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एक शिक्षिका की सेवा समाप्त, दूसरे को थमाया नोटिस

Sat, 12 Oct 2019 02:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Oct 2019 02:03 AM IST
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one teacher dimissed.
एक शिक्षिका की सेवा समाप्त, दूसरे को थमाया नोटिस
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ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की शिक्षक भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की परतें अब खुलने लगीं हैं। बीएसए ने जांच में ऐसा ही मामला उजागर होने पर एक शिक्षिका की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की है। वहीं, एक अन्य शिक्षिका को नोटिस थमा दिया गया है। डीएम ने जांच समिति की बैठक 15 अक्तूबर को शिविर कार्यालय में बुला ली है।

पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की विभिन्न भर्ती प्रक्रिया अपनाई गईं। इस दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई। कई अभ्यर्थी कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने में कामयाब हो गए। शासन इसकी हकीकत तक पहुंचने के लिए जांच करा रहा है। वर्ष 2018 अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में चयनित एक शिक्षिका अनुत्तीर्ण होने के बाद भी नौकरी कर रही थी। इसका खुलासा तब हुआ जब शासन द्वारा घोषित परीक्षाफल में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया। इसमें प्रदेश के 49 अभ्यर्थी अनुत्तीर्ण पाए गए। इनमें से एक अभ्यर्थी जिले में नौकरी कर रही है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर बीएसए की ओर से शिक्षिका को पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया लेकिन उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इस पर प्रभारी बीएसए आरके पुरोहित ने सचिव परीक्षा, नियमाक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश प्रयाग राज के पत्र के अनुपालन में कार्रवाई करते हुए ब्लाक जखौरा के प्राथमिक विद्यालय मिनौरा में तैनात सहायक अध्यापिका सरिता सैनी की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई कर दी। इस संबंध में प्रभारी बीएसए आरके पुरोहित ने बताया कि अध्यापक भर्ती परीक्षा 2018 में अनुत्तीर्ण होने के कारण यह कार्रवाई की गई है। उसके अनुत्तीर्ण की जानकारी पुनर्मूल्यांकन में निकलकर आई है। इससे पहले वह उत्तीर्ण थी, जिसके आधार पर उसे नौकरी मिल गई थी। उधर, उर्दू भर्ती की जांच में इसी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय मसौराकलां में कार्यरत शिक्षिका हबीबा बानो को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसमें कहा गया कि अपर जिलाधिकारी की जांच में लिखा गया है कि शिक्षिका का चयन पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में हुआ है जबकि स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि वह सामान्य जाति के हैं। इससे स्पष्ट है कि यह चयन गलत तथ्यों एवं कूट रचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर हुआ है। फर्जी नियुक्ति का मामला यही थमता नहीं दिख रहा है। मामले को तूल पकड़ता देख डीएम मानवेंद्र सिंह ने जांच समिति की बैठक पंद्रह अक्तूबर को शाम साढ़े आठ बजे शिविर कार्यालय बुलाई है। जांच समिति में अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक झांसी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी शामिल हैं।
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