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लाकडाउन में बाजार रहे बंद, भेज दिया भरी भरकम बिल
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बिजली मीटर
- फोटो : ????? ????
ललितपुर। कोरोना महामारी के दौरान करीब ढाई महीने के लॉकडाउन में चुनिंदा दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। लेकिन, लॉकडाउन में ढील के बाद दुकानदारों को बिजली विभाग ने भारीभरकम बिजली के बिल थमा दिए। अब व्यापारी बिलों को दुरुस्त कराने के लिए बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
लॉकडाउन में ढाई महीने तक शासन के निर्देश पर जिले में आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी प्रकार के व्यापारिक प्रतिष्ठान पूर्ण रुप से बंद रहे। बिजली विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर मीटर रीडरों से बिजली के बिल बनाना भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके बाद तीन महीने के औसत बिल बनाने के निर्देश पावर कार्पोरेशन द्वारा दिए गए। मई में लॉकडाउन में कुछ छूट के साथ मीटर रीडरों को बिजली के बिल बनाने के आदेश जारी किए गए। इसके बाद जब उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर रीडिंग के अनुसार बिजली के बिल बनाकर दिए गए, तो बिलों को देखकर उपभोक्ताओं के होश उड़ गए।
बिलों में लोड बढ़ाकर दे दिए गए। प्रति किलोवाट लोड के हिसाब से उपभोक्ताओं से चार सौ रुपये अतिरिक्त वसूली की जा रही है, जो बिल में जुड़कर नहीं आ रही है। इसमें दुकानें बंद होने के बाद भारी भरकम बिल आने के कारण उपभोक्ता परेशान हैं। वह बिल सही कराने के लिए बिजली विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन, विभागीय अधिकारी नियम बताकर भेजे गए बिलों को सही करार दे रहे हैं। व्यापारी बिल माफ करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है।
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लॉकडाउन के दौरान जब दुकानें बंद रहीं और व्यापार नहीं चला तो बिजली का बिल माफ किया जाना चाहिए। यदि बिल ले भी रहे हैं तो न्यूनतम लें, जो रीडिंग आ रही, सिर्फ वहीं बिल वसूला जाए। तीन माह का बिजली बिल एक साथ आने से उपभोक्ताओं पर भारी बोझ पड़ रहा है। इसलिए एक साथ बिल की वसूली न करें। कई लोगों के सात सौ रुपये के बिल सात हजार रुपये बनाकर थमा दिए, इन्हें तत्काल सुधारा जाए।
- शैलेंद्र सिंघई, जिला महामंत्री जिला उद्योग व्यापार मंडल
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लॉकडाउन के दौरान जब व्यापार पूरी तरह से बंद रहा तो बिजली का बिल भी नहीं आना चाहिए। यदि बिल दे भी रहे हैं तो जितनी भी रीडिंग आए, उतनी ही रीडिंग का बिल बनाकर दें। अनावश्यक बिल न दें। लॉकडाउन में बाजार पूरी तरह से बंद रहा तो बिजली का बिल भी माफ किया जाना चाहिए। बिजली विभाग प्रति किलोवाट प्रति माह के हिसाब से बिलों की वसूली कर रहा है। यह पूरी तरह गलत है। एक महीने बाद ही किलोवाट के हिसाब से बिलों को बनवाया जाएं।
- महेंद्र जैन मयूर, प्रांतीय उपाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।
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सरकार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ व्यापारी ही हैं। लॉकडाउन के दौरान जब सभी वर्गों का ध्यान रखा तो व्यापारी पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। उनकी समस्याएं समझे। भारी- भरकम बिजली का बिल देना व्यापारी को परेशान करना मात्र है। जब लॉकडाउन में बाजार बंद रहा तो बिल भी माफ होना चाहिए। बिजली का उपभोग ही नहीं किया गया तो बिल देना सही नहीं है।
- अनिल जैन ‘अंचल’, जिला महामंत्री उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
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लगातार तीन बार मीटर में जो लोड आता है, उसी के आधार पर बिलों में लोड बढ़ता है। बिजली के जो बिल भेजे जा रहे हैं, वह सही हैं।
- राकेश सिंह, अधिशासी अभियंता
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लॉकडाउन में ढाई महीने तक शासन के निर्देश पर जिले में आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी प्रकार के व्यापारिक प्रतिष्ठान पूर्ण रुप से बंद रहे। बिजली विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर मीटर रीडरों से बिजली के बिल बनाना भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके बाद तीन महीने के औसत बिल बनाने के निर्देश पावर कार्पोरेशन द्वारा दिए गए। मई में लॉकडाउन में कुछ छूट के साथ मीटर रीडरों को बिजली के बिल बनाने के आदेश जारी किए गए। इसके बाद जब उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर रीडिंग के अनुसार बिजली के बिल बनाकर दिए गए, तो बिलों को देखकर उपभोक्ताओं के होश उड़ गए।
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बिलों में लोड बढ़ाकर दे दिए गए। प्रति किलोवाट लोड के हिसाब से उपभोक्ताओं से चार सौ रुपये अतिरिक्त वसूली की जा रही है, जो बिल में जुड़कर नहीं आ रही है। इसमें दुकानें बंद होने के बाद भारी भरकम बिल आने के कारण उपभोक्ता परेशान हैं। वह बिल सही कराने के लिए बिजली विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन, विभागीय अधिकारी नियम बताकर भेजे गए बिलों को सही करार दे रहे हैं। व्यापारी बिल माफ करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है।
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लॉकडाउन के दौरान जब दुकानें बंद रहीं और व्यापार नहीं चला तो बिजली का बिल माफ किया जाना चाहिए। यदि बिल ले भी रहे हैं तो न्यूनतम लें, जो रीडिंग आ रही, सिर्फ वहीं बिल वसूला जाए। तीन माह का बिजली बिल एक साथ आने से उपभोक्ताओं पर भारी बोझ पड़ रहा है। इसलिए एक साथ बिल की वसूली न करें। कई लोगों के सात सौ रुपये के बिल सात हजार रुपये बनाकर थमा दिए, इन्हें तत्काल सुधारा जाए।
- शैलेंद्र सिंघई, जिला महामंत्री जिला उद्योग व्यापार मंडल
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लॉकडाउन के दौरान जब व्यापार पूरी तरह से बंद रहा तो बिजली का बिल भी नहीं आना चाहिए। यदि बिल दे भी रहे हैं तो जितनी भी रीडिंग आए, उतनी ही रीडिंग का बिल बनाकर दें। अनावश्यक बिल न दें। लॉकडाउन में बाजार पूरी तरह से बंद रहा तो बिजली का बिल भी माफ किया जाना चाहिए। बिजली विभाग प्रति किलोवाट प्रति माह के हिसाब से बिलों की वसूली कर रहा है। यह पूरी तरह गलत है। एक महीने बाद ही किलोवाट के हिसाब से बिलों को बनवाया जाएं।
- महेंद्र जैन मयूर, प्रांतीय उपाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।
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सरकार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ व्यापारी ही हैं। लॉकडाउन के दौरान जब सभी वर्गों का ध्यान रखा तो व्यापारी पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। उनकी समस्याएं समझे। भारी- भरकम बिजली का बिल देना व्यापारी को परेशान करना मात्र है। जब लॉकडाउन में बाजार बंद रहा तो बिल भी माफ होना चाहिए। बिजली का उपभोग ही नहीं किया गया तो बिल देना सही नहीं है।
- अनिल जैन ‘अंचल’, जिला महामंत्री उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
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लगातार तीन बार मीटर में जो लोड आता है, उसी के आधार पर बिलों में लोड बढ़ता है। बिजली के जो बिल भेजे जा रहे हैं, वह सही हैं।
- राकेश सिंह, अधिशासी अभियंता