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पुस्तकालय है, किताबें नहीं

Fri, 07 Oct 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 07 Oct 2016 12:43 AM IST
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library lalitpur news - फोटो : demo
ललितपुर। 
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प्रतिस्पर्धा के दौर में राजकीय जिला पुस्तकालय केवल उपन्यास व धार्मिक ज्ञान ही उपलब्ध करा पा रहा है। वर्तमान में पुस्तकालय में 27 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए जरूरी पुस्तकों का टोटा है। ऐसी ही स्थिति नगर पालिका द्वारा संचालित पुस्तकालय की भी है। पालिका कॉमिक्सों के सहारे बच्चों को आकर्षित करके पाठकों की संख्या दर्शाने में जुटी हुई है।
 जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय परिसर में स्थित राजकीय जिला पुस्तकालय 20 वर्ष से अधिक समय से चल रहा है। इसका संचालन सुबह आठ बजे से 10 बजे तक व दोपहर 02 बजे से शाम पांच बजे तक किया जाता है। शासन द्वारा पुस्तकालय की स्थापना इस उद्देश्य से कराई गई  है कि बच्चों व पाठकों की रुचि के अनुसार पठन पाठन सामग्री उपलब्ध हो सके। लेकिन यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए कोई सुविधा नहीं है।
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वर्तमान में पुस्तकालय में 27 हजार से अधिक पुस्तकें, उपन्यास व ग्रंथ आदि उपलब्ध हैं। पुस्तकालय के आस-पास जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, बेसिक शिक्षा विभाग, आफीसर्स कालौनी, जेल विभाग की कालौनी, बस स्टैंड, जिला अस्पताल व अन्य कार्यालय व संस्था ऐसी जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आना-जाना होता है, इसके बावजूद भी पुस्तकालय में प्रतिदिन लगभग तीस पाठक ही आते हैं। 
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डिमांड भेजने पर भी उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं पुस्तकें
विगत तीन-चार वर्षों से पुस्तकालय अध्यक्ष का पद रिक्त चल रहा है, वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज के विज्ञान वर्ग के प्रवक्ता अमित शुक्ला को पुस्तकालय अध्यक्ष प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि राजकीय पुस्तकालय में पुस्तकें व अन्य पाठन सामग्री शासन स्तर से खरीद करके ही भेजी जाती है। कुछ माह पूर्व शासन ने निर्देश दिए थे कि पुस्तकालय में आने वाले जो प्रतियोगी पुस्तकों की मांग करते हैं उनसे एक रजिस्टर पर मांग को लिखित रूप से ले लेें। इसके बाद उनके द्वारा मांग रजिस्टर की कापी शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन इसका भी कोई असर दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय में इंटरनेट की सुविधा है।
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