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लोकसभा चुनाव : सिर्फ कांग्रेस ने स्थानीय नेता पर जताया भरोसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मात्र एक नाम छोड़ दें तो जनपद से कोई भी नेता लोकसभा नहीं पहुंचा। यहां के सुजान सिंह बुंदेला दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा में झांसी-ललितपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में भाजपा में कुछ नाम जनपद के नेताओं के चल रहे थे, लेकिन झांसी के नेता पर पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी की मुहर लगा दी है। कांग्रेस से भी झांसी के नेता के नाम पर चर्चा चल रही है। बसपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। समाजवादी पार्टी का गठबंधन कांग्रेस से होने के कारण यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है।
यहां 1951 में सबसे पहले सांसद लोटनराम बने। इसके बाद लगातार तीन बार सुशीला नैयर सांसद रहीं। गोविंददास रिछारिया 1971 में सांसद बने। 77 में एक बार फिर सुशीला नैयर चुनाव जीत कर सांसद बनीं। 80 में विश्वनाथ शर्मा सांसद बने। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर सुजान सिंह को विजय मिली। इसके बाद राजेंद्र अग्निहोत्री सांसद रहे। 1999 में एक बार फिर सुजान सिंह की जीत हुई। इनके बाद चंद्रपाल सिंह यादव, प्रदीप जैन आदित्य, उमा भारती व अनुराग शर्मा को विजय मिली, लेकिन ये सभी जनपद से बाहर के नेता रहे। इनमें अधिकांश नेता झांसी के ही रहे हैं। इस बार भी किसी बड़े दल से जनपद के किसी नेता को टिकट मिलने के आसार नहीं हैं।
भाजपा ने वर्तमान सांसद को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। राजेंद्र अग्निहोत्री के बाद अनुराग शर्मा, पार्टी के ऐसा नेता होंगे, जिन्हें इस सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कांग्रेस की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य का टिकट पक्का माना जा रहा है।
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ललितपुर। मात्र एक नाम छोड़ दें तो जनपद से कोई भी नेता लोकसभा नहीं पहुंचा। यहां के सुजान सिंह बुंदेला दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा में झांसी-ललितपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में भाजपा में कुछ नाम जनपद के नेताओं के चल रहे थे, लेकिन झांसी के नेता पर पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी की मुहर लगा दी है। कांग्रेस से भी झांसी के नेता के नाम पर चर्चा चल रही है। बसपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। समाजवादी पार्टी का गठबंधन कांग्रेस से होने के कारण यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है।
यहां 1951 में सबसे पहले सांसद लोटनराम बने। इसके बाद लगातार तीन बार सुशीला नैयर सांसद रहीं। गोविंददास रिछारिया 1971 में सांसद बने। 77 में एक बार फिर सुशीला नैयर चुनाव जीत कर सांसद बनीं। 80 में विश्वनाथ शर्मा सांसद बने। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर सुजान सिंह को विजय मिली। इसके बाद राजेंद्र अग्निहोत्री सांसद रहे। 1999 में एक बार फिर सुजान सिंह की जीत हुई। इनके बाद चंद्रपाल सिंह यादव, प्रदीप जैन आदित्य, उमा भारती व अनुराग शर्मा को विजय मिली, लेकिन ये सभी जनपद से बाहर के नेता रहे। इनमें अधिकांश नेता झांसी के ही रहे हैं। इस बार भी किसी बड़े दल से जनपद के किसी नेता को टिकट मिलने के आसार नहीं हैं।
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भाजपा ने वर्तमान सांसद को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। राजेंद्र अग्निहोत्री के बाद अनुराग शर्मा, पार्टी के ऐसा नेता होंगे, जिन्हें इस सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कांग्रेस की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य का टिकट पक्का माना जा रहा है।
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