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शौचालय में चल रहा बिजली विभाग के कैशियर का आफिस
lalitpur
Updated Fri, 02 Dec 2016 12:53 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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जिला परिषद परिसर में संचालित विद्युत विभाग के दफ्तर में जगह की कमी के कारण शौचालय में कैशियर का कार्यालय बना दिया गया है। सीट को पत्थर से ढंक दिया गया है। मजबूरी में कर्मचारियों को वहीं बैठकर काम करना पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि इस संबंध में जिला पंचायत को अवगत कराया गया है। जल्द ही कोई न कोई व्यवस्था की जाएगी।
जिला परिषद परिसर में वर्षों से जनपद का विद्युत विभाग का मुख्य कार्यालय संचालित हो रहा है। वहां अधिशासी अभियंता की देखरेख में पूरे जनपद के विद्युत विभाग का लेखाजोखा तैयार किया जाता है। यहां बड़े बाबू, एकाउंटेंट, कैशियर, बाबू समेत चौदह कर्मचारियों का स्टाफ है। दफ्तर में मात्र चार कमरे हैं। इन कमरों में विभिन्न पटल खुले हुए हैं। स्टाफ ज्यादा व कमरे कम होने के कारण विभाग का काम गैलरी, बरामदा में कुर्सी डालकर किया जाता है। इसके बाद भी स्थान की कमी को देख पूर्व में शौचालय में कैशियर व बाबू का कार्यालय खोल दिया गया। यहीं बैठकर कर्मचारी काम करते हैं। इसी शौचालय में डाक डिस्पैच का कार्य भी होता है।
ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को यह सब पता न हो, वर्ष में दो से तीन बार मंडलीय अधिकारी भी कार्यालय का निरीक्षण करने आते हैं। वह भी यहीं शौचालय में बैठकर कई बार निरीक्षण तक कर जाते हैं, लेकिन विभागीय बाबुओं के लिए सुविधाजनक कक्षों व काउंटरों की व्यवस्था की ओर कोई कदम नहीं उठाया जाता है। अधिशासी अभियंता गौरव कुमार का कहना है कि जिला परिषद का यह भवन वर्षों पूर्व विभाग को दिया गया था। यहां जगह की कमी है, जिसके कारण पूर्व से यह व्यवस्था चली आ रही है। इस संबंध में जिला परिषद को अवगत करा दिया गया है। इस बार जिला पंचायत की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी रखा गया है। जल्द ही यह समस्या खत्म होगी।
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और भी हैं समस्याएं
पुरुष शौचालय में कार्यालय खुला होने के कारण कर्मचारियों को महिला शौचालय का प्रयोग करना पड़ता है।वहां भी सफाई का अभाव है। बिल्ंिडग भी जर्जर है। दीवारों में पेड़ों की जड़ें अपनी पकड़ बना चुकी हैं। विद्युत विभाग मं हर साल करोड़ों रुपये के काम होते हैं, वसूली भी होती है, लेकिन इस और गौर नहीं किया जा रहा है।
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जिला परिषद परिसर में वर्षों से जनपद का विद्युत विभाग का मुख्य कार्यालय संचालित हो रहा है। वहां अधिशासी अभियंता की देखरेख में पूरे जनपद के विद्युत विभाग का लेखाजोखा तैयार किया जाता है। यहां बड़े बाबू, एकाउंटेंट, कैशियर, बाबू समेत चौदह कर्मचारियों का स्टाफ है। दफ्तर में मात्र चार कमरे हैं। इन कमरों में विभिन्न पटल खुले हुए हैं। स्टाफ ज्यादा व कमरे कम होने के कारण विभाग का काम गैलरी, बरामदा में कुर्सी डालकर किया जाता है। इसके बाद भी स्थान की कमी को देख पूर्व में शौचालय में कैशियर व बाबू का कार्यालय खोल दिया गया। यहीं बैठकर कर्मचारी काम करते हैं। इसी शौचालय में डाक डिस्पैच का कार्य भी होता है।
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ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को यह सब पता न हो, वर्ष में दो से तीन बार मंडलीय अधिकारी भी कार्यालय का निरीक्षण करने आते हैं। वह भी यहीं शौचालय में बैठकर कई बार निरीक्षण तक कर जाते हैं, लेकिन विभागीय बाबुओं के लिए सुविधाजनक कक्षों व काउंटरों की व्यवस्था की ओर कोई कदम नहीं उठाया जाता है। अधिशासी अभियंता गौरव कुमार का कहना है कि जिला परिषद का यह भवन वर्षों पूर्व विभाग को दिया गया था। यहां जगह की कमी है, जिसके कारण पूर्व से यह व्यवस्था चली आ रही है। इस संबंध में जिला परिषद को अवगत करा दिया गया है। इस बार जिला पंचायत की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी रखा गया है। जल्द ही यह समस्या खत्म होगी।
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और भी हैं समस्याएं
पुरुष शौचालय में कार्यालय खुला होने के कारण कर्मचारियों को महिला शौचालय का प्रयोग करना पड़ता है।वहां भी सफाई का अभाव है। बिल्ंिडग भी जर्जर है। दीवारों में पेड़ों की जड़ें अपनी पकड़ बना चुकी हैं। विद्युत विभाग मं हर साल करोड़ों रुपये के काम होते हैं, वसूली भी होती है, लेकिन इस और गौर नहीं किया जा रहा है।