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Lalitpur News: जर्जर भवनों में दांव पर जिंदगी, सरकारी कार्यालय व दुकानें भी असुरक्षित
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अंग्रेजी शासनकाल में बने कई सरकारी व निजी भवन जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। जिससे यह खतरा बने हुए है। आश्चर्य की बात तो यह है कि आज भी इनमें मकान, दुकान और व्यवसाय संचालित है। आंधी-बारिश में कभी भी यह भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। जिससे बड़े हादसे की आशंका बनीं हुई है। बावजूद जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
शहर के बीचों बीच मुख्य नझाई बाजार स्थित है, यहीं पर सबसे पुराना सिनेमाघर स्थित है। कभी मनोरंजन का साधन रहा यह सिनेमाघर सालों से बंद है। जर्जर हो चुकी दो मंजिला इमारत के नीचे और आसपास दर्जनों दुकानें है। जिसके भवन की हालत ठीक नहीं है। इसी इमारत से सटकर कई फुटकर दुकानदार भी अपना व्यापार कर रहे हैं। सिनेमाघर की छत का जर्जर हिस्सा भी बारिश और हवा के तेज झोंकों में कई बार गिर भी चुका है। इससे यहां हादसों का डर बना रहता है।
कचहरी परिसर स्थित पुराने कलेक्ट्रेट भवन का भी कुछ ऐसा ही हाल है। पुराने कलेक्ट्रेट के जर्जर भवन के पास कचहरी परिसर में दर्जनों अधिवक्ताओं का चैंबर है। तीन वर्ष पूर्व जर्जर भवन की छत से चार से पांच बार बड़े पत्थर गिरने से बड़ा हादसा होने से बचा था। बावजूद इसके कोई सुधि नहीं ली गई। आज भी इसकी स्थिति काफी जर्जर है। इस भवन के पोर्च का हाल तो यह है कि पोर्च के छज्जे से पीपल की मोटे जड़े तक निकल आई हैं, जो इसके छज्जे के पत्थरों को धीरे-धीरे तोड़ रही हैं। अधिवक्ताओं ने भवन की मरम्मत या गिराने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने सुधि नहीं ली। हालांकि, प्रशासन ने क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगा दिया है। इसके चारों ओर कम ऊंचाई की बाउंड्री बना दी गई है।
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इंसेट
जर्जर भवन में संचालित है सरकारी कार्यालय
ललितपुर। पुराने कलेक्ट्रेट भवन में कई सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं, इनमें जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, डूडा, जिला पूर्ति कार्यालय, जिला प्रोबेशन कार्यालय, जिला अभियोजन कार्यालय, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व कार्यालय समेत आधा दर्जन से अधिक कार्यालय संचालित हो रहे हैं। जिनमें कर्मचारियों के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों का आना जाना लगा रहता है। जिला परिषद स्थित अधिशासी अभियंता प्रथम विद्युत वितरण निगम प्रथम का कार्यालय भी स्थित है। इस भवन में बारिश के मौसम में छताें से पानी टपकता है। इससे कर्मचारियों को भी हादसों का डर बना रहता है।
वर्जन
-शहर में जहां भी जर्जर हो चुकी इमारतें या भवन हैं, इसके संबंध में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। यदि कोई शिकायत करता है या उस भवन से जानमाल का खतरा होता है, तो उसके संबंध में पालिका कार्रवाई द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।
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ललितपुर। अंग्रेजी शासनकाल में बने कई सरकारी व निजी भवन जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। जिससे यह खतरा बने हुए है। आश्चर्य की बात तो यह है कि आज भी इनमें मकान, दुकान और व्यवसाय संचालित है। आंधी-बारिश में कभी भी यह भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। जिससे बड़े हादसे की आशंका बनीं हुई है। बावजूद जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
शहर के बीचों बीच मुख्य नझाई बाजार स्थित है, यहीं पर सबसे पुराना सिनेमाघर स्थित है। कभी मनोरंजन का साधन रहा यह सिनेमाघर सालों से बंद है। जर्जर हो चुकी दो मंजिला इमारत के नीचे और आसपास दर्जनों दुकानें है। जिसके भवन की हालत ठीक नहीं है। इसी इमारत से सटकर कई फुटकर दुकानदार भी अपना व्यापार कर रहे हैं। सिनेमाघर की छत का जर्जर हिस्सा भी बारिश और हवा के तेज झोंकों में कई बार गिर भी चुका है। इससे यहां हादसों का डर बना रहता है।
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कचहरी परिसर स्थित पुराने कलेक्ट्रेट भवन का भी कुछ ऐसा ही हाल है। पुराने कलेक्ट्रेट के जर्जर भवन के पास कचहरी परिसर में दर्जनों अधिवक्ताओं का चैंबर है। तीन वर्ष पूर्व जर्जर भवन की छत से चार से पांच बार बड़े पत्थर गिरने से बड़ा हादसा होने से बचा था। बावजूद इसके कोई सुधि नहीं ली गई। आज भी इसकी स्थिति काफी जर्जर है। इस भवन के पोर्च का हाल तो यह है कि पोर्च के छज्जे से पीपल की मोटे जड़े तक निकल आई हैं, जो इसके छज्जे के पत्थरों को धीरे-धीरे तोड़ रही हैं। अधिवक्ताओं ने भवन की मरम्मत या गिराने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने सुधि नहीं ली। हालांकि, प्रशासन ने क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगा दिया है। इसके चारों ओर कम ऊंचाई की बाउंड्री बना दी गई है।
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जर्जर भवन में संचालित है सरकारी कार्यालय
ललितपुर। पुराने कलेक्ट्रेट भवन में कई सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं, इनमें जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, डूडा, जिला पूर्ति कार्यालय, जिला प्रोबेशन कार्यालय, जिला अभियोजन कार्यालय, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व कार्यालय समेत आधा दर्जन से अधिक कार्यालय संचालित हो रहे हैं। जिनमें कर्मचारियों के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों का आना जाना लगा रहता है। जिला परिषद स्थित अधिशासी अभियंता प्रथम विद्युत वितरण निगम प्रथम का कार्यालय भी स्थित है। इस भवन में बारिश के मौसम में छताें से पानी टपकता है। इससे कर्मचारियों को भी हादसों का डर बना रहता है।
वर्जन
-शहर में जहां भी जर्जर हो चुकी इमारतें या भवन हैं, इसके संबंध में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। यदि कोई शिकायत करता है या उस भवन से जानमाल का खतरा होता है, तो उसके संबंध में पालिका कार्रवाई द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।