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बारिश ने ढ़ाया फसल पर कहर, किसानों को सता रही कर्ज चुकाने की चिंता
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- फोटो : kisan.jpg
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सिलावन/ललितपुर। खरीफ की फसल खेतों में लगभग पककर कटने के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन बीते दिनों हुई लगातार बारिश से नष्ट हो गई है। अब किसान एक बार फिर से बर्बादी की कगार पर आ गया है। किसानों को कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
किसान इन फसलों में 80 फीसदी से अधिक का नुकसान बता रहे हैं। किसानों को अगली रबी की फसल की बुवाई और कर्ज चुकाने की चिंता सता रही हैं। किसानों ने नष्ट फसलों का सर्वे करने के लिए अधिकारियों से सुबे के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा रहे हैं। बीते दिनों से हो रही बारिश ने महरौनी तहसील के ग्राम किसरदा, छपरट, समोगर, कुरौरा, सिलावन, जरया, चौकी गगनियां, दिगवार, गुंदरापुर, सिंदवाहा, सुकाड़ी, बजर्रा आदि जगह फसलों को नुकसान पहुंचाया। यहां पर लगभग पक कर तैयार खड़ी उड़द, मूंग और तिल की फसल की कटाई के लिए किसान तैयार थे, लेकिन बीते तीन दिन में लगातार हुई बारिश से पौधों में लगी फलियां सड़कर नष्ट हो गईं।
किसानों का कहना हैं कि बारिश से खेतों में पानी जमा हो गया। इससे पौधे व फलियां सड़कर नष्ट हो गईं है। किसानों के अनुसार उड़द और मूंग की फसल तो 80 फीसदी से अधिक का नुकसान हो गया है। एक बार फिर फसल नष्ट होने से किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। वहीं कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। इतना ही नहीं इससे रबी की फसल की बुवाई भी प्रभावित होने की बात किसान कह रहें हैं। किसान बताते हैं कि जैसे-तैसे बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर अत्यधिक लागत लगाकर खरीफ की फसल की बुवाई की थी, लेकिन सब नष्ट हो गई है। नष्ट हुई फसल का मुआयना कराकर बीमा की राशि दिलाया जाए।
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पांच एकड़ में महंगे बीज खरीद कर उड़द व मूंग की बुवाई की थी, जिसमें कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया, लेकिन बारिश से फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इससे कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। लच्छू, किसान, गुंदरापुर
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खेती किसानी से इतने टूट चुके हैं, अब आगामी रबी की फसल की बुवाई करने का सामर्थ्य नहीं रहा है। पहले ही बैंकों का कर्ज था, अब खरीफ फसल साहूकारों से कर्ज लेकर बोई थी, जो पूरी तरह से नष्ट हो गई है। देवेंद्र कुमार
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लगातार हुई बारिश से उड़द, मूंग और तिल की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इससे आर्थिक रूप से अधिक नुकसान हो गया है। कर्ज को बोझ बढ़ गया। आगे की फसल भी करने की चिंता सता रही है। ग्यासी, किसान, छपरट
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खरीफ की फसल की बुवाई की, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया। जिससे कि अच्छी फसल हो सके, लेकिन बारिश से खरीफ की फसल नष्ट हो गई। अब अगली रबी की फसल को लागत जुटाना मुश्किल हो रहा है। कालीचरन चौबे
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किसान इन फसलों में 80 फीसदी से अधिक का नुकसान बता रहे हैं। किसानों को अगली रबी की फसल की बुवाई और कर्ज चुकाने की चिंता सता रही हैं। किसानों ने नष्ट फसलों का सर्वे करने के लिए अधिकारियों से सुबे के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा रहे हैं। बीते दिनों से हो रही बारिश ने महरौनी तहसील के ग्राम किसरदा, छपरट, समोगर, कुरौरा, सिलावन, जरया, चौकी गगनियां, दिगवार, गुंदरापुर, सिंदवाहा, सुकाड़ी, बजर्रा आदि जगह फसलों को नुकसान पहुंचाया। यहां पर लगभग पक कर तैयार खड़ी उड़द, मूंग और तिल की फसल की कटाई के लिए किसान तैयार थे, लेकिन बीते तीन दिन में लगातार हुई बारिश से पौधों में लगी फलियां सड़कर नष्ट हो गईं।
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किसानों का कहना हैं कि बारिश से खेतों में पानी जमा हो गया। इससे पौधे व फलियां सड़कर नष्ट हो गईं है। किसानों के अनुसार उड़द और मूंग की फसल तो 80 फीसदी से अधिक का नुकसान हो गया है। एक बार फिर फसल नष्ट होने से किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। वहीं कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। इतना ही नहीं इससे रबी की फसल की बुवाई भी प्रभावित होने की बात किसान कह रहें हैं। किसान बताते हैं कि जैसे-तैसे बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर अत्यधिक लागत लगाकर खरीफ की फसल की बुवाई की थी, लेकिन सब नष्ट हो गई है। नष्ट हुई फसल का मुआयना कराकर बीमा की राशि दिलाया जाए।
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पांच एकड़ में महंगे बीज खरीद कर उड़द व मूंग की बुवाई की थी, जिसमें कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया, लेकिन बारिश से फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इससे कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। लच्छू, किसान, गुंदरापुर
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खेती किसानी से इतने टूट चुके हैं, अब आगामी रबी की फसल की बुवाई करने का सामर्थ्य नहीं रहा है। पहले ही बैंकों का कर्ज था, अब खरीफ फसल साहूकारों से कर्ज लेकर बोई थी, जो पूरी तरह से नष्ट हो गई है। देवेंद्र कुमार
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लगातार हुई बारिश से उड़द, मूंग और तिल की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इससे आर्थिक रूप से अधिक नुकसान हो गया है। कर्ज को बोझ बढ़ गया। आगे की फसल भी करने की चिंता सता रही है। ग्यासी, किसान, छपरट
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खरीफ की फसल की बुवाई की, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया। जिससे कि अच्छी फसल हो सके, लेकिन बारिश से खरीफ की फसल नष्ट हो गई। अब अगली रबी की फसल को लागत जुटाना मुश्किल हो रहा है। कालीचरन चौबे