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लाल को काल के गाल से बचाएं

Wed, 04 Jul 2018 01:29 AM IST
amarujala
amarujala Updated Wed, 04 Jul 2018 01:29 AM IST
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lal ko kal ke gal se bacay
traffic, jhansi news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
जिले में धड़ल्ले से किशोर दो पहिया वाहनों को दौड़ा रहे हैं। नियमों की अनदेखी के कारण असमय काल के गाल में समाते जा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि नाबालिगों के वाहन चलाने पर न तो प्रशासन रोक लगा रहा है और न ही स्कूल प्रबंधन। वहीं, शहर के प्रबुद्ध नागरिक इसके लिए अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।  
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शहर क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन दुर्घटनाओं में इजाफा होता जा रहा है। इससे आए दिन लोग काल के गाल में समाते चले जा रहे हैं। जहां आबादी बढ़ने से वाहनों की संख्या बढ़ी है, वहीं बढ़ते अतिक्रमण से शहर का दायरा छोटा होता चला जा रहा है। ऐसे में जरा सी असावधानी लोगों को मौत के मुहाने पर खड़ी कर देती है। वहीं, शहर के समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक इसके लिए अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जो अपने किशोरों के हाथों में वाहनों की चाबी थमाकर उन्हें फर्राटा भरकर दौड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। शहर समेत पूरे जिले में किशोर धड़ल्ले से दो पहिया और चार पहिया वाहन चलाते नजर आ जाते हैं। इनको वाहन चलाने से रोकने के लिए न तो अभिभावक ध्यान दे रहे हैं, न ही पुलिस प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही स्कूल प्रबंधन। आलम यह है कि छोटी उम्र में वाहन चलाने वाले किशोर इतनी तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं कि आए दिन छोटी-छोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। शहर क्षेत्र के इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र स्कूलों की छुट्टी होते ही तेज रफ्तार में वाहनों को दौड़ाते हुए निकलते हैं। इससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। यातायात विभाग के आंकड़ों की मानें तो जून महीने के दौरान कुल 24 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें सात लोगों की मौत और 28 लोग घायल हुए हैं।  
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नाबालिगों को वाहन देने से पूर्व अभिभावकों को भी सोचना चाहिए। पुलिस या प्रशासन हर रोज कार्रवाई नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए खुद की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।  
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डा. विजय द्विवेदी, चिकित्सक

शहर क्षेत्र में आबादी बढ़ने के साथ ही सड़कों का दायरा भी छोटा हो रहा है। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए देने से पूर्व अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मैं खुद अपने घर में यह नियम लागू कर चुका हूं।  
राजीव समैया, व्यापारी

नाबालिग किशोरों को यातायात के नियमों की जानकारी नहीं होती है। इसके अलावा किशोर अवस्था में वाहन की गति पर भी नियंत्रण नहीं होता है। ऐसे में किशोर युवक और युवतियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की भी है।
अनामिका लोहिया, शिक्षिका

नावालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए प्रशासन को विशेष अभियान चलाना चाहिए। इससे शहर क्षेत्र में दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी और असमय होने वाली मृत्यु नहीं होगी।  
राकेश तिवारी, अधिवक्ता

यह हैं शहर क्षेत्र के ब्लैक स्पॉट  
- वर्णी चौराहा
- तुवन चौराहा
- कैलगुवां चौराहा,  
- मसौरा बैरियर
- पिसनारी तिराहा
- मन्नू कोरी पेट्रोल पंप (झांसी बाइपास)
- गोविंद नगर (ढुरा बाजार)

समय-समय पर स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए जाते रहते हैं और चेकिंग के माध्यम से चालान भी किया जाता है। आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक किया जाता रहेगा। अभिभावकों को भी अपनी ओर से पहल करनी चाहिए। - डॉ. ओपी सिंह, पुलिस अधीक्षक  


स्कूल में किसी को वाहन लाने से रोक नहीं है। लेकिन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक किया जाता है और वाहन लाने वाले नाबालिग छात्रों को रोका भी जाता है।  
राजेंद्र त्रिपाठी, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज
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