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दहेज लोभी हत्यारे पति को सात वर्ष की कैद

lalitpur Updated Fri, 19 May 2017 12:52 AM IST
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murder - फोटो : demo pic

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दहेज की खातिर पत्नी की फांसी पर लटकाकर हत्या करने में दोषी शहर के मुहल्ला बड़ापुरा निवासी एक व्यक्ति को अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) हरकेश कुमार की अदालत ने सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।  
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सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व जिला सागर के थाना सुरखी अंतर्गत ग्राम क्योलारी निवासी रामेश्वर पुत्र थोवन राठौर ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसने अपनी पुत्री रचना की शादी अप्रैल 2012 में ललितपुर के मुहल्ला बड़ापुरा निवासी जितेंद्र पुत्र बब्लूू राठौर के साथ हिंदू रीति रिवाज के अनुसार की थी। उसकी पुत्री के ससुराली शुरू से ही उसे दहेज की खातिर परेशान करते थे। 29 अक्टूबर 2012 को उसकी पुत्री ने उसे फोन कर बताया कि उसके ससुरालीजन उसे परेशान करते हैं और दहेज में मोटर साइकिल व एक लाख रुपये की मांग कर रहे थे और 30 अक्तूबर 2012 को उसकी पुत्री की दहेज की खातिर हत्या कर दी गई व उसके शव को आत्महत्या दर्शाने के लिए फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। दाह संस्कार के लिए ले जा रहे थे, तब श्मशान में उसने अपनी पुत्री को शव देखा, जिस पर उसके रिश्तेदार उसे लिवा कर वहां से चले गए।



उक्त मामले में पति जितेंद्र, ससुर बब्लू, देवर धर्मेंद्र राठौर, सास शिवकली, दशरथ पुत्र जालम, निवासी बड़ापुरा अैर मध्य प्रदेश के सागर निवासी मुन्नालाल उर्फ हरीशंकर पुत्र भागीरथ व मैहरबान पुत्र हरीशंकर के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर थाना कोतवाली में मामला पंजीकृत किया गया। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय में पति जितेंद्र, ससुर बब्लू, देवर धर्मेंद्र व सास शिवकली के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई करते हुए अभियुक्त पति जितेंद्र को उक्त दहेज हत्या, दहेज प्रताड़िना, दहेज प्रतिषेध अधिनियम व मारपीट की धाराओं में दोषी पाया और सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। यही नहीं कुल दस हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अर्थदंड अदा होने की दशा में न्यायालय ने अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित पक्ष का दिलाने के निर्देश भी दिए।

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