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मेडिकल कॉलेज : अधूरे संसाधनों से हो रही टीबी की जांच
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा किया जा रहा हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। यहां पर अबतक टीबी की जांच अधूरे संसाधनों के सहारे की जा रही है।
मेडिकल काॅलेज में सीबी नॉट मशीन और ट्रूनॉट मशीन नहीं लगाई गई है। डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब होने से छाती की जांच तक नहीं हो पा रही है। ऐसे में जांच की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में आचार्य, सहआचार्य, सहायक आचार्य समेत लगभग 60 चिकित्सक नए आए हैं। विभिन्न विभागों में अलग-अलग यूनिट बनाई गई हैं, जो निर्धारित समय पर ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सक आने से परामर्श तो मिल रहा है।
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लेकिन, संसाधनों के अभाव में सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां पर पैथोलॉजी विभाग में मशीनों की कमी बनी हुई है। महज सामान्य जांच हो रही हैं। यहां पर गंभीर जांच नहीं हो रही हैं। साथ ही टीबी की जांच भी आधुनिक तरीके से नहीं हो पा रही है।
यहां पर क्षय रोग की जांच के लिए अब तक सीबी नॉट मशीन नहीं लगाई गई है। इससे दवा असर न करने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। साथ ही टीबी के वैक्टीरिया की जांच के लिए ट्रूनॉट मशीन तक नहीं है। हद तो तब हो गई, जब डिजिटल एक्स-रे जांच तक नहीं हो पा रही है। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल कॉलेज क्षय रोगियों की जांच करने में हांफ रहा है।
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मेडिकल काॅलेज में सीबी नॉट मशीन और ट्रूनॉट मशीन नहीं लगाई गई है। डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब होने से छाती की जांच तक नहीं हो पा रही है। ऐसे में जांच की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में आचार्य, सहआचार्य, सहायक आचार्य समेत लगभग 60 चिकित्सक नए आए हैं। विभिन्न विभागों में अलग-अलग यूनिट बनाई गई हैं, जो निर्धारित समय पर ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सक आने से परामर्श तो मिल रहा है।
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लेकिन, संसाधनों के अभाव में सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां पर पैथोलॉजी विभाग में मशीनों की कमी बनी हुई है। महज सामान्य जांच हो रही हैं। यहां पर गंभीर जांच नहीं हो रही हैं। साथ ही टीबी की जांच भी आधुनिक तरीके से नहीं हो पा रही है।
यहां पर क्षय रोग की जांच के लिए अब तक सीबी नॉट मशीन नहीं लगाई गई है। इससे दवा असर न करने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। साथ ही टीबी के वैक्टीरिया की जांच के लिए ट्रूनॉट मशीन तक नहीं है। हद तो तब हो गई, जब डिजिटल एक्स-रे जांच तक नहीं हो पा रही है। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल कॉलेज क्षय रोगियों की जांच करने में हांफ रहा है।