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मनरेगा: काम कराए बिना कर दिया ढाई लाख का भुगतान, चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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ललितपुर। मनरेगा में काम कराए गए बिना फर्जी तरीके से 2.52 लाख रुपये का गबन करने के मामले में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी समेत चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
खंड विकास अधिकारी मड़ावरा दीपेंद्र पांडेय ने थाना गिरार में तहरीर देकर बताया कि जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह बुंदेला ने 18 दिसंबर 2021 को आयोजित जिला पंचायत बैठक में मनरेगा के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में ग्राम पंचायत रमगढ़ा एवं खुटगुवां में कराए गए कार्यों की शिकायत की थी। जिस पर सीडीओ ने सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी नवनीत सिंह राजपूत और सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग शाश्वत राज को जांच सौंपी थी।
जांच में पाया गया कि जालम पुत्र सुंदर के खेत पर मेड़ बंधी निर्माण का कार्य नहीं कराया गया। जबकि कागजों में इस काम पर एक लाख 61 हजार 160 रुपये व साइन बोर्ड पर तीन हजार रुपये खर्च करना दिखाया गया। इसके साथ ही सोमेश पुत्र हीरालाल के खेत पर तालाब निर्माण का होना बताया था। जबकि भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी ने तालाब का निर्माण भूमि संरक्षण विभाग होने की बात कही। ग्राम पंचायत ने इस पर 88536 रुपये का खर्च दिखाया।
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मामले में ग्राम प्रधान तुलसी, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र प्रजापति ने जानबूझकर बिना कार्य के मस्टरोल भर दिए और तकनीकी सहायक परशुराम कोरी ने भी फर्जी मांपाकन कर दिया। इसके साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारी कमलेश रिछारिया ने दूसरे काम का फर्जी मस्टरोल प्रस्तुत कर दिया।
मामले में खंड विकास अधिकारी की तहरीर के आधार पर थाना गिरार पुलिस ने आरोपी ग्राम प्रधान रमगढ़ा तुलसी, ग्राम पंचायत अधिकारी कमलेश रिछारिया, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र प्रजापति एवं तकनीकी सहायक परशुराम कोरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
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खंड विकास अधिकारी मड़ावरा दीपेंद्र पांडेय ने थाना गिरार में तहरीर देकर बताया कि जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह बुंदेला ने 18 दिसंबर 2021 को आयोजित जिला पंचायत बैठक में मनरेगा के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में ग्राम पंचायत रमगढ़ा एवं खुटगुवां में कराए गए कार्यों की शिकायत की थी। जिस पर सीडीओ ने सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी नवनीत सिंह राजपूत और सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग शाश्वत राज को जांच सौंपी थी।
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जांच में पाया गया कि जालम पुत्र सुंदर के खेत पर मेड़ बंधी निर्माण का कार्य नहीं कराया गया। जबकि कागजों में इस काम पर एक लाख 61 हजार 160 रुपये व साइन बोर्ड पर तीन हजार रुपये खर्च करना दिखाया गया। इसके साथ ही सोमेश पुत्र हीरालाल के खेत पर तालाब निर्माण का होना बताया था। जबकि भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी ने तालाब का निर्माण भूमि संरक्षण विभाग होने की बात कही। ग्राम पंचायत ने इस पर 88536 रुपये का खर्च दिखाया।
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मामले में ग्राम प्रधान तुलसी, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र प्रजापति ने जानबूझकर बिना कार्य के मस्टरोल भर दिए और तकनीकी सहायक परशुराम कोरी ने भी फर्जी मांपाकन कर दिया। इसके साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारी कमलेश रिछारिया ने दूसरे काम का फर्जी मस्टरोल प्रस्तुत कर दिया।
मामले में खंड विकास अधिकारी की तहरीर के आधार पर थाना गिरार पुलिस ने आरोपी ग्राम प्रधान रमगढ़ा तुलसी, ग्राम पंचायत अधिकारी कमलेश रिछारिया, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र प्रजापति एवं तकनीकी सहायक परशुराम कोरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।