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पार्षद के कुएं पर निर्भर मुहल्लावासी
Lalitpur
Updated Fri, 22 Apr 2016 12:33 AM IST
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पार्षद के कुएं पर निर्भर मुहल्लावासी
- फोटो : Amar Ujala
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ललितपुर। नगर के वार्ड नंबर 11 के मुहल्ला चौकाबाग व रावतयाना में सूखे का गंभीर असर पड़ा है। जमीन सूखी होने के कारण हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है, जिससे यहां रहने वाले करीब पांच हजार लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पार्षद के कुएं पर मुहल्लेवासी निर्भर हैं।
मुहल्ला रावतयाना की आबादी करीब दो हजार है। यहां पर पानी की पाइप लाइन बिछी नहीं होने के कारण लोगों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के भरोसे है। सूखा के कारण इलाके का भू-जल स्तर काफी गिर गया है, जिससे मुहल्लों में लगे लगभग सभी सार्वजनिक व निजी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। इक्का-दुक्का हैंडपंप ही अब लोगों का साथ निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी की ऐसी स्थित इससे पहले नहीं हुई। इलाके से गोविंद सागर बांध की बड़ी नहर निकली हुई है। नहर संचालित होने के कारण यहां का जलस्तर हमेशा ठीक बना रहता था, लेकिन इस वर्ष सूखे के कारण नहर का संचालन न के बराबर हुआ है। नहर में पानी नहीं छोड़ जाने के कारण व बरसात नहीं होने के कारण इलाके की जमीन सूखी रह गई और पानी का लेबल नीचे गिरता चला गया। वर्तमान में यहां के हालात ऐसे हो गए हैं कि सार्वजनिक व निजी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। ऐसे में दो हजार लोगों को पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है।
ऐसी ही स्थित मुहल्ला चौकाबाग से करीब डेढ़ किमी दूर बसे मुहल्ला गोविंद नगर की है। यह मुहल्ला भी वार्ड नंबर 11 की सीमा के अंदर आता है। मुहल्ले में करीब तीन हजार लोग रहते हैं, यहां भी पाइपलाइन नहीं होने के कारण पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के सहारे है। इस इलाके में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग रहने के कारण निजी हैंडपंपों की संख्या बहुत कम है। यहां 10 सार्वजनिक हैंडपंप लगे हैं, लेकिन उनमें से मात्र दो हैंडपंप पानी दे रहे हैं। यह मुहल्ला अपर जोन में है। पास से शहजाद नदी निकली होने के कारण यहां का जलस्तर बना रहता था, लेकिन इस वर्ष नदी सूखी रहने के कारण जलस्तर गिर गया है और पानी की समस्या पैदा हो गई है।
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पार्षद के कुएं व ट्यूबवेल पर आश्रित मुहल्लेवासी
मुहल्ले का भू-जल स्तर गिरने के कारण यहां पर लगे बोर भी सूख गए हैं। लेकिन, सूखा की इस स्थित में पार्षद के बगीचे में लगा निजी ट्यूबवेल लोगों की प्यास बुझा रहा है। पार्षद के घर में कुआं बना है, जिसमें बोर भी है। बोर में सबमर्सिबल पंप डला है, जिससे स्थानीय लोग सुबह-शाम पानी भरते हैं। जब कुएं के बोर से पानी निकालना बंद हो जाता है तो वह बगीचे में लगे निजी ट्यूबवेल से कुएं को दोबारा भर देते हैं। पार्षद के निजी कुएं पर मुहल्ले के करीब 50 परिवार पेयजल के लिए आश्रित हैं।
मुहल्ले के लगभग सभी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। दो-तीन हैंडपंप ही चालू हालत में हैं। यह कभी भी बंद हो सकते हैं। यदि यहां पर पानी की पाइप लाइन डलवा दी जाए तो हमेशा के लिए पानी की समस्या के छुटकारा मिल सकता है।
