{"_id":"61f6e04f0354c73d7052c9c1","slug":"major-bone-operations-are-not-happening-in-the-district-hospital-for-two-years-lalitpur-news-jhs2140570138","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में दो वर्ष से नहीं हो रहे हड्डी के मेजर ऑपरेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में दो वर्ष से नहीं हो रहे हड्डी के मेजर ऑपरेशन
विज्ञापन
ललितपुर। जिला अस्पताल में हड्डी फैैक्चर का उपचार कराने पहुंच रहे हैं, तो ध्यान दें केवल प्लास्टर व माइनर ऑपरेशन को ही पहुंचे। यहां पर आर्थो सर्जन तो हैं, लेकिन मेजर ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि दो वर्ष में 360 से अधिक हड्डी फैक्चर के मरीजों मेजर ऑपरेशन होने की जरूरत पर रेफर किया गया हैं।
जिला अस्पताल में प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं दिनों-दिन लचर होतीं जा रही हैं। दुर्घटनाओं में घायल सिर की चोट व हड्डी फैक्चर वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार कर रेफर किया जा रहा है।
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिमाह सड़क दुर्घटनाओं समेत हड्डी फैक्चर के कम से कम 15 मरीज पहुंचते हैं, जो माइनर ऑपरेशन के नहीं है। इन्हें मेजर ऑपरेशन की जरूरत होती है। इन सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है, जहां पर मोटी रकम चुकाना पड़ती है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में ऑर्थो सर्जन होने के बाद भी दो वर्ष से हड्डी के मेजर ऑपरेशन बंद पड़े हैं। यहां पर केवल प्लास्टर व माइनर ऑपरेशन की सुविधा है। ऐसे में दो वर्ष में 360 मरीज रेफर हो चुके हैं। जबकि माइनर मात्र 500 ऑपरेशन किए गए हैं। मेजर ऑपरेशन में मरीजों को रेफर होने की स्थिति में मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। कई निर्धन मरीजों को उपचार कराना तक मुश्किल हो जाता है।
ग्लूकोमीटर से नहीं हो रही शुगर की जांच
जिला अस्पताल में लगभग डेढ़ वर्ष से ग्लूकोमीटर से शुगर की जांच बंद पड़ी है। जिम्मेदार कोविड जांच में कर्मचारी तैनात होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बीते माहों में कोरोना कम होने पर भी ग्लूकोमीटर से जांच शुरू नहीं की गई थी। अब मरीजों को सैंपल देकर हो रही जांच से शुगर जांच के बाद उपचार के लिए दो दिन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल में ऑर्थो के मेजर ऑपरेशन बंद हैं। इन्हें जल्द ही अस्पताल में शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकितसा अधीक्षक
विज्ञापन
जिला अस्पताल में प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं दिनों-दिन लचर होतीं जा रही हैं। दुर्घटनाओं में घायल सिर की चोट व हड्डी फैक्चर वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार कर रेफर किया जा रहा है।
विज्ञापन
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिमाह सड़क दुर्घटनाओं समेत हड्डी फैक्चर के कम से कम 15 मरीज पहुंचते हैं, जो माइनर ऑपरेशन के नहीं है। इन्हें मेजर ऑपरेशन की जरूरत होती है। इन सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है, जहां पर मोटी रकम चुकाना पड़ती है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में ऑर्थो सर्जन होने के बाद भी दो वर्ष से हड्डी के मेजर ऑपरेशन बंद पड़े हैं। यहां पर केवल प्लास्टर व माइनर ऑपरेशन की सुविधा है। ऐसे में दो वर्ष में 360 मरीज रेफर हो चुके हैं। जबकि माइनर मात्र 500 ऑपरेशन किए गए हैं। मेजर ऑपरेशन में मरीजों को रेफर होने की स्थिति में मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। कई निर्धन मरीजों को उपचार कराना तक मुश्किल हो जाता है।
ग्लूकोमीटर से नहीं हो रही शुगर की जांच
जिला अस्पताल में लगभग डेढ़ वर्ष से ग्लूकोमीटर से शुगर की जांच बंद पड़ी है। जिम्मेदार कोविड जांच में कर्मचारी तैनात होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बीते माहों में कोरोना कम होने पर भी ग्लूकोमीटर से जांच शुरू नहीं की गई थी। अब मरीजों को सैंपल देकर हो रही जांच से शुगर जांच के बाद उपचार के लिए दो दिन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल में ऑर्थो के मेजर ऑपरेशन बंद हैं। इन्हें जल्द ही अस्पताल में शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकितसा अधीक्षक