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Lalitpur News: अब मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों को लगेगा टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन
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शुरू हुई प्रक्रिया, ईसीजी जांच के बाद आवश्यकता होने पर हायर सेंटर को किया जाएगा रेफर
झांसी मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलाॅजिस्ट की ली जाएगी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अब मेडिकल कॉलेज में आने वाले हृदय रोगियों को ऑन कॉल झांसी के कार्डियोलाॅजिस्ट की सलाह पर टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जाएगा। इससे अटैक से जमे खून के थक्के घुल जाएंगे। इससे जान जाने का खतरा कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इंजेक्शन से अटैक के प्रभाव की गति कम होगी। ईसीजी जांच में सुधार होने के साथ आवश्यकता पर हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाएगा। स्थिति सामान्य होने पर मेडिकल कॉलेज में ही उपचार किया जाएगा।
जिले में मेडिकल कॉलेज को 31 जुलाई 2024 में एनएमसी से मान्यता मिल गई थी। इससे चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ी। कई विभागों के स्थापित होने से बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू हुई हैं। इनमें नेत्र विशेषज्ञ, नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ, सर्जन व स्त्री रोग विशेषज्ञों मिल गए थे लेकिन हृदय रोगियों को उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी थी।
हृदयघात के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज महज रेफरल सेंटर साबित हो रहा था। कई बार हायर सेंटर पहुंचने में देरी के चलते मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन दो से तीन रेफर हो रहे थे।
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अब मेडिकल कॉलेज हृदय रोगियों के लिए जीवनदान देगा। शासन द्वारा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए थे। कॉलेज प्रशासन ने महरानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के हृदय सेतु ग्रुप से जुड़कर इंजेक्शन लगाने की सुविधा शुरू कर दी है।
यह है प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज में हृदयघात के मरीज आने पर ईसीजी जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही फिजिशियन मरीज की ईसीजी जांच रिपोर्ट को एमएलबी झांसी के हृदय सेतु ग्रुप पर डाल दी जाएगी। कार्डियोलॉजिस्ट मरीज की ईसीजी रिपोर्ट देखकर थ्रोंबोलाइज़ेशन के लिए टेनेक्टेप्लेस जीवनरक्षक इंजेक्शन लगाने की सलाह देंगे। सीसीयू के नोडल डॉ. युसुफ रिजवान ने बताया कि इंजेक्शन लगाने के बाद हालत में सुधार होने के साथ ही मरीज को हायर सेंटर में जांच व उपचार के लिए भेजा जाएगा। इससे मरीज को पर्याप्त समय मिल जाएगा। हालात सामान्य होने पर रेफर नहीं करना होगा।
वर्जन
टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन हार्ट अटैक के दौरान रक्त में जमे थक्के को घोलता है। समय पर इंजेक्शन लगने से मरीजों की जान बचाने की संभावना अधिक होती है। मेडिकल कॉलेज में यह इंजेक्शन लगाए जाने की सुविधा शुरू हो गई है। - डॉ. मयंक शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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झांसी मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलाॅजिस्ट की ली जाएगी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अब मेडिकल कॉलेज में आने वाले हृदय रोगियों को ऑन कॉल झांसी के कार्डियोलाॅजिस्ट की सलाह पर टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जाएगा। इससे अटैक से जमे खून के थक्के घुल जाएंगे। इससे जान जाने का खतरा कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इंजेक्शन से अटैक के प्रभाव की गति कम होगी। ईसीजी जांच में सुधार होने के साथ आवश्यकता पर हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाएगा। स्थिति सामान्य होने पर मेडिकल कॉलेज में ही उपचार किया जाएगा।
जिले में मेडिकल कॉलेज को 31 जुलाई 2024 में एनएमसी से मान्यता मिल गई थी। इससे चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ी। कई विभागों के स्थापित होने से बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू हुई हैं। इनमें नेत्र विशेषज्ञ, नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ, सर्जन व स्त्री रोग विशेषज्ञों मिल गए थे लेकिन हृदय रोगियों को उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी थी।
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हृदयघात के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज महज रेफरल सेंटर साबित हो रहा था। कई बार हायर सेंटर पहुंचने में देरी के चलते मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन दो से तीन रेफर हो रहे थे।
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अब मेडिकल कॉलेज हृदय रोगियों के लिए जीवनदान देगा। शासन द्वारा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए थे। कॉलेज प्रशासन ने महरानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के हृदय सेतु ग्रुप से जुड़कर इंजेक्शन लगाने की सुविधा शुरू कर दी है।
यह है प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज में हृदयघात के मरीज आने पर ईसीजी जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही फिजिशियन मरीज की ईसीजी जांच रिपोर्ट को एमएलबी झांसी के हृदय सेतु ग्रुप पर डाल दी जाएगी। कार्डियोलॉजिस्ट मरीज की ईसीजी रिपोर्ट देखकर थ्रोंबोलाइज़ेशन के लिए टेनेक्टेप्लेस जीवनरक्षक इंजेक्शन लगाने की सलाह देंगे। सीसीयू के नोडल डॉ. युसुफ रिजवान ने बताया कि इंजेक्शन लगाने के बाद हालत में सुधार होने के साथ ही मरीज को हायर सेंटर में जांच व उपचार के लिए भेजा जाएगा। इससे मरीज को पर्याप्त समय मिल जाएगा। हालात सामान्य होने पर रेफर नहीं करना होगा।
वर्जन
टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन हार्ट अटैक के दौरान रक्त में जमे थक्के को घोलता है। समय पर इंजेक्शन लगने से मरीजों की जान बचाने की संभावना अधिक होती है। मेडिकल कॉलेज में यह इंजेक्शन लगाए जाने की सुविधा शुरू हो गई है। - डॉ. मयंक शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज