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लखंजर गांव तक नहीं पहुंच पाया करंट, अंधेरा में जी रहे लोग

Tue, 25 Aug 2020 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 01:27 AM IST
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no electricity at lakhanger
मड़ावरा/ललितपुर। विद्युत विभाग द्वारा राजीव गांधी विद्युतीकरण, सौभाग्य सरीखी अनेक योजना चलाईं, लेकिन वे लखंजर गांव को रोशन नहीं कर पाई। आज भी गांव के लोग अंधेरे में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। विभाग ने जो खंभों पर तार पर बांधे थे, वे वन विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र न देने पर शोपीस बनकर रह गए हैं।
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जिले में चिगलौआ पावर प्लांट सहित सोलर प्लांट की अनेक इकाइयां स्थापित हैं। जिससे प्रदेश के कई जिलों को बिजली प्राप्त होती है, लेकिन प्रदेश का अंतिम गांव लखंजर आज भी बिजली से वंचित है। इस कारण गांव के लोग विद्युत की सुविधा के लिए जनप्रतिनिधियों की निहारते रहते हैं। गांव में बिजली के अभाव में ग्रामीणों की रात्रि मिट्टी के तेल के दीपक की टिमटिमाती रोशनी में बीतती है।
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इस गांव की दूरी जनपद मुख्यालय से लगभग 100 किमी के आसपास है। इस गांव के विकास की जब भी बारी आती है तो वन विभाग इसमें अड़ंगा लगा देता है। जिससे विकास की गंगा गांव में बह नहीं पाती है। बिजली के मामले में यही हुआ। विद्युत विभाग ने बिजली पहुंचाने के लिए खंभे लगाए और उन पर तार खींच दिए लेकिन विभाग उनमें विद्युत करंट नहीं दौड़ा पाया। इसमें वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र आड़े आ रहा है। यही नहीं, लखंजर गांव विकास से कोसो दूर हैं, जिससे यहां के लोग मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
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गांव में बिजली नहीं होने से गांव के लोग बहुत परेशान हैं। शाम होते ही गांव में अंधेरा पसर जाता है। चाहे सर्दी हो या गर्मी हो या फिर बरसात। वर्ष भर गांव के लोगों को बिजली की कमी का अहसास होता है। गांव में पता नहीं बिजली कब पहुंच पाएगी?
लाखन सिंह
गांव में बिजली के खंभे लगाकर उन पर विद्युत तार बांध दिए गए हैं लेकिन उनमें विद्युत करंट नहीं दौड़ पा रहा है। इस कारण गांव के लोग अपना मोबाइल तक चार्ज नहीं कर पाते हैं।
रामअवतार
शहर की चकाचौंध में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि गांव की समस्या को भूल जाते हैं। कहने को गांव में बिजली के खंभे लगा दिए हैं। विद्युत करंट के अभाव में खंभों पर बंधे विद्युत तार शोपीस बनकर रह गए हैं। गांव के लोग आज भी उम्मीद पर कायम हैं।

भगत सिंह प्रधान
गांव में बिजली पहुंचाने के लिए खंभे लगाकर तार बंधवा दिए गए। इसके बाद वन विभाग से एनओसी प्राप्त नहीं हो सकी। जिससे विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी।
आकाश सचान, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड ग्रामीण
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