- उर्मिला देवी
गोविंद नगर
जल निगम द्वारा दो महीने पहले मुहल्ले में नया हैंडपंप लगाया गया था, लेकिन इस हैंडपंप की गहराई बहुत कम लगभग 95 फुट तक ही है। इससे जनता की समस्या दूर नहीं हुई, बल्कि सरकारी धन ठिकाने लगा दिया गया।
- वीरेंद्र कुशवाहा
गोविंद नगर निवासी
काफी समय बाद पानी की यह स्थित बनी है। घरों में निजी हैंडपंप होने के कारण सरकारी हैंडपंपों की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन, वर्तमान में लगभग सभी हैंडपंप व बोर सूख गए है। अब लोग सरकारी हैंडपंपों की मांग कर रहे हैं। लोगों की जरूरत के अनुसार 22 नए हैंडपंप की मांग की थी, जिसमें से एक हैंडपंप लगवाया गया, वह भी ड्राई निकला है।
- रामसेवक प्रजापति
पार्षद
पेयजल ने सभी की नींद उड़ाई, पर जल संस्था सोया
सूखे के इन हालातों में सभी की नींद उड़ी हुई है। चारों ओर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। लोगों के लिए पीने का पानी नहीं मिल रहा है, लेकिन जल संस्थान की लापरवाही के कारण हजारों लीटर कीमती व स्वच्छ पेयजल बरबाद हो रहा है। गोविंद सागर बांध के क्षेत्र में पानी की टंकी बनी है, जिससे मवेशी बाजार, गोविंद नगर को पेयजल सप्लाई दी जाती है। उक्त स्थानों पर पानी सप्लाई करने के लिए पाइप लाइन मुख्य सड़क के किनारे से होती हुई आई है। मुहल्ला चौकाबाग स्थित बड़ी नहर के पुल पर सड़क किनारे से निकली हैवी पाइप लाइन में लीकेज है। इससे हजारों लीटर स्वच्छ पेयजल बरबाद हो रहा है। यह पाइप लाइन पिछले तीन महीनों से टूटी है, स्थानीय लोगों द्वारा इसकी जानकारी जल संस्थान को भी दी गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पाइप लाइन लीकेज की जानकारी नहीं थी, अब जानकारी हुई है। इसे तत्काल प्रभाव से सही करा दियल जाएगा।
- इंजी. रघुवेंद्र, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
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मुहल्ला रावतयाना की आबादी करीब दो हजार है। यहां पर पानी की पाइप लाइन बिछी नहीं होने के कारण लोगों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के भरोसे है। सूखा के कारण इलाके का भू-जल स्तर काफी गिर गया है, जिससे मुहल्लों में लगे लगभग सभी सार्वजनिक व निजी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। इक्का-दुक्का हैंडपंप ही अब लोगों का साथ निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी की ऐसी स्थित इससे पहले नहीं हुई। इलाके से गोविंद सागर बांध की बड़ी नहर निकली हुई है। नहर संचालित होने के कारण यहां का जलस्तर हमेशा ठीक बना रहता था, लेकिन इस वर्ष सूखे के कारण नहर का संचालन न के बराबर हुआ है। नहर में पानी नहीं छोड़ जाने के कारण व बरसात नहीं होने के कारण इलाके की जमीन सूखी रह गई और पानी का लेबल नीचे गिरता चला गया। वर्तमान में यहां के हालात ऐसे हो गए हैं कि सार्वजनिक व निजी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। ऐसे में दो हजार लोगों को पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है।
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ऐसी ही स्थित मुहल्ला चौकाबाग से करीब डेढ़ किमी दूर बसे मुहल्ला गोविंद नगर की है। यह मुहल्ला भी वार्ड नंबर 11 की सीमा के अंदर आता है। मुहल्ले में करीब तीन हजार लोग रहते हैं, यहां भी पाइपलाइन नहीं होने के कारण पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के सहारे है। इस इलाके में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग रहने के कारण निजी हैंडपंपों की संख्या बहुत कम है। यहां 10 सार्वजनिक हैंडपंप लगे हैं, लेकिन उनमें से मात्र दो हैंडपंप पानी दे रहे हैं। यह मुहल्ला अपर जोन में है। पास से शहजाद नदी निकली होने के कारण यहां का जलस्तर बना रहता था, लेकिन इस वर्ष नदी सूखी रहने के कारण जलस्तर गिर गया है और पानी की समस्या पैदा हो गई है।
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पार्षद के कुएं व ट्यूबवेल पर आश्रित मुहल्लेवासी
मुहल्ले का भू-जल स्तर गिरने के कारण यहां पर लगे बोर भी सूख गए हैं। लेकिन, सूखा की इस स्थित में पार्षद के बगीचे में लगा निजी ट्यूबवेल लोगों की प्यास बुझा रहा है। पार्षद के घर में कुआं बना है, जिसमें बोर भी है। बोर में सबमर्सिबल पंप डला है, जिससे स्थानीय लोग सुबह-शाम पानी भरते हैं। जब कुएं के बोर से पानी निकालना बंद हो जाता है तो वह बगीचे में लगे निजी ट्यूबवेल से कुएं को दोबारा भर देते हैं। पार्षद के निजी कुएं पर मुहल्ले के करीब 50 परिवार पेयजल के लिए आश्रित हैं।
मुहल्ले के लगभग सभी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। दो-तीन हैंडपंप ही चालू हालत में हैं। यह कभी भी बंद हो सकते हैं। यदि यहां पर पानी की पाइप लाइन डलवा दी जाए तो हमेशा के लिए पानी की समस्या के छुटकारा मिल सकता है।
- उर्मिला देवी
गोविंद नगर
जल निगम द्वारा दो महीने पहले मुहल्ले में नया हैंडपंप लगाया गया था, लेकिन इस हैंडपंप की गहराई बहुत कम लगभग 95 फुट तक ही है। इससे जनता की समस्या दूर नहीं हुई, बल्कि सरकारी धन ठिकाने लगा दिया गया।
- वीरेंद्र कुशवाहा
गोविंद नगर निवासी
काफी समय बाद पानी की यह स्थित बनी है। घरों में निजी हैंडपंप होने के कारण सरकारी हैंडपंपों की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन, वर्तमान में लगभग सभी हैंडपंप व बोर सूख गए है। अब लोग सरकारी हैंडपंपों की मांग कर रहे हैं। लोगों की जरूरत के अनुसार 22 नए हैंडपंप की मांग की थी, जिसमें से एक हैंडपंप लगवाया गया, वह भी ड्राई निकला है।
- रामसेवक प्रजापति
पार्षद
पेयजल ने सभी की नींद उड़ाई, पर जल संस्था सोया
सूखे के इन हालातों में सभी की नींद उड़ी हुई है। चारों ओर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। लोगों के लिए पीने का पानी नहीं मिल रहा है, लेकिन जल संस्थान की लापरवाही के कारण हजारों लीटर कीमती व स्वच्छ पेयजल बरबाद हो रहा है। गोविंद सागर बांध के क्षेत्र में पानी की टंकी बनी है, जिससे मवेशी बाजार, गोविंद नगर को पेयजल सप्लाई दी जाती है। उक्त स्थानों पर पानी सप्लाई करने के लिए पाइप लाइन मुख्य सड़क के किनारे से होती हुई आई है। मुहल्ला चौकाबाग स्थित बड़ी नहर के पुल पर सड़क किनारे से निकली हैवी पाइप लाइन में लीकेज है। इससे हजारों लीटर स्वच्छ पेयजल बरबाद हो रहा है। यह पाइप लाइन पिछले तीन महीनों से टूटी है, स्थानीय लोगों द्वारा इसकी जानकारी जल संस्थान को भी दी गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पाइप लाइन लीकेज की जानकारी नहीं थी, अब जानकारी हुई है। इसे तत्काल प्रभाव से सही करा दियल जाएगा।
- इंजी. रघुवेंद्र, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान