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महरौनी जखौरा कच्चे मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे
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महरौनी (ललितपुर)। देश को स्वतंत्र हुए कई दशक बीत चुके है लेकिन जखौरा गांव की हालात देखकर अंग्रेजी शासन की याद आज भी ताजा हो जाती है। हम बात कर रहे है तहसील मुख्यालय से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जखौरा गाँव की जिसके बाशिंदों को तहसील मुख्यालय से गाँव पहुँचने के लिए आज तक पक्की सड़क नसीब नही हो सकी ।
पाँच हजार आबादी वाला यह गांव सड़क जैसी मूलभूत समस्या से ग्रसित है । गांव के वासिंदे नारकीय जीवन जीने को मजबूर है आज से लगभग दो दशक पहले जिला पंचायत ने तहसील मुख्यालय से जखौरा गाँव को जोड़ने के लिये लिंक रोड़ डलवाया था जो अव काफी जर्जर हालात में है , बडे बड़े गड्ढे सड़क की शोभा बड़ा रहे है जरा सी बरसात होते ही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है जिससे लोगो का निकलना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो जाता है , यातायात में स्कूली छात्र छात्राएं फिसल फिसल कर गिर जाती है । वहीं बरसात के महीनों में स्कूल पहुँच ही नही पाती है , राहगीर कइयों वर्षो से आश तो लगाए है की कभी न कभी सड़क बनेगी । सड़क का सपना कब पूरा होगा , सरकार हो या अधिकारी कोई सुनने को तैयार नहीं है। वही चुनाव के समय सब बादे सब करते है लेकिन उन्हें निभाता कोई नही है ।
भले ही केंद्र व राज्य सरकारें ग्रामीण भारत की मूलभूत सुविधाओं पर बल दे रही है , वहीं सड़क जैसी सुविधाओ से जखौरा गांव वंचित है ।जो अपने आप में बानगी है आखिरकार यहाँ के लोगो के सपने कब पूरे होंगे । गांव बालो को दूर दूर तक नही दिखता। हताश परेशान गांव के वाशिंदे कइयों बार सड़क बनवाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा चुके है, अधिकारियों दुवारा आश्वाशन मिलता है लेक़िन सड़क कब बनेगी इसका जबाब किसी के पास नही है।
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मेरी तो जिंदगी निकल गई, आशा थी कि महरौनी तक चलने को पक्की सड़क देखने को मिल जाएगी। चुनाव के समय नेताओं द्वारा सड़क बनवाने की मांग की जाती है और उनके आश्वासन पर वोट भी देते हैं लेकिन पांच साल नेताओं को सड़क की याद नहीं आती है।
हल्कू निवासी जखौरा।
सड़क की कोई सुध नहीं लेने को तैयार है। आजादी के बाद से कोई भी आला अधिकारी मेरे गांव नहीं पहुंचा है। गड्ढे वाली सड़क पर चलकर एक बार डीएम मेरे गांव में चौपाल लगा लें तो निश्चित ही हमारे गांव की सड़क बन ही जाएगी।
राघवेंद्र सिंह निवासी जखौरा
बरसात के चार माह तो बच्चे औऱ बच्चियां स्कूल पढ़ाई करने नहीं पहुंच पाती हैं। इस दौरान सड़क चलने लायक नहीं बचती, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है साथ ही उनका कोर्स भी पिछड़ जाता है। सड़क बन जाय तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
विक्रांत सिंह निवासी जखौरा
मौजूदा समय में कोई सुनने वाला नही है। सड़क कभी नहीं बन पाएगी, यह किससे आशा करें? यूं ही जिंदगी काट रहे हैं, लगता है कि ऐसे ही बच्चों की भी कटेगी। सड़क की बात करके हमें जलील मत करो।
पप्पू राजा निबासी जखौरा
सड़क बनवाने के लिये जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। वर्तमान में सड़क की हालत देखते ही बनती है।
देवराज सिंह प्रधान प्रतिनिधि जखौरा
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पाँच हजार आबादी वाला यह गांव सड़क जैसी मूलभूत समस्या से ग्रसित है । गांव के वासिंदे नारकीय जीवन जीने को मजबूर है आज से लगभग दो दशक पहले जिला पंचायत ने तहसील मुख्यालय से जखौरा गाँव को जोड़ने के लिये लिंक रोड़ डलवाया था जो अव काफी जर्जर हालात में है , बडे बड़े गड्ढे सड़क की शोभा बड़ा रहे है जरा सी बरसात होते ही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है जिससे लोगो का निकलना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो जाता है , यातायात में स्कूली छात्र छात्राएं फिसल फिसल कर गिर जाती है । वहीं बरसात के महीनों में स्कूल पहुँच ही नही पाती है , राहगीर कइयों वर्षो से आश तो लगाए है की कभी न कभी सड़क बनेगी । सड़क का सपना कब पूरा होगा , सरकार हो या अधिकारी कोई सुनने को तैयार नहीं है। वही चुनाव के समय सब बादे सब करते है लेकिन उन्हें निभाता कोई नही है ।
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भले ही केंद्र व राज्य सरकारें ग्रामीण भारत की मूलभूत सुविधाओं पर बल दे रही है , वहीं सड़क जैसी सुविधाओ से जखौरा गांव वंचित है ।जो अपने आप में बानगी है आखिरकार यहाँ के लोगो के सपने कब पूरे होंगे । गांव बालो को दूर दूर तक नही दिखता। हताश परेशान गांव के वाशिंदे कइयों बार सड़क बनवाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा चुके है, अधिकारियों दुवारा आश्वाशन मिलता है लेक़िन सड़क कब बनेगी इसका जबाब किसी के पास नही है।
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मेरी तो जिंदगी निकल गई, आशा थी कि महरौनी तक चलने को पक्की सड़क देखने को मिल जाएगी। चुनाव के समय नेताओं द्वारा सड़क बनवाने की मांग की जाती है और उनके आश्वासन पर वोट भी देते हैं लेकिन पांच साल नेताओं को सड़क की याद नहीं आती है।
हल्कू निवासी जखौरा।
सड़क की कोई सुध नहीं लेने को तैयार है। आजादी के बाद से कोई भी आला अधिकारी मेरे गांव नहीं पहुंचा है। गड्ढे वाली सड़क पर चलकर एक बार डीएम मेरे गांव में चौपाल लगा लें तो निश्चित ही हमारे गांव की सड़क बन ही जाएगी।
राघवेंद्र सिंह निवासी जखौरा
बरसात के चार माह तो बच्चे औऱ बच्चियां स्कूल पढ़ाई करने नहीं पहुंच पाती हैं। इस दौरान सड़क चलने लायक नहीं बचती, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है साथ ही उनका कोर्स भी पिछड़ जाता है। सड़क बन जाय तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
विक्रांत सिंह निवासी जखौरा
मौजूदा समय में कोई सुनने वाला नही है। सड़क कभी नहीं बन पाएगी, यह किससे आशा करें? यूं ही जिंदगी काट रहे हैं, लगता है कि ऐसे ही बच्चों की भी कटेगी। सड़क की बात करके हमें जलील मत करो।
पप्पू राजा निबासी जखौरा
सड़क बनवाने के लिये जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। वर्तमान में सड़क की हालत देखते ही बनती है।
देवराज सिंह प्रधान प्रतिनिधि जखौरा