासियों के इलाज की इकलौती आस जिला अस्पताल माना जाता है। यहां पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों व शहर के लोग इलाज कराने लिए आते हैं। स्थिति यह है कि सामान्य दिनों में भी एक हजार से अधिक मरीज इलाज को आते हैं। लेकिन, इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों में ओपीडी व सामान्य जांचें बंद कर दी गई हैं। अब जिला अस्पताल में केवल इमरजेंसी सेवा ही मुहैया कराई जा रही है। ऐसे में आम लोगों को इलाज के लिए परेशानी हो रही है। सीमाएं सील होने से मरीज इलाज कराने के लिए अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं कर पा रहे हैं।
शुक्रवार को शहर में निजी अस्पताल व पैथोलॉजी भी बंद कर दी गईं। इससे आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज निजी अस्पतालों में इलाज की आस में चिकित्सकों को खोजते रहे। चिकित्सक नहीं मिलने पर परेशानी बढ़ गई। इक्का- दुक्का चिकित्सक मिले, जिन्होंने जांच के लिए लिखा। लेकिन, पैथोलॉजी बंद रहीं। इससे मर्ज की जांच नहीं हो पाई और न इलाज मिल सका। अस्पतालों के बंद होने से इलाज कराने का संकट रहा।
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फ्लू व फीवर क्लीनिक में सीमित इलाज
जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा आइसोलेशन वार्ड में फ्लू व फीवर क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इसमें केवल अधिक जुकाम, खांसी व तेजबुखार के मरीजों को इलाज की सुविधा की गई है। इससे सामान्य व अन्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। यहां पर तैनात गार्डों व स्टाफ द्वारा मर्ज की जानकारी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
निजी अस्पतालों में भीड़ अधिक हो रही थी। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना थी। इससे निजी अस्पतालों को बंद करा दिया गया है।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी
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जिले में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए न तो बड़े अस्पताल हैं और न ही नर्सिंग होम है। ऐसे में जनपदवासियों के इलाज की इकलौती आस जिला अस्पताल माना जाता है। यहां पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों व शहर के लोग इलाज कराने लिए आते हैं। स्थिति यह है कि सामान्य दिनों में भी एक हजार से अधिक मरीज इलाज को आते हैं। लेकिन, इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों में ओपीडी व सामान्य जांचें बंद कर दी गई हैं। अब जिला अस्पताल में केवल इमरजेंसी सेवा ही मुहैया कराई जा रही है। ऐसे में आम लोगों को इलाज के लिए परेशानी हो रही है। सीमाएं सील होने से मरीज इलाज कराने के लिए अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं कर पा रहे हैं।
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शुक्रवार को शहर में निजी अस्पताल व पैथोलॉजी भी बंद कर दी गईं। इससे आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज निजी अस्पतालों में इलाज की आस में चिकित्सकों को खोजते रहे। चिकित्सक नहीं मिलने पर परेशानी बढ़ गई। इक्का- दुक्का चिकित्सक मिले, जिन्होंने जांच के लिए लिखा। लेकिन, पैथोलॉजी बंद रहीं। इससे मर्ज की जांच नहीं हो पाई और न इलाज मिल सका। अस्पतालों के बंद होने से इलाज कराने का संकट रहा।
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फ्लू व फीवर क्लीनिक में सीमित इलाज
जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा आइसोलेशन वार्ड में फ्लू व फीवर क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इसमें केवल अधिक जुकाम, खांसी व तेजबुखार के मरीजों को इलाज की सुविधा की गई है। इससे सामान्य व अन्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। यहां पर तैनात गार्डों व स्टाफ द्वारा मर्ज की जानकारी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
निजी अस्पतालों में भीड़ अधिक हो रही थी। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना थी। इससे निजी अस्पतालों को बंद करा दिया गया है।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी