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Lalitpur News: सेवाओं की ही सेहत नासाज, एक डॉक्टर कर रहा 22580 मरीजों का इलाज
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ललितपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं कागजों पर ही दुरुस्त हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल को कायाकल्प अवार्ड मिल चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में मरीजों की सेहत को दुरुस्त करने वाले डॉक्टर ही नहीं है। आलम यह है कि पूरे जिले में डॉक्टर के 134 पद हैं, जिनमें 72 खाली पड़े हैं। जबकि जिले की 14 लाख की आबादी की सेहत 62 डॉक्टर के हवाले है। कुल मिलाकर देखा जाए तो एक डॉक्टर पर 22580 लोगों की सेहत सुधारने का जिम्मा है। डॉक्टरों की कमी के चलते जिले की कई सीएचसी और पीएचसी रेफर सेंटर बनकर रह गई हैं।
शासन लगातार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा कर रहा है। अस्पतालों को आधुनिक बनाया जा रहा है। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे व फेको मशीन, डायलिसिस जैसी तमाम जांच व सुविधाएं दी जा रही हैं। निर्धनों के लिए आयुष्मान भारत योजना चल रही है।
लेकिन लोगों के लिए यह योजना और सुविधाएं दिखावा बनकर रह गई हैं। कारण है कि इन सुविधाओं को देने वाले चिकित्सक ही जिले में नहीं है। जिला अस्पताल में ही डॉक्टर के 19 पद रिक्त हैं। जबकि जिला महिला अस्पताल मेें महज तीन डॉक्टर हैं। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से हृदय रोग, लकवा, किडनी के विशेषज्ञ समेत रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिस्ट नहीं है। वहीं महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से सीजर प्रसव बंद हैं। न्यूरो सर्जन न होने से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में विशेषज्ञों के 25 पदों के सापेक्ष महज छह ही कार्यरत हैं। ऐसे में तमाम मरीज इलाज के अभाव में मायूस लौट रहे हैं।
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स्वास्थ्य इकाई - स्वीकृत पद कार्यरत रिक्तपद
जिला अस्पताल पुरुष - 38 - 19 - 19
जिला महिला अस्पताल- 15 - 03 - 12
सीएचसी-पीएचसी - 81 - 40 - 41
कुल - 134 - 62 - 72
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यह है स्वास्थ्य इकाईयों की स्थिति
14 लाख है जिले की कुल आबादी
02 जिला स्तर पर महिला और पुरुष अस्पताल
05 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं
24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं
198 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं
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जिले में चिकित्सकों की कमी है। चिकित्सकों के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलने पर स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा।
- डॉ. जेएस बक्शी, प्रभारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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शासन लगातार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा कर रहा है। अस्पतालों को आधुनिक बनाया जा रहा है। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे व फेको मशीन, डायलिसिस जैसी तमाम जांच व सुविधाएं दी जा रही हैं। निर्धनों के लिए आयुष्मान भारत योजना चल रही है।
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लेकिन लोगों के लिए यह योजना और सुविधाएं दिखावा बनकर रह गई हैं। कारण है कि इन सुविधाओं को देने वाले चिकित्सक ही जिले में नहीं है। जिला अस्पताल में ही डॉक्टर के 19 पद रिक्त हैं। जबकि जिला महिला अस्पताल मेें महज तीन डॉक्टर हैं। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से हृदय रोग, लकवा, किडनी के विशेषज्ञ समेत रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिस्ट नहीं है। वहीं महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से सीजर प्रसव बंद हैं। न्यूरो सर्जन न होने से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में विशेषज्ञों के 25 पदों के सापेक्ष महज छह ही कार्यरत हैं। ऐसे में तमाम मरीज इलाज के अभाव में मायूस लौट रहे हैं।
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स्वास्थ्य इकाई - स्वीकृत पद कार्यरत रिक्तपद
जिला अस्पताल पुरुष - 38 - 19 - 19
जिला महिला अस्पताल- 15 - 03 - 12
सीएचसी-पीएचसी - 81 - 40 - 41
कुल - 134 - 62 - 72
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यह है स्वास्थ्य इकाईयों की स्थिति
14 लाख है जिले की कुल आबादी
02 जिला स्तर पर महिला और पुरुष अस्पताल
05 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं
24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं
198 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं
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जिले में चिकित्सकों की कमी है। चिकित्सकों के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलने पर स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा।
- डॉ. जेएस बक्शी, प्रभारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी