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17 नहीं 77 हजार रुपये देना पड़ रहा किराया
lalitpur
Updated Mon, 29 Aug 2016 01:14 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। एक साल पूर्व बिना नोटिस के भारतीय जीवन बीमा निगम का कार्यालय सरकारी इमारत से निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके चलते उन्हें चार गुना अधिक किराया देना पड़ रहा है। पहले जहां नगर पालिका को एलआइसी द्वारा मात्र 17 हजार रुपये सरकारी भवन का किराया चुकाया जा रहा था, अब उन्हें 77 हजार रुपये किराया भुगतान करना है। इसके साथ ही नवीन भवन में पार्किंग की सुविधा भी नहीं है, जबकि एग्रीमेंट में सुविधा दिखाई गई है। इसका खुलासा जन सूचना अधिकार द्वारा मांगी गई जानकारी पर हुआ है।
भारतीय जीवन बीमा निगम का कार्यालय वर्षों से सुपर मार्केट स्थित नगर पालिका के सरकारी भवन में संचालित होता रहा था। इसके लिए एलआईसी को हर माह 17 हजार रुपया किराया देना होता था। नगर पालिका की ओर से बिना नोटिस एलआइसी कार्यालय को 25 जुलाई 2015 को इलाइट चौराहे के पास स्थित एक निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जो शहर से दो किलोमीटर दूर है और उसका किराया 77 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। इसमें पार्किंग का किराया भी शामिल किया गया है। जबकि हकीकत में नवीन भवन में पार्किंग नहीं है। इसकी पुष्टि हरीराम द्वारा मांगी गई जन सूचना अधिकार से मिली सूचना से भी स्पष्ट हो रही है।
पुराना कार्यालय शहर के बीचोंबीच था। लेकिन नए भवन में पार्किंग सुविधा न होने के चलते उपभोक्ताओं को सड़क किनारे वाहन रखने पड़ रहे हैं। नवीन भवन को किराए पर अधिग्रहीत करने और उसके लिए एग्रीमेंट करने की प्रक्रिया में कानपुर मंडल के अधिकारियों द्वारा भी कई बार नवीन भवन का भ्रमण किया गया, इसके बाद भी अधिग्रहण संबंधी नियमों का ताक पर रखते हुए स्टैंड जैैैसे महत्वपूर्ण बिंदू को नजरअंदाज किया गया और खाना पूर्ति करते हुए कार्यालय नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अलावा नवीन भवन के लिए एग्रीमेंट 14 अगस्त 2014 को किया गया था, जिसके तहत उसी दिन से कार्यालय का 77 हजार रुपये का किराया शुरू हो गया, जबकि एलआइसी कार्यालय नवीन भवन में 25 जुलाई 2015 को स्थानांतरित किया गया था। ऐसे में एलआइसी द्वारा एक वर्ष का 9 लाख 24 हजार रुपये का किराया खाली भवन का दिया गया। जबकि एग्रीमेंट से स्थानांतरित होने के दिन तक एलआइसी द्वारा नगरपालिका को भी पुराने भवन का किराया दिया गया और नवीन भवन का भी उसी दौरान का एक साल तक का एक ही कार्यालय का किराया दिया गया है। ऐसे में एलआइसी द्वारा दो भवनों के किराए का एक साथ भुगतान किया जाना वित्तीय दोहन की ओर इंगित करता है।
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कार्यालय स्थानांतरित किए जाने के लिए जीवन बीमा निगम का अलग विभाग है, जो सर्वे कर रिपोर्ट देता है, उसके बाद ही नवीन भवन में स्थानांतरित किया जाता है।
-पीके कटियार, मार्केट मैनेजर, कानपुर।
स्थानांतरण का निर्णय कानपुर डिवीजन स्तर पर लिया गया था और यह उनके कार्यकाल से पूर्व का मामला है।
- सुनील सचदेवा, शाखा प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम, ललितपुर
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भारतीय जीवन बीमा निगम का कार्यालय वर्षों से सुपर मार्केट स्थित नगर पालिका के सरकारी भवन में संचालित होता रहा था। इसके लिए एलआईसी को हर माह 17 हजार रुपया किराया देना होता था। नगर पालिका की ओर से बिना नोटिस एलआइसी कार्यालय को 25 जुलाई 2015 को इलाइट चौराहे के पास स्थित एक निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जो शहर से दो किलोमीटर दूर है और उसका किराया 77 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। इसमें पार्किंग का किराया भी शामिल किया गया है। जबकि हकीकत में नवीन भवन में पार्किंग नहीं है। इसकी पुष्टि हरीराम द्वारा मांगी गई जन सूचना अधिकार से मिली सूचना से भी स्पष्ट हो रही है।
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पुराना कार्यालय शहर के बीचोंबीच था। लेकिन नए भवन में पार्किंग सुविधा न होने के चलते उपभोक्ताओं को सड़क किनारे वाहन रखने पड़ रहे हैं। नवीन भवन को किराए पर अधिग्रहीत करने और उसके लिए एग्रीमेंट करने की प्रक्रिया में कानपुर मंडल के अधिकारियों द्वारा भी कई बार नवीन भवन का भ्रमण किया गया, इसके बाद भी अधिग्रहण संबंधी नियमों का ताक पर रखते हुए स्टैंड जैैैसे महत्वपूर्ण बिंदू को नजरअंदाज किया गया और खाना पूर्ति करते हुए कार्यालय नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अलावा नवीन भवन के लिए एग्रीमेंट 14 अगस्त 2014 को किया गया था, जिसके तहत उसी दिन से कार्यालय का 77 हजार रुपये का किराया शुरू हो गया, जबकि एलआइसी कार्यालय नवीन भवन में 25 जुलाई 2015 को स्थानांतरित किया गया था। ऐसे में एलआइसी द्वारा एक वर्ष का 9 लाख 24 हजार रुपये का किराया खाली भवन का दिया गया। जबकि एग्रीमेंट से स्थानांतरित होने के दिन तक एलआइसी द्वारा नगरपालिका को भी पुराने भवन का किराया दिया गया और नवीन भवन का भी उसी दौरान का एक साल तक का एक ही कार्यालय का किराया दिया गया है। ऐसे में एलआइसी द्वारा दो भवनों के किराए का एक साथ भुगतान किया जाना वित्तीय दोहन की ओर इंगित करता है।
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कार्यालय स्थानांतरित किए जाने के लिए जीवन बीमा निगम का अलग विभाग है, जो सर्वे कर रिपोर्ट देता है, उसके बाद ही नवीन भवन में स्थानांतरित किया जाता है।
-पीके कटियार, मार्केट मैनेजर, कानपुर।
स्थानांतरण का निर्णय कानपुर डिवीजन स्तर पर लिया गया था और यह उनके कार्यकाल से पूर्व का मामला है।
- सुनील सचदेवा, शाखा प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम, ललितपुर