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Lalitpur News: अब जामनी बांध में लगाया जाएगा फ्लोटिंग सोलर संयंत्र, बिजली संकट से मिलेगी निजात
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जामनी बांध में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादित की जाएगी। बांध के भराव क्षेत्र में 37 मेगावाट का फ्लोटिंग (तैरता) सोलर संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसकी लागत करीब ढाई अरब रुपये है। वर्तमान में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए शासन स्तर पर अनापत्ति लेने की प्रक्रिया चल रही है।
जामनी नदी पर वर्ष 1973 में बांध का निर्माण हुआ था। इसकी जल भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम है। इसमें सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है। बांध से निकली नहरों के जरिए करीब दो दर्जन गांवों की 11 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। साथ ही 80 से अधिक गांवों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। यूपी-एमपी के बीच एक समझौते के तहत बांध से मध्य प्रदेश के टीकमगढ जिले को भी पानी दिया जाता है। अब यह बांध विद्युत उत्पादन के लिए भी मददगार होने जा रहा है। वर्ष 2023 में यहां हुई इंवेस्टर समिट में इस बांध पर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली टुस्को कंपनी ने बांध के भराव क्षेत्र में फ्लोटिंग (तैरता) सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव दिया था। बांध का फिजिविलिटी टेस्ट किया गया, जो उपयुक्त पाया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार किया गया। बांध के भराव क्षेत्र में लगने वाला यह फ्लोटिंग सोलर पैनल 37 मेगावाट का होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में शासन स्तर पर एनओसी की प्रक्रिया चल रही है। इसके मिलते ही फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाने की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित हो जाने से इससे उत्पादित होने वाली बिजली को विद्युत विभाग को बेचा जाएगा। इससे जनपद के लोगों को बिजली की समस्या से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है।
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जामनी बांध के भराव क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में शासन स्तर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया चल रही है। इसके मिलने के बाद यहां फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाया जाना शुरू होगा।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड
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ललितपुर। जामनी बांध में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादित की जाएगी। बांध के भराव क्षेत्र में 37 मेगावाट का फ्लोटिंग (तैरता) सोलर संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसकी लागत करीब ढाई अरब रुपये है। वर्तमान में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए शासन स्तर पर अनापत्ति लेने की प्रक्रिया चल रही है।
जामनी नदी पर वर्ष 1973 में बांध का निर्माण हुआ था। इसकी जल भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम है। इसमें सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है। बांध से निकली नहरों के जरिए करीब दो दर्जन गांवों की 11 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। साथ ही 80 से अधिक गांवों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। यूपी-एमपी के बीच एक समझौते के तहत बांध से मध्य प्रदेश के टीकमगढ जिले को भी पानी दिया जाता है। अब यह बांध विद्युत उत्पादन के लिए भी मददगार होने जा रहा है। वर्ष 2023 में यहां हुई इंवेस्टर समिट में इस बांध पर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली टुस्को कंपनी ने बांध के भराव क्षेत्र में फ्लोटिंग (तैरता) सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव दिया था। बांध का फिजिविलिटी टेस्ट किया गया, जो उपयुक्त पाया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार किया गया। बांध के भराव क्षेत्र में लगने वाला यह फ्लोटिंग सोलर पैनल 37 मेगावाट का होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में शासन स्तर पर एनओसी की प्रक्रिया चल रही है। इसके मिलते ही फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाने की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित हो जाने से इससे उत्पादित होने वाली बिजली को विद्युत विभाग को बेचा जाएगा। इससे जनपद के लोगों को बिजली की समस्या से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है।
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जामनी बांध के भराव क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में शासन स्तर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया चल रही है। इसके मिलने के बाद यहां फ्लोटिंग सोलर पैनल संयंत्र लगाया जाना शुरू होगा।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड