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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में काटी जा रही सोसाइटी को नोटिस जारी

Fri, 25 Aug 2017 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 25 Aug 2017 12:04 AM IST
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Notice issued to society being cut in flood affected area
avas, lalitpur news - फोटो : demo
गोविंद सागर बांध से निकली शहजाद नदी से सटकर शहर के मुहल्ला गोविंद नगर में निजी भूमि पर चारदीवारी का निर्माण करके गोकुल धाम सोसाइटी नाम से निजी कॉलोनी काटी जा रही है। जबकि यह चारदीवारी का क्षेत्र बाढ़ प्रभावित इलाके में आता है, लेकिन जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस संबंध में अमर उजाला ने 12 जुलाई को समाचार प्रकाशित था, जिसका संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने उक्त सोसाइटी को नोटिस जारी करके प्लाटिंग रोकने और उक्त चारदीवारी को ध्वस्त कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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शहर सीमा में स्थित गोविंद सागर बांध के जब गेट व साइफन खुलते हैं, तो बांध से निकली शहजाद नदी के आसपास का बड़ा क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हो जाता है। इसी नदी के किनारे मुहल्ला गोविंद नगर में नदी से बिल्कुल सटकर गोकुल धाम सोसाइटी नाम से निजी कालोनी बसाई जा रही है, जहां जनता को अंधेरे में रखकर गुमराह कर प्लाटिंग की जा रही है। एक माह पूर्व 12 जुलाई को अमर उजाला ने इस समाचार को मुख्यता से प्रकाशित किया था, जिसको संज्ञान में लेते हुए अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने मामले की जांच की। जांच के दौरान उक्त कालोनी और इसकी चार दीवारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पाई गई। जिला प्रशासन के निर्देशन के क्रम में सिंचाई विभाग राजघाट निर्माण खंड ने उक्त सोसाइटी को नोटिस जारी करके प्लांटिंग रुकवाने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बनाई गई चारदीवारी को स्वत: तुड़वाने के निर्देश दे दिए हैं। अब देखना है कि विभाग के निर्देशों का कितना अनुपालन किया जाता है। गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में कुछ अन्य भूखंडों पर भी छोटे-छोटे रूप में प्लांटिंग की जा रही है। यह भी जांच के दायरे में आता है।
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सिंचाई विभाग ने नहीं किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जिक्र
इस कॉलोनी के लिए विनियमित प्राधिकरण विभाग द्वारा ले आउट भी पास कर दिया गया है, जबकि कालोनी का आधे से अधिक क्षेत्र बाढ़ प्रभावित इलाकों में आता है। गौरतलब है कि सिंचाई विभाग राजघाट निर्माण खंड के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने प्राधिकरण विभाग को जुलाई 2013 में एनओसी जारी की थी, जिसके आधार पर ले-आउट पास किया गया है। इस एनओसी में सिंचाई विभाग द्वारा कहीं पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे विभाग की उदासीन कार्यप्रणाली उजागर होती है।
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सिंचाई विभाग से ली गई थी एनओसी
इस संबंध में विगत अगस्त माह 2013 में सिंचाई विभाग द्वारा जारी की गई एनओसी के बाद ही कालोनी का ले-आउट पास किया गया है। इसके साथ ही नगर पालिका परिषद व तहसील की भी एनओसी ली गई थी। सिंचाई विभाग ने एनओसी जारी करते समय बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का कहीं पर भी उल्लेख नहीं किया है।
- एसके प्रजापति, जेई, विनियमित प्राधिकरण, ललितपुर।

हमने नहीं की एनओसी जारी
उक्त एनओसी पूर्व में जारी की गई है, जो विभागीय जमीन के संबंध में है। अब मामला संज्ञान में आया है कि उक्त कालोनी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आती है, इसलिए नोटिस जारी कर दिए हैं।

- अतुल कुमार गुप्ता
अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड, पिसंचाई विभाग ललितपुर।

प्राधिकरण के पास नहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का ब्योरा व मानचित्र
शहर में व्यवस्थित तरीके से भवनों का निर्माण कराने की जिम्मेदारी विनियमितीय प्राधिकरण विभाग की है। इसी विभाग से मानचित्र पास होने के बाद ही मानचित्र के अनुसार निर्माण कार्य कराया जाता है। मानचित्र पास करते समय विभाग द्वारा हरित पट्टी, आवासीय व कॉमर्शियल लेंट आदि का ध्यान रखा जाता है। वर्तमान में प्राधिकरण के पास शहर के बाढ़ क्षेत्र प्रभावित इलाकों को कोई मानचित्र व ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। अमर उजाला में यह मामला उझलने के बाद विनियमित क्षेत्र विभाग ने सिंचाई विभाग राजघाट निर्माण खंड को 27 जुलाई को पत्र भेजकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का मानचित्र व ब्योरा मांगा है। गौरतलब है कि एक माह बीतने के बाद भी अभी तक सिंचाई विभाग द्वारा मानचित्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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