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बेमौसम बारिश बनी किसानों के लिए आफत
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कैप्सन- खेत में हैरो चला कर फसल की जुताई करता ट्रैक्टर
- फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। चार दिन से रुक रुक कर हो रही बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। किसान इससे काफी परेशान हैं। कई किसानों ने फसल काटे बगैर ही खेतों की जुताई शुरू कर दी है।
महंगाई के साथ कुदरत भी किसानों का साथ नहीं दे रही है। फसल की बुवाई के समय जब किसानों का पानी की आवश्यकता थी तब मानसून आया नहीं जिससे काफी कम किसान अपने खेतों में फसल बो सके। लगभग तीन सप्ताह विलंब से आए मानसून ने जब एक अगस्त को जनपद में दस्तक दी तो चार दिन तक हुई बारिश ने सब जगह पानी पानी कर दिया। बारिश ने फिर रुकने का नाम नहीं लिया जिससे किसान दो सप्ताह तक खेतों में नमी एवं जल भराव होने के कारण फसल नहीं बो सका। बारिश से जिन किसानों ने पहले फसल बोई थी वह भी बर्बाद हो गई। जिन किसानों के खेतों में कुछ फसल रह गई थी उन्हें कुछ पैदावार की आस थी लेकिन चार दिन से क्षेत्र में हो रही बारिश ने उनके कुछ फसल पैदा होने के अरमान भी चकनाचूर हो गए।
पिछले चार पांच वर्षों से मौसम की मार से किसान कर बर्बाद हो गया है। फसल कटाई के समय पानी का गिरना ऐसे लगता है जैसे आफत बरस रही हो। सरमन रजक
जमीन न होने के कारण ठेके पर खेत लेकर खेती की थी। पहले समय पर बारिश नहीं हुई। अब लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने से फसल बर्बाद हो रही है। सुरेंद्र रायकवार
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पहले से ही साहूकार एवं बैंक का काफी कर्जा है। इस बार मौसम की बेरुखी से फिर पूरी फसल चौपट होने से सब कुछ बर्बाद हो गया है। कल्लू अहिरवार
खेतों में खड़ी फसल की होने लगी जुताई
तालबेहट। इस बार मौसम की बेरुखी के चलते क्षेत्र के अधिकांश किसानों की फसलें बर्बाद हो गई। इस समय उपज निकालना हानि का सौदा है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों ने फसल कटाई के स्थान पर खेतों में खड़ी फसल की हैरो से जुताई करनी शुरू कर दी है।
सिर मुड़ाते पड़े ओले
क्षेत्र में इस बार भी सिर मुड़ाते ओले पड़ने की कहावत चरितार्थ हो रही है। ग्राम सभा खांदी, तरगुवा, बम्होरीसर आदि गांवों के किसानों ने बताया कि दो दिन पहले रविवार को जब फसल की कटाई की तब सायंकाल बारिश हुई। सोमवार को रुक कर जब उन्होंने मंगलवार को कटाई दुबारा शुरू कराई तो फिर बारिश ने पूरे अरमान दफन कर दिए।
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महंगाई के साथ कुदरत भी किसानों का साथ नहीं दे रही है। फसल की बुवाई के समय जब किसानों का पानी की आवश्यकता थी तब मानसून आया नहीं जिससे काफी कम किसान अपने खेतों में फसल बो सके। लगभग तीन सप्ताह विलंब से आए मानसून ने जब एक अगस्त को जनपद में दस्तक दी तो चार दिन तक हुई बारिश ने सब जगह पानी पानी कर दिया। बारिश ने फिर रुकने का नाम नहीं लिया जिससे किसान दो सप्ताह तक खेतों में नमी एवं जल भराव होने के कारण फसल नहीं बो सका। बारिश से जिन किसानों ने पहले फसल बोई थी वह भी बर्बाद हो गई। जिन किसानों के खेतों में कुछ फसल रह गई थी उन्हें कुछ पैदावार की आस थी लेकिन चार दिन से क्षेत्र में हो रही बारिश ने उनके कुछ फसल पैदा होने के अरमान भी चकनाचूर हो गए।
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पिछले चार पांच वर्षों से मौसम की मार से किसान कर बर्बाद हो गया है। फसल कटाई के समय पानी का गिरना ऐसे लगता है जैसे आफत बरस रही हो। सरमन रजक
जमीन न होने के कारण ठेके पर खेत लेकर खेती की थी। पहले समय पर बारिश नहीं हुई। अब लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने से फसल बर्बाद हो रही है। सुरेंद्र रायकवार
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पहले से ही साहूकार एवं बैंक का काफी कर्जा है। इस बार मौसम की बेरुखी से फिर पूरी फसल चौपट होने से सब कुछ बर्बाद हो गया है। कल्लू अहिरवार
खेतों में खड़ी फसल की होने लगी जुताई
तालबेहट। इस बार मौसम की बेरुखी के चलते क्षेत्र के अधिकांश किसानों की फसलें बर्बाद हो गई। इस समय उपज निकालना हानि का सौदा है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों ने फसल कटाई के स्थान पर खेतों में खड़ी फसल की हैरो से जुताई करनी शुरू कर दी है।
सिर मुड़ाते पड़े ओले
क्षेत्र में इस बार भी सिर मुड़ाते ओले पड़ने की कहावत चरितार्थ हो रही है। ग्राम सभा खांदी, तरगुवा, बम्होरीसर आदि गांवों के किसानों ने बताया कि दो दिन पहले रविवार को जब फसल की कटाई की तब सायंकाल बारिश हुई। सोमवार को रुक कर जब उन्होंने मंगलवार को कटाई दुबारा शुरू कराई तो फिर बारिश ने पूरे अरमान दफन कर दिए।

कैप्सन- खेत में हैरो चला कर फसल की जुताई करता ट्रैक्टर- फोटो : TALDEHATE