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स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लटके ताले, मरीज जिला अस्पताल के सहारे

Tue, 30 Aug 2022 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 01:03 AM IST
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Locks hanging on health sub-centres, patients with the help of district hospital
सिलावन(ललितपुर)। ग्रामीण इलाकों में जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बनाए गए स्वास्थ्य उपकेंद्र महज दिखावा साबित हो रहे हैं। ज्यादातर स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताला लटका हुआ है। जिसके चलते ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर या फिर मुख्यालय तक का सफर तय करना पड़ता है।
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विकास खंड महरौनी अंतर्गत 33 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। जिसमें से ज्यादातर पर ताला लटका है। ग्राम पंचायत छपरट में परिवार कल्याण उपस्वास्थ्य केंद्र का सालों से ताला खुला ही नहीं है। ग्राम पंचायत समोगर के केंद्र पर भी अरसे से ताला लटका है। केंद्र के आसपास बारिश का पानी भरा है और घास-फूस खड़ी है। केंद्र की दीवार कॉलेज के विज्ञापन में प्रयोग हो रही है। आसपास के लोगों ने बताया कि इस केंद्र का काफी समय से ताला नहीं खुला है। ये दो उप स्वास्थ्य केंद्र तो बानगी मात्र हैं। विकास खंड के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ज्यादातर समय तालाबंदी ही रहती है। विभागीय अफसरों की मानें तो एएनएम की कमी के चलते शासन की मंशा के अनुरूप उपकेंद्र चल नहीं पा रहे हैं।
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इसलिए खोले गए थे उप स्वास्थ्य केंद्र
मातृ एवं शिशु मृत्युदर कम करने के उद्देश्य से ऐसे पिछड़े ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निर्माण कराया गया था। जहां लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं पाने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता था। प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र पर एक एएनएम की तैनाती का प्रावधान किया गया। इतना ही नहीं उपकेंद्र पर पदस्थ एएनएम को छह दिन के कामकाज की योजना भी शासन स्तर से निर्धारित कर दी गई, लेकिन जच्चा-बच्चा के जीवन से संबंधित इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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मूलभूत सुविधाएं नदारद
ग्रामीण इलाकों में स्थित ज्यादातर उपकेंद्रों में मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। उपकेंद्रों पर बिजली, पानी एवं सरकारी वाहन की व्यवस्था होना चाहिए। इसके अलावा वहां एएनएम का निवास होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हैं जिस वजह से भी वह तालाबंदी का शिकार हैं।
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नोट-सीएमओ का वर्जन बाद में भेजा जाएगा।
